कर्नाटक की भाजपा सरकार संकट में

बीएस येदुरप्पा
Image caption बीएस येदुरप्पा के ख़िलाफ़ बग़ावत की कमान ताकतवर रेड्डी भाइयों के हाथ में हैं.

दक्षिण भारत में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की एक मात्र राज्य सरकार गहरे संकट में घिरती नज़र आ रही है.

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदुरप्पा के ख़िलाफ़ आठ मंत्रियों के एक गुट ने बग़ावत कर दी है. सूत्रों का कहना है कि इस गुट को कम से कम 18 अन्य विधायकों का भी समर्थन हासिल है.

इस गुट का नेतृत्व शक्तिशाली रेड्डी भाई कर रहे हैं. वे राज्य सरकार में मंत्री भी हैं. उनकी बेल्लारी ज़िले में लोहे की खदानें हैं.

रेड्डी बंधुओं की ताक़त

राजस्व मंत्री जी करुणाकर रेड्डी और पर्यटन मंत्री जी जनार्दन रेड्डी की ताक़त और प्रभाव का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि उनके आर्थिक समर्थन से ही भाजपा के क़रीब 20 विधायक चुनाव जीते थे.

येदुरप्पा को मुख्यमंत्री बनाने में भी उनकी अहम भूमिका थी.

जब भाजपा को विधानसभा में अपना बहुमत बढ़ाने की ज़रूरत पड़ी तो येदुरप्पा ने विपक्षी दलों के विधायकों को आकर्षित करने के लिए ‘ऑपरेशन कमल’ शुरू किया था. इसमें भी रेड्डी भाइयों ने मदद की थी.

लेकिन पिछले कुछ समय से मुख्यमंत्री और रेड्डी भाइयों में इस बात पर दूरी पैदा हो गई है कि येदुरप्पा उनसे सलाह-मशविरा किए बिना ही बड़े फ़ैसले कर रहे हैं.

दिलचस्प बात यह है कि ताज़ा खींच तान पिछले दिनों आई बाढ़ से प्रभावित इलाक़ों में पुनर्निर्माण को लेकर शुरू हुई है.

वैसे तो राजस्व मंत्री के रूप में यह ज़िम्मेदारी करुणाकर रेड्डी की बनती है लेकिन मुख्यमंत्री इसका नियंत्रण अपने हाथ में रखना चाहते हैं.

हालत उस समय ख़राब होने लगे जब रेड्डी भाइयों ने बेल्लारी में दूसरी खदानों से मिली 'बाढ़ सहायता राशि' का उपयोग करते हुए निजी रूप से बीस हज़ार घर बनाने का फ़ैसला किया जबकि मुख्यमंत्री चाहते थे कि यह पैसा सरकारी फ़ंड में जमा किया जाए और घर बनवाने का काम सरकार की ओर से किया जाए.

खदान मालिकों पर नया टैक्स

अभी यह बहस चल ही रही थी कि मुख्यमंत्री ने खदान मालिकों पर एक नया टैक्स लगा दिया. सरकार ने आदेश दिया कि कच्चा लोहा ले जाने वाले हर ट्रक पर एक हज़ार रूपए का टैक्स लगाया जाएगा.

मुख्यमंत्री के इस क़दम से भड़ककर रेड्डी भाइयों ने येदुरप्पा को हटाने का अभियान शुरू कर दिया. हालांकि वे येदुरप्पा के ख़िलाफ़ खुलकर कुछ नहीं बोल रहे हैं लेकिन इसके संकेत स्पष्ट हैं.

रेड्डी भाइयों ने बेल्लारी के बाढ़ पीड़ित इलाक़ों में मकानों के निर्माण का काम बुधवार से ही शुरू करने का फ़ैसला किया है. इस कार्यक्रम में उन्होंने येदुरप्पा को आमंत्रित नहीं किया.

इससे राज्य मंत्रिमंडल में फूट साफ़ दिखाई दे रही है. मंगलवार को मुख्यमंत्री की ओर से बुलाई गई बैठक में केवल 23 मंत्रियों ने भाग लिया था.

इस बैठक में राज्य के राजनीतिक हालात की चर्चा हुई. दूसरी ओर रेड्डी भाइयों की बैठक में कुल आठ मंत्री शामिल हुए.

येदुरप्पा के मुक़ाबले में राज्य विधानसभा के अध्यक्ष जगदीश शेट्टर नए संभावित नेता के रूप में उभर रहे हैं. आठ विधयाकों के एक गुट ने मंगलवार को उनसे मिलकर उनसे नेतृत्व करने का अनुरोध किया.

दूसरी ओर येदुरप्पा का कहना है कि सरकार की ओर से बाढ़ पीड़ित इलाक़ों में घर बनवाने का सरकारी कार्यक्रम बेल्लारी में दो नवंबर से शुरू होगा. इस काम का उद्घाटन गृहमंत्री पी चिदंबरम करेंगे.

मुख्यमंत्री ने इस कार्यक्रम के लिए पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा को भी आमंत्रित किया है.

हालाँकि येदुरप्पा बार-बार यह कह रहे हैं कि उनकी सरकार को कोई ख़तरा नहीं है लेकिन राज्य में भाजपा में जिस तरह उनके काम करने के अंदाज़ को लेकर असंतोष है, उससे लगता है कि रेड्डी भाइयों की बग़ावत उनका तख़्ता पलट भी सकती है.

भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व ख़ुद अपने ही संकट में इतनी बुरी तरह घिरा हुआ है कि वह भी येदुरप्पा के लिए कुछ ज़्यादा नहीं कर सकता.

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