खनन घोटाले की जाँच की मांग

खान
Image caption उड़ीसा में कई खानों का काम बंद कर दिया गया है.

उड़ीसा में लोहे के खानों का घोटाला अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है.

वरिष्ठ पत्रकार और 'उड़ीसा जन सम्मिलानी' के अध्यक्ष रवि दास ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की जिस पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश केजी बालकृष्णन की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय खंडपीठ ने सर्वोच्च न्यायालय की सेंट्रल एमपावर्ड कमिटी को छह सप्तान के अंदर पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट देने का आदेश दिया गया.

रवि दास ने अपनी याचिका में कहा है कि राज्य के खानों से हर साल लगभग सात हज़ार करोड़ रुपए का खनिज पदार्थ गैर क़ानूनी ढंग से बाहर भेजा जा रहा है.

इसके अलावा केंद्रीय खान मंत्री बिजय कुमार हांडीक ने केंद्रीय कार्मिक विभाग को पत्र लिखकर पूरे मामले की सीबीआई जांच कराए जाने की सिफ़ारिश की है. प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजे पत्र में मंत्री ने भारतीय खनन ब्यूरो की रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज़ भी भेजे हैं.

उड़ीसा हाई कोर्ट में भी मामले की सीबीआई जांच की मांग करते हुए एक जनहित याचिका दायर की गई है. सीबीआई जांच की मांग को राज्य सरकार पहले ही ठुकरा चुकी है. राज्य सरकार का कहना है कि राज्य निगरानी विभाग पूरी ईमानदारी के साथ मामले की जांच कर रही है और सीबीआई जांच की ज़रुरत नहीं है.

हालांकि जानकारों का मानना है कि निगरानी विभाग मामले की तह तक नहीं पहुंच सकती क्योंकि इसमें बड़ी हस्तियां भी शामिल है.

राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक अमीय भूषण त्रिपाठी ने बीबीसी से कहा, ‘‘ये उम्मीद रखना कि निगरानी विभाग सरकार के मंत्रियों और अधिकारियों के ख़िलाफ़ निष्पक्ष जांच करेगा तो ये सरासर बेवकूफ़ी है. अगर सरकरा सचमुच मामले की तह तक पहुंचना चाहती है तो मामला सीबीआई के सुपुर्द करना चाहिए.’’

नए मामले

इधर खान घोटाले पर राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही जांच में रोज़ नए मामले सामने आ रहे हैं. पिछले सोमवार को सरकार ने राज्य के 69 खानों में खुदाई का काम स्थगित करने का आदेश दिया और अगले ही दिन खनिज पदार्थ का व्यापार कर रही 482 कंपनियों के लाइसेंस निरस्त कर दिए गए.

गौरतलब है कि खान घोटाले को लेकर हंगामे के बाद राज्य सरकार ने पिछले महीने राज्य के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स का गठन किया है.

टास्क फोर्स ने पिछले महीने राज्य के सभी खानों और लगभग 600 व्यापारियों को अपने लाइसेंस पर्यावरण विभाग की अनुमति और दूसरे कागज़ात दिखाने के आदेश दिए हैं. निर्धारित अवधि में कंपनियों द्वारा दस्तावेज़ न दिखाने पर सरकार ने ये कार्रवाई की है.

राज्य सरकार का दावा है कि घोटाले की ईमानदारी से जांच की जा रही है और गैर क़ानूनी ढंग से खनिजों की खुदाई और निर्यात के ख़िलाफ़ सख्त क़दम उठाए जा रहे हैं.

लेकिन सरकार के दावे कितने खोखले हैं इसका अंदाज़ा इसी बात से लगता है कि मामले को लेकर पूरे राज्य में चल रहे हंगामे के बावजूद पिछले हफ्ते ही क्योंझर ज़िले के जोड़ा खानों से गैर क़ानूनी तरीके से खोदे गए लोहा पत्थर लेकर जा रहे 15 ट्रकों को झारखंड पुलिस ने जब्त कर लिया है.

ये 15 ट्रक पश्चिमी सिंहभूम के नोवामुंडी और जामदा में जब्त हुए. जहां झारखंड पुलिस इसकी पुष्टि कर रही है वहीं उड़ीसा की पुलिस और सरकार इसका खंडन कर रही है.

राज्य विधान सभा के पिछले बजट अधिवेशन में भाजपा ने यह मामला पहली बार उठाया तथा भाजपा के खुलासे के बाद राज्य सरकार ने मामले की निगरानी विभाग द्वारा जांच का आदेश दिया. विभाग द्वारा जांच के दौरान दो खान लीज़धारियों और खान विभाग के छह अधिकारियों को गिरफ़्तार किया गया और तत्कालीन खान निदेशक आरएन साहू को निलंबित कर दिया गया. हालांकि बाद में सभी अभियुक्तों को उड़ीसा हाई कोर्ट ने ज़मानत दे दे.

भाजपा नेता विजय कुमार महापात्र कहते हैं, ‘‘ सरकार केवल जांच का दिखावा कर रही है. अगर सरकार सचमुच मामले की तह तक पहुंचना चाहती है तो सीबीआई जांच से मना नहीं करती.’’

महापात्र कहते हैं कि उड़ीसा में एक नहीं दो मधु कोड़ा हैं और निगरानी विभाग जांच में इन दोनों तक नहीं पहुंच सकती.

भाजपा इस मामले को जानकर उछाल रही है. हाल ही में राज्य सभा सदस्य बलबीर पुंज और चंदन मित्रा के नेतृत्व में पार्टी का एक दल क्योंझर में खानों का दौरा करने गया था जिसके बाद उन्होंने कहा था कि देश का सबसे बड़ा खान घोटाला उड़ीसा में हो रहा है.

पार्टी ने कहा था कि संसद के अगले सत्र में इसे मुद्दा बनाया जाएगा. हालांकि ताज्जुब इस बात पर है कि राज्य में मुख्य विरोध दल कांग्रेस इस मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं.

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