'उल्फ़ा के दो बड़े नेता ग़िरफ्तार'

भारत के असम राज्य में सक्रिय अलगाववादी संगठन उल्फ़ा के एक बड़े नेता राजू बरुआ ने पत्रकारों को भेजे एक ईमेल में दावा किया है कि बांग्लादेश की राजधानी ढाका से उनके संगठन के दो वरिष्ठ नेताओं को हिरासत में लिया गया है.

उधर बांग्लादेश के गृह सचिव अब्दुस शुबान शिक्दर ने बीबीसी के साथ बातचीत में कहा है कि 'उन्हें इस घटना के संबंध में किसी तरह की कोई जानकारी नहीं है.'

उल्फ़ा ने बयान मे कहा है कि 'दो नवबंर की मध्यरात्रि को सादा कपड़ों मे हथियारबंद लोग, जो शायद बांग्लादेश पुलिस की विशेष शाखा से थे, उस घर में दाख़िल हुए जहां ये उल्फ़ा नेता रह रहे थे.'

इन नेताओं के नाम हैं - चित्रबन हज़ारिका जिन्हें उल्फ़ा वित्त सचिव और साशा चौधरी, जिन्हें उल्फ़ा विदेश सचिव बताता है.

राजू बरुआ ने अपने बयान में दावा किया है कि इन नेताओं को पूछताछ के लिए ले जाया गया और वे अभी तक वापस नहीं आए हैं. उन्होंने ईमेल में 'आशंका जताई है कि या तो इन नेताओं को भारत के हवाले कर दिया जाएगा या फिर फ़र्जी मुठभेड़ मे इन्हें मारा जा सकता है.'

शेख़ हसीना से अपील

उन्होंने बाग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना से इन नेताओं की जान बचाने की अपील की है. राजू बरुआ ने बयान में कहा है - "हम बाग्लादेश में क़ानून का पालन करने वाले नागरिकों की तरह रह रहे हैं. एसा कोई कारण नही है की उस देश मे हमें नुक़सान पहुंचाया जाए."

जनवरी महीने से जब से आवामी लीग बांग्लादेश मे सत्ता मे आई है, तब से उल्फ़ा पर ये दबाव है कि या तो वो बाग्लादेश छोड़ दे या फिर क़ानूनी कार्रवाई का सामना करने को तैयार रहे.

इस दौरान कई उल्फ़ा विद्रोही पकड़े गए और उन्हें या तो ये कह कर कि वो ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से बाग्लादेश मे घुसे हैं, भारत के हवाले कर दिया गया या फिर उन्हें हिरासत मे रख कर उनसे उल्फ़ा के ठिकानों के बारे मे पूछताछ की गई.

वर्ष 2004 मे उल्फ़ा के सेना प्रमुख परेश बरुआ के ख़िलाफ़ अभियोग चलाया गया था कि उन्होंने चिट्गांव बंदरगाह के रास्ते भारी मात्रा मे हथियार आयात किए.

उल्फ़ा के महासचिव अनुप चेटा हाल ही में अपनी सज़ा काट कर जेल से बाहर आए हैं. उन्हें 1977 मे ग़िरफ्तार किया गया था जब बांग्लादेश मे आवामी लीग की सरकार थी.

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