कर्नाटक में येदुरप्पा की मुश्किलें बढ़ीं

मुख्यमंत्री येदुरप्पा

कर्नाटक में अब इस बात की संभावनाएं बढ़ती जा रही हैं कि भारतीय जनता पार्टी नाराज़ विधायकों के दबाव के आगे झुकते हुए बीएस येदुरप्पा को मुख्यमंत्री पद से हटा देगी.

लगभग 40 विधायकों की बगावत के बाद अब पार्टी नेतृत्व के सामने नए मुख्यमंत्री के चयन के अलावा कोई विकल्प दिखाई नहीं दे रहा है.

बंगलौर में पार्टी से जुड़े मामलों के जानकारों का कहना है कि दिल्ली में शनिवार को केंद्रीय नेताओं और नाराज़ गुट के नेताओं के बीच होने वाली बातचीत इसी एक मुद्दे पर केंद्रित रहेगी.

कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष येदुरप्पा के मुक़ाबले सबसे शक्तिशाली विकल्प के रूप में उभरकर सामने आए हैं.

पार्टी की राज्य इकाई में गत कुछ दिनों से चले आ रहे संकट को समाप्त करने में पार्टी महासचिव अरुण जेटली की कोशिश विफल रही हैं और उन्हें खाली हाथ ही दिल्ली वापस लौटना पड़ा है.

मुख्यमंत्री बीएस येदुरप्पा के विरुद्ध बगावत करने वाले राजस्वमंत्री जी करुणाकर रेड्डी और अन्य नेताओं से बातचीत का कोई परिणाम न निकलने पर जेटली इन नेताओं को दिल्ली आने का निमंत्रण देकर लौट गए हैं.

दिल्ली पहुँचा विवाद

दिल्ली में शनिवार को भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह, विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी कर्नाटक के नाराज़ गुट के नेताओं से बातचीत करके इस संकट को दूर करने की आखिरी कोशिश करेंगे.

इस बातचीत के लिए करुनाकर रेड्डी, उनके भाई और पर्यटन मंत्री जी जनार्धन रेड्डी, एक और सहयोगी चिकित्सा मंत्री श्रीरामुलु, राज्य विधानसभा अध्यक्ष जगदीश और राज्य भाजपा अध्यक्ष दीवी सदनंदा गौड़ा को दिल्ली बुलाया गया है. अभी यह स्पष्ट नहीं है कि येदुरप्पा भी दिल्ली जाएंगे या नहीं.

इस समय कर्नाटक में राजनीतिक संकट कितना गहरा है और मुख्यमंत्री के लिए चुनौती कितनी गंभीर है, इसका अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि भाजपा के 117 में से 40 विधायकों ने बगावत कर दी है और इनमें से 26 रेड्डी बंधुओं के साथ हैं.

रेड्डी बंधुओं ने अपने समर्थक विधायकों को मुख्यमंत्री खेमे के लोभ-लालसा से बचने के लिए हैदराबाद और गोवा भिजवा दिया है जहाँ उन्हें मीडिया और दूसरों की पहुंच से दूर पांच सितारा होटलों और रिसॉर्ट में रखा गया है.

जनार्धन रेड्डी ने दावा किया है कि उन्हें 70 विधायकों का समर्थन प्राप्त है.

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