सुप्रीम कोर्ट के जजों ने संपत्ति घोषित की

Image caption सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों पर संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक करने का दबाव था

भारत के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और 20 अन्य जजों ने सोमवार को अपनी संपत्ति की घोषणा कर दी.

माना जा रहा है कि पारदर्शिता के बढ़ते दबाव के कारण उन्होंने ये फ़ैसला किया.

स्वेच्छा से की गई इस घोषणा में न्यायाधीशों ने अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा दिया है.

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर दिए गए ब्यौरे में सभी न्यायाधीशों ने अपने बैंक खातों का जिक्र किया है.

मुख्य न्यायाधीश के जी बालाकृष्णन ने स्पष्ट किया है कि न तो उनका और न ही उनकी पत्नी निर्मला बालाकृष्णन का कोई फ़िक्स डिपाजिट है.

न्यायाधीश बी एन अग्रवाल ने सेवानिवृत्ति के बाद भी विशेष अनुरोध पर अपनी संपत्ति का ब्यौरा शामिल कराया है.

'स्वेच्छा से घोषणा'

वेबसाइट का कहना है कि 'चल अचल संपत्ति का ब्यौरा स्वेच्छा' से किया गया है.

इस घोषणा के अनुसार अधिकतर जजों के पास छोटी कारें हैं और नौ जजों के पास कार ही नहीं है.

उल्लेखनीय है कि सूचना का अधिकार कानून पारित होने के बाद केंद्रीय सूचना आयोग ने जजों की संपत्ति का विवरण देने को कहा था.

पहले सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बालाकृष्णन ने ऐसा करने से मना कर दिया था.

लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने फ़ैसला दिया था कि विवरण सार्वजनिक करना होगा क्योंकि मुख्य न्यायाधीश का दफ़्तर सूचना क़ानून के दायरे में आता है.

कर्नाटक हाईकोर्ट के एक जज शैलेंद्र कुमार ने भी खुले आम संपत्ति की सार्वजनिक घोषणा का समर्थन किया था और मुख्य न्यायाधीश से असहमति प्रकट की थी.

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के जज, के कानन ने अपनी संपत्ति इंटरनेट पर घोषित भी कर दी थी.

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, बॉम्बे और मद्रास हाईकोर्ट के जजों ने भी संपत्ति घोषित करने का फ़ैसला किया था.

संबंधित समाचार