'ख़ुद उपचार करे भाजपा'

मोहन भागवत, संघ प्रमुख
Image caption संघ प्रमुख का कहना है कि भाजपा को उनकी सलाह जारी रहेगी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने भारतीय जनता पार्टी में जारी 'संकट' पर कहा है कि पार्टी में जो कठिनाइयाँ हैं उनका समाधान वो ख़ुद करे.

मंगलवार को भागवत ने जयपुर में कहा, "भाजपा को संघ ने सलाह दी है और अगर भविष्य में भी माँगी गई तो ये सिलसिला जारी रहेगा, लेकिन भाजपा को अपना उपचार ख़ुद करना होगा."

संघ प्रमुख ने भाजपा को लताड़ते हुए कहा, "पार्टी को शल्य चिकित्सा अपनानी है, दवा लेनी है या कीमोथेरेपी करनी है, जो भी हो, उसे ये ख़ुद तय करना होगा."

हालाँकि उन्होंने स्पष्ट किया है अगर भाजपा भविष्य में उनसे सलाह माँगेंगी तो सलाह देने का क्रम जारी रहेगा.

ग़ौरतलब है कि लोकसभा के चुनावों के बाद भाजपा संकट से गुज़र रही है. कठिन समय में पार्टी को नेतृत्व से लेकर विचारधारा तक कभी बदलाव तो कभी मज़बूती का सुझाव दिया जाता है.

पिछले दो आम चुनावों से पार्टी को नुकसान हो रहा है और उसे संसद में विपक्षी की भूमिका निभानी पड़ रही है. चुनाव में खराब प्रदर्शन को लेकर नेतृत्व और कार्यशैली पर आरोप-प्रत्यारोप भी देखने को मिला है.

भागवत के सबक

उधर शिव सेना के 'नया माराठा मानुष' की नीति से असहमति जताते हुए भागवत ने कहा है कि वो व्यापक समाज बनाना चाहते हैं और उत्तर भारतीयों के प्रति शिवसेना की राय से वे सहमत नहीं हैं.

उन्होंने देश में आरक्षण की नीति पर पुनर्समीक्षा की बात की और कहा है कि एक समिति बने जो आरक्षण के नए स्वरूप को तय करे.

उनका आग्रह है कि आर्थिक रुप से पिछड़े लोगों को भी आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए, लेकिन सेना जैसे क्षेत्रों में आरक्षण की व्यवस्था नहीं होनी चाहिए.

भागवत के इन बयानों को लेकर भारतीय जनता पार्टी की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की गई है. राज्य में पार्टी के अधिकारी और कार्यकर्ता समझ नहीं पा रहे हैं कि भागवत की टिप्पणी पर उनका रुख क्या रहे.

'वसुंधरा का शक्ति प्रदर्शन'

Image caption नेता प्रतिपक्ष से हटाए जाने पर वसुंधरा पार्टी नेतृत्व से नाराज़ चल रही है

उधर भारतीय जनता पार्टी की नेता और राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने कहा है कि उन्हें अपने समर्थकों पर भरोसा है और कोई भी उन्हें जनता से दूर नहीं कर सकता.

केंद्रीय नेतृत्व के दबाव में राजस्थान विधानसभा की नेता प्रतिपक्ष पद से इस्तीफ़ा देने के बाद राजे मंगलवार को दिल्ली से जयपुर पहुँची हैं.

वसुंधरा के राज्य में पहुँचने पर जयपुर हवाईअड्डे पर उनके समर्थकों का एक बड़ा हजूम और तक़रीबन 20 विधायकों का काफ़ला भी पहुँचा था, हालाँकि वहाँ पार्टी का कोई राज्य पदाधिकारी नहीं था.

लोगों को संबोधित करते हुए राजे का कहना था, "राजस्थान की जनता का अथाह प्यार हमें हासिल है, हम जनता के दम पर ही डटे हुए हैं, हमें जनता से कोई अलग नहीं कर सकता है"

हालाँकि उन्होंने अपने संबोधन के दौरान पार्टी के किसी नेता का नाम नहीं लिया. न ही जनता से जुदा करने की कोशिश का आरोप भाजपा या किसी नेता पर लगाया.

पर्यवेक्षक इस रैली को उनके राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के रुप में देख रहे हैं.

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