भारत-पाक: 'ताली दोनों हाथों से बजती है'

शाहिद मलिक
Image caption शाहिद मलिक के अनुसार वज़ीरिस्तान में सेना की कार्रवाई अधिक से अधिक चार से आठ हफ़्ते चलेंगीं.

भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त शाहिद मलिक ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि 'पाकिस्तान ने भारत-पाक समग्र वार्ता शुरु करने की हर मुमकिन कोशिश की है और वह चाहता है कि भारत भी ऐसा कोई क़दम उठाए जिससे ज़ाहिर हो कि व्यावहारिक रुप से भारत भी संबंधों को आगे बढ़ाना चाहता है.'

इन्हीं विषयों पर भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त शाहिद मलिक से हुई बातचीत.

सवाल- हम देख रहे हैं कि पिछले कुछ दिनों में पाकिस्तान में चरमपंथी हमलों में काफ़ी तेज़ी आई है. ऐसे में हम ये जानना चाहते हैं कि पाकिस्तान लगातार हो रहे इन हमलों को किस तरह से देख रहा है और ये हमले जिस तरह पाकिस्तान के सामने एक बड़ी चुनौती बन गए हैं, क्या पाकिस्तान इनको क़ाबू कर पाएगा?

शाहिद मलिक- अमित आपको मालूम ही है कि पिछले दो-तीन वर्षों से पाकिस्तान सहित ये पूरा क्षेत्र दहशतगर्दी की चपेट में है. ऐसे में ज़ाहिर है मर्द-औरतें, बच्चें और बूढ़ें सभी इससे प्रभावित हैं. पाकिस्तान सरकार की कोशिश है कि दहशतगर्दी की जो लहर चल रही है उसे जल्द से जल्द और प्रभावी ढंग से ख़त्म किया जाए.

इसकी वजहें तो कई हैं, आपको भी मालूम है और मुझे भी पता है. लेकिन हमें देखना यह है कि इसे किस तरह से जल्द से जल्द ख़त्म किया जाए. मैं आपको बताना चाहता हूँ कि पाकिस्तान सरकार ने इसे समाप्त करने के लिए हर स्तर पर कोशिशें की हैं. मुझे ये बताते हुए ख़ुशी भी हो रही है कि इस मुद्दे पर हर सियासी पार्टी सरकार के साथ है.

सवाल- पिछले दिनों पाकिस्तानी सेना ने चरमपंथियों के ख़िलाफ़ दक्षिणी वज़ीरिस्तान में कार्रवाई शुरू की है, लेकिन ऐसा लग रहा है कि जंगजू या चरमपंथी इस लड़ाई को पाकिस्तान के शहरों में लेकर चले आए हैं. शुक्रवार को ही इस्लामाबाद के बाहर एक हमला हुआ है, पेशावर में हमला हुआ है.

शाहिद मलिक- दक्षिणी वज़ीरिस्तान में 17 अक्तूबर से सेना ने कार्रवाई शुरू की है. इससे पहले पाकिस्तानी सरकार और फ़ौज इन चरमपंथियों के ख़िलाफ़ इसी तरह की कार्रवाई स्वात, ख़ैबर एजेंसी और बाजौड़ एजेंसी में कर चुकी है. तीनों ऑपरेशन कामयाब रहे हैं. जो नई कार्रवाई शुरू की गई है उसका लक्ष्य इन दहशतगर्दों से निजात दिलाना है.

जहाँ तक आपका कहना है कि दक्षिणी वज़ीरिस्तान में जो कार्रवाई शुरू हुई है उसका असर शहरों में देखने को आया है, हमें कहने में कोई झिझक नहीं है कि जो कार्रवाई हो रही है, उसकी प्रतिक्रिया होगी. ज़ाहिर है ये हताश क़िस्म का दुश्मन है जिसे जब कोई रास्ता नहीं दिखता तो जहाँ कुछ भी दिखे, उसे निशाना बनाता है.

आबादी वाले इलक़ों में चरमपंथी जो हमले कर रहे हैं उससे निपटने के लिए सरकार ने तमाम एहतियाती क़दम उठाएं हैं. आपने ख़ुद देखा होगा कि सरकार ने इन हमलों पर नियंत्रण करने के लिए हर मुमकिन कोशिशें की हैं और बहुत हद तक कामयाबी भी हासिल हुई है.

पिछले दिनों एक युनिवर्सिटी पर हमला हुआ, इसके तुरंत बाद पाकिस्तान सरकार ने फ़ैसला किया कि स्कूलों और कॉलेजों को कुछ दिनों के लिए बंद कर दिए जाए, क्योंकि ये चरमपंथी ऐसे संस्थानों को भी अपने हमले का निशाना बना सकते हैं. जब सरकार को लगेगा कि शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी तो स्कूल और कॉलेज दोबारा खोले जा सकेंगे.

लेकिन इससे परेशान होनी की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि पाकिस्तान के प्रत्येक नागरिक और हर व्यक्ति ने इन हमलों की निंदा की है.

सवाल- आपको क्या लगता है कि ये छोटी लड़ाई होगी या लंबी चलेगी, क्योंकि काफ़ी अर्से से चरमपंथियों की ताक़त बढ़ती रही है.

शाहिद मलिक- देखिए न साल लगेंगे और न ही कई महीने, लेकिन चंद हफ़्ते ज़रूर लगेंगे. अभी तक ये अंदाज़ा है कि चार से आठ हफ़्ते लग सकते हैं. इस कार्रवाई में जो सेना के और अन्य लोग शामिल हैं उनकी ख़्वाहिश है कि जल्द से जल्द इसे पूरा कर लिया जाए. कुछ ज़्यादा समय की जो बात मैंने कही है ऐसा इसलिए है ताकि चरमपंथ को जड़ से उखाड़ फेंका जाए, नहीं तो सीधी कार्रवाई बहुत ही आसान है.

सवाल- लेकिन जब एक बार कार्रवाई की जाती है तो बाद में ये चरमपंथी वापस भी आ जाते हैं.

शाहिद मलिक- नहीं, इस बार उनके लिए ऐसा करना मुमकिन नहीं होगा. इसलिए कार्रवाई ऐसी होगी कि उन्हें जड़ से उखाड़ फेंका जाए. साथ ही सेना की हर मुमकिन कोशिश होगी कि जो निर्दोष नागरिक हैं उनको किसी प्रकार का नुक़सान न पहुँचे और जहाँ कोर्रवाई की जा रही है वहाँ के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जाए.

एक अंदाज़े के अनुसार 45 हज़ार परिवारों को विस्थापित होना पड़ रहा है, इसलिए भी कार्रवाई में समय लगा रहा है, लेकिन सरकार चाहती है कि जो कार्रवाई हो वो ठोस और अंतिम हो ताकि दोबारा कार्रवाई की ज़रूरत ही नहीं पड़े.

सवाल- पाकिस्तान के अख़बार और टेलीविज़न के ज़रिए ये ख़बरें आ रही हैं कि जो जंगजू हैं उन्होंने पाकिस्तान के प्रांत पंजाब में भी प्रवेश कर लिया है, क्या यह बात सही है?

शाहिद मलिक- पिछले दिनों जो घटनाएं हुई हैं वो चरमपंथियों की हताशा का नतीजा हैं. उनकी कोशिश होगी की हर तरह से बाधा डाली जाए. लेकिन यह कहना कि चरमपंथी वज़ीरिस्तान में अपनी कार्रवाई बंद करके पंजाब में आ गए हैं, ये भी ग़लत है. पंजाब में घटनाएं ज़रूर हुई हैं.

Image caption 26, नवंबर 2008 में मुंबई पर हुए चरमपंथी हमले में अनेक लोग मारे गए थे

सवाल- पाकिस्तान में जो घटनाएं हो रही हैं क्या उसके तार अफ़ग़ानिस्तान में जो कुछ हो रहा है उससे भी जुड़े हैं.

शाहिद मलिक- अभी जो घटानाएं हो रही हैं उनके बारे में तो कुछ नहीं कह सकता, लेकिन ऐतिहासिक रूप से चीज़े समझने की हैं. आज से 20-25 साल पहले जो अफ़ग़ानिस्तानी शरणार्थी पाकिस्तान आए, वो किसी कैंप में नहीं रहते थे, उसका नतीजा ये हुआ कि कई आबादी वाले इलाकों में भी बस गए. लेकिन बाद में पाकिस्तान सरकार ने कहा कि आपको पंजीकृत होना होगा, लेकिन उसमें कई ऐसे थे जिन्होंने पंजीकरण नहीं कराया. अब सरकार चाहती है कि बाक़ी बचे शरणार्थी पंजीकरण कराएं और उसके अलावा जो हैं, उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी.

सवाल- 'अफ़पैक' यानी अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान की जब बात होती है तो दोनों देशों को एक जैसे ही देखा जाता है, तो आप क्या समझते हैं कि अफ़गानिस्तान में जो गतिविधियाँ चल रही हैं और पाकिस्तान में जो हमले हुए हैं उनका आपस में कोई संबंध है?

शाहिद मलिक- दोनों देशों को एक तरह से नहीं देखा जा रहा है और न ही हम उन्हें पंसद करते हैं जो दोनों देशों को एक ही तरह देखने की कोशिश करते हैं. दोनों अलग देश हैं. अफ़ग़ानिस्तान की जो समस्याएं हैं उससे पाकिस्तान की कोई समानता नहीं है. आपने जो 'एफ़पैक' की बात की उसे मैं ख़ारिज करता हूँ.

जो अफ़ग़ानिस्तान की समस्याएं हैं उनका असर पाकिस्तान पर ज़रूर पड़ता है, क्योंकि जो तहरीक-ए-तालेबान है उसकी कड़ियाँ अफ़ग़ानिस्तान से मिलती हैं, जिसको लेकर हमारी चिंता है.

सवाल- कुछ अर्से तक यह भी कहा जाता था कि पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई में ऐसे कुछ लोग हैं जो जंगजुओं की मदद करते हैं. ऐसे ही जब पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ पर हमला हुआ तो निचले दर्जे के कुछ फ़ौजियों को हिरासत में लिया गया. क्या ऐसी भी आशंकाएं हैं कि पाकिस्तान की सेना, ख़ुफ़िया एजेंसियों और निचली सतह में कुछ लोग हैं जो चरमपंथी समूहों की मदद कर रहे हैं.

शाहिद मलिक- देखिए यह बहुत पुरानी और घिसी पिटी बात है. आप एक अनुभवी पत्रकार हैं. बहरहाल, जब आपने सवाल उठाया है तो मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि हमारी एजेंसी में ऐसा कोई भी तत्व नहीं जिसकी ओर आपने इशारा किया है.

सवाल- पिछले दिन भारत और पाकिस्तान के बीच काफ़ी बातचीत हुई है, भारत के प्रधानमंत्री, पाकिस्तान के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से मिले हैं, तो क्या आप उम्मीद करते हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत की जो कड़ी है वो दोबारा शुरू हो सकेगी?

शाहिद मलिक- पिछले एक-दो साल के दौरान होने वाले सारे शिखर सम्मेलनों का मैं हिस्सा रहा हूँ. चाहे न्यूयार्क, मिस्र के शर्म अल शेख और हाल ही में भारत और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों के बीच न्यूयार्क में बातचीत हुई हो.

पाकिस्तान की कोशिश और चाहत रही है कि भारत से पाकिस्तान के दोस्ताना संबंध हों, जो एक पड़ोसी देश के संबंध होने चाहिए, वे हों. यहाँ यह बताते हुए ख़ुशी होती है कि भारत के नेताओं की ओर से भी यही ख़्वाहिश होती है.

सवाल- लेकिन ऐसी क्या वजह है कि ये संबंध आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं?

शाहिद मलिक- मेरे ख़्याल में आपको यह सवाल हमसे पूछने की जगह अपने देश के नेताओं से पूछना चाहिए. हमने हर मुमकिन कोशिश की है कि बातचीत का सिलसिला शुरू हो.

अमित बरुआ साहब ताली दोनों हाथों से बजती है. हमें जो करना था वो कर दिया और हम चाहते हैं कि भारत की ओर से भी ऐसा कोई क़दम उठाया जाए जिससे यह ज़ाहिर हो कि व्यवहारिक रुप से भारत संबंधों को आगे बढ़ाने का ख़्वाहिशमंद है.

मिस्र के शर्म-अल-शेख का जो साझा बयान है, उसमें दोनों देश के प्रधानमंत्री थे, जिसमें दोनों देशों ने ये फ़ैसला किया कि संबंध बेहतर करने के लिए बातचीत ही एक रास्ता है.

सवाल- क्या आपको लगता है कि भारत का ये कहना है कि पिछले साल मुंबई की घटना और उस मामले में पाकिस्तान में जो लोग हिरासत में हैं, उस पर तेज़ी से कार्रवाई की माँग बातचीत में रुकावट है? या आपकी समझ में मामला कुछ और है कि भारत आपके देश पर किसी तरह का कोई राजनयिक दबाव बनाना चाहता है?

शाहिद मलिक- पाकिस्तान किसी दबाव में आने वाला नहीं है. जहाँ तक मुंबई की बात है, तो जब हमला हुआ उसके बाद से द्विपक्षीय बातचीत का सिलसिला रुका हुआ है. लेकिन शर्म- अल-शेख के साझा बयान को पढ़ें, जिसमें साफ़-साफ़ ये बात कही गई थी और दोनों चीज़ों को अलग-अलग किया गया था. अर्थात, मुंबई के हमलावरों के बारें में कार्रवाई और बातचीत को अलग-अलग किया गया था कहा गया था. दोनों का आपस में कोई संबंध नहीं है और होना भी यही चाहिए.

जब तक दोनों देश आपस में बैठ कर बात नहीं करेंगे तो मुद्दों के बारे में पता नहीं चलेगा.

मैं आपको बताता चलूं कि मुंबई हमले के सिलसिले में पाकिस्तान में तफ़्तीश हो रही है और इसमें कोई रुकावट नहीं है. हम जिस हद तक कर सकते हैं, कर रहे हैं. इस सिलसिले में हमें कुछ और शक हैं और हमने भारत से जानकारी माँगी है. जिससे पाकिस्तान सरकार के हाथ मज़बूत होंगे और अगर हमें वो जानकारी मिलेगी तो हम और प्रभावी ढ़ंग से कार्रवाई करेंगे.

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