मनमोहन ने फिर दिया शांति पर ज़ोर

मनमोहन सिंह
Image caption मनमोहन सिंह ने दो दिन पहले पाकिस्तान की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाया था

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लगातार तीसरे दिन दक्षिण एशिया में शांति कायम करने पर ज़ोर देते हुए कहा है कि ‘भारत, पाकिस्तान और दक्षिण एशिया के अन्य देशों के भाग्य एक दूसरे से जुड़े हुए हैं.’ उन्होंने कहा कि भारत और चीन के साथ-साथ प्रगति करने के पर्याप्त अवसर हैं.

दिल्ली में हिंदुस्तान टाइम्स की लीडरशिप सम्मिट को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ये विचार व्यक्त किए और साथ ही कुछ सवालों के जवाब भी दिए.

अपने संबोधन में मनमोहन सिंह ने कहा, "पाकिस्तान कई अंदरूनी समस्याओं से जूझ रहा है. आतंकवाद का सर उठाना इनमें से एक समस्या है. मैं उनकी सफलता की कामना करता हूँ...दोनों देशों (भारत और पाकिस्तान) और दक्षिण एशिया के अन्य देशों के भाग्य आपस में जुड़े हुए हैं. ये इस क्षेत्र के नेतृत्व का काम है कि वे संयुक्त तौर पर ग़रीबी हटाने का काम करें."

पाकिस्तान के बारे में उनका ये भी कहना था, "भारत ऐसा पड़ोस चाहता है जिसमें शांति और प्रगति हो. हमारी शुभकामनाएँ हमारे पड़ोसी देशों के साथ हैं. हम चाहते है कि वे विकास करें, ग़रीबी हटाएँ और इतिहास बोझ से मुक्ति पाएँ. "

चीन के संदर्भ में उनका कहना था कि भारत और चीन के साथ-साथ प्रगति करने के पर्याप्त अवसर हैं. उनका कहना था, "सीमा के मुद्दों पर हमारे मतभेद हैं लेकिन शांति हर हालत में कायम रहनी चाहिए."

'विकास केंद्र से नहीं'

राज्यों में उचित नेतृत्व पर बल देते हुए उन्होंने कहा, "हम दिल्ली में बैठकर राष्ट्रीय नेतृत्व की गुणवत्ता पर बहस कर सकते हैं लेकिन भारत में असल बदलाव तब आएगा जब राज्यों में और स्थानीय स्तर पर सही नेतृत्व मिलेगा."

उनका कहना था, "इसमें दो राय नहीं कि राष्ट्रीय सुरक्षा प्रदान करने के अलावा केंद्र सरकार की विकास में महत्वपूर्ण भूमिका है. लेकिन मार्केट या मुक्त बाज़ार की अर्थव्यवस्था के विकास के साथ जब व्यक्तिगत प्रतिभा को मौका मिल रहा है तब नया भारत बनाने को कोई भी एजेंडा दिल्ली यानी केंद से थोपा नहीं जा सकता."

उनका कहना था कि भारत एक लोकतंत्र है और लोकतांत्रिक गठबंधन में मतभेद हो सकते हैं. लेकिन उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "किसी को शक़ नहीं होना चाहिए कि क़ानून व्यवस्था कायम रखना हमारी प्राथमिकता है और हमें राज्य सरकारों का सहयोग चाहिए, फिर वे चाहे किसी भी राजनीतिक दल के क्यों न हों."

संबंधित समाचार