आग के ख़ुद ब ख़ुद बुझने का इंतज़ार

राजस्थान के जयपुर में गुरुवार रात को तेल डेपो में लगी आग पर काबू नहीं पाया जा सका है. तेल कंपनी के अधिकारी और दमकल दस्ते अब आग के ख़ुद ब ख़ुद बुझने का इंतज़ार कर रहे है.

हालत को देखते हुए आस-पास की आबादी को हटा दिया गया है और कई रेलगाड़ियो के मार्ग में बदलाव किया गया है क्योंकि जयपुर और कोटा को जोड़ने वाली रेल पटरी उस इलाके से होकर गुज़रती है जहाँ तेल डिपो है.

सीतापुर में शिक्षा केन्द्रों को बंद रखा जा रहा है और कोई दो हज़ार लोगों ने सरकारी आश्रय स्थलों में शरण ली है.सरकार के मुताबिक इस आग ने अब तक सात लोगों की जान ली है और छह लोग लापता हैं.

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा ने मोके का दौरा किया और हादसे की जाँच का आदेश दिया है.

सरकार ने महेश लाल की अगुवाई में एक जाँच समिति गठित की है ,जो अगले 12 दिनों में जांच कर सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी.

मुरली देवड़ा ने कहा, “ये समिति भविष्य में ऐसे हादसे न हो इस बारे में सुझाव देगी.”

भारी नुकसान

हम अपने भाई की शादी की तैयारी कर रहे थे,अब उसका शव लेकर लौट रहे हैं.

मृतक का भाई

राज्य के गृह मंत्री शांति धारीवाल ने बताया की ज्वलनशील पदार्थों के भंडारण को शहरों से दूर स्थापित किया जाएगा. जयपुर के ज़िला मजिस्ट्रेट कुलदीप रांका ने बीबीसी को बताया कि ३६ घायल विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं.

कोई दो हज़ार लोगो ने सरकारी आश्रय स्थलों में शरण ली है. बड़ी संख्या में लोग अपने रिश्तेदारों के यहाँ पहुंचे हैं.

तेल कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी सार्थिक ने बताया की देश के विभिन्न भागों से दमकल विशेषज्ञों को बुला लिया गया है लेकिन आग इतनी विकराल है की कोई उसके पास नहीं जा सकता.

लिहाज़ा आग के ख़ुद कमज़ोर पड़ने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है. तेल अधिकारी ने बताया की कम से कम उनके छह कर्मचारी आग लगने के बाद से लापता हैं.

उनमें से एक हरीश कुमार घटना के बाद से लापता है.उनके परिजनों ने बताया कि हरीश कुमार आग लगने वाले दिन नौकरी पर गए थे, तब से उनका कोई पता नहीं है.

हरीश कुमार के बेटी नेहा कहती है, “हम जगह जगह उन्हें तलाश रहे हैं.परिवार का रो-रो कर बुरा हाल है. हर अस्पताल की खाक छान मारी मगर हर जगह से निराश लौटना पड़ा.”

नहीं सज पाई बारात...

करोली के विजय कुमार उस तेल डिपो के पास एक फैक्ट्री में काम करते थे और इस माह उनकी बारात सजनी थी. लेकिन आग ने उसे लील लिया.विजय का शव लेकर गाँव लौट रहे उनके भाई बने सिंह कहने लगे, “हम उसकी शादी की तैयारी कर रहे थे,अब शव लेकर लौट रहे हैं.”

जिस तेल डिपो में आग लगी है वो सीतापुर में है और ये एक औद्योगिक केंद्र भी है. एक बड़े निर्यातक राजीव अरोरा कहते है, “वहां कोई एक हज़ार फैक्ट्रियाँ हैं और डेढ़ लाख लोग काम करते हैं.इन फैक्ट्रियों को भरी नुकसान पहुंचा है.”

आग की लपटें कभी प्रबल तो कभी थोडी़ निर्बल पड़ती दिखाई देती है.मगर आग बुझ नहीं रही है. वहां शक्तिमान सेना है, दमकल दस्ते हैं, वैज्ञानिक उपकरण हैं, लेकिन उस निर्मम आग के आगे किसी का बस नहीं चल रहा है.

लिहाज़ा आग को उसकी नियति पर छोड़ दिया गया है कि वो इतना जले, इतना जले की जवाला खुद शांत हो जाए.

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