पाटिल फिर से गृहमंत्री बने

कांग्रेस और एनसीपी
Image caption कांग्रेस और एनसीपी गठबंधन को विधान सभा के चुनावों में बहुमत मिला है

पिछले साल मुंबई हमलों के बाद गृहमंत्री का पद गंवाने वाले आरआर पाटिल को एक बार फिर महाराष्ट्र की नवगठित सरकार में गृहमंत्री की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है.

मुंबई हमले को रोक पाने में असफल रहने की ज़िम्मेदारी क़बूल करते हुए उस समय पाटिल को गृहमंत्री का पद छोड़ना पड़ा था. हालाँकि उस समय पाटिल ने एक विवादास्पद बयान भी दिया जिसके बाद उनपर पद छोड़ने का दबाव काफ़ी बढ़ गया था.

पिछले दिनों महाराष्ट्र विधान सभा के लिए हुए चुनावों में कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के गठबंधन को बहुमत मिला था. काफ़ी खींचतान के बाद शनिवार को नई सरकार का गठन हुआ जिसमें एक बार फिर आरआर पाटिल को मंत्रिमंडल में शामिल कर गृहमंत्री की ज़िम्मेदारी सौंपी गई.

पाटिल के दोबारा गृहमंत्री बनाए जाने से विवाद खड़ा हो गया है. विपक्षी पार्टियों का कहना है कि उनके गृहमंत्री बनाए जाने से ज़ाहिर हो गया है कि राज्य सरकार सुरक्षा को लेकर किस हद तक चिंतित है.

दोबारा न घटे

हालांकि गृहमंत्री बनाए जाने के बाद आरआर पाटिल का कहना है कि उनकी प्राथमिकता होगी कि दोबारा 26 नवंबर जैसी घटना नहीं घटे.

उनका कहना है, "सुरक्षा उपायों को बढ़ाना और संबंधित एजेंसियों के बीच तालमेल मेरी पहली प्राथमिकता है."

राज्य में शनिवार को शपथ लेने वाले अन्य मंत्रियों के विभागों का भी बंटवारा कर दिया गया है.

एनसीपी के सुनील ततकारे को वित्त मंत्री, कांग्रेस के नारायण राणे को राजस्व मंत्री बनाया गया है.

शरद पवार के भतीजे अजित पवार को उनका पूराना विभाग सौंपा गया है और वे उर्जा और जलसंसाधन मंत्रालय की ज़िम्मेदारी संभालते रहेंगे.

मुख्यमंत्री की दौर में रहे कांग्रेसी नेता पतंगाराओ कदम को वन मंत्री जबकि सुरेश सेट्टी को स्वास्थय मंत्री बनाया गया है.

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