कश्मीर मसले पर भारत का साथ दूंगाः मीरवाइज़

मीरवाइज़
Image caption मीरवाइज़ कहते हैं कि वो भारत के नहीं बल्कि उनकी नीतियों के ख़िलाफ़ हैं

भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर में ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ़्रेंस (उदारवादी धड़े) के प्रमुख और अलगाववादी नेता मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ का कहना है कि वो कश्मीर समस्या के हल के लिए भारत के साथ मिलकर काम करने को तैयार हैं.

मीरवाइज़ के अनुसार वो 'गुप्त' या 'खुली कूटनीति' दोनों माध्यमों से इस मसले पर बातचीत करने को तैयार हैं.

अलगाववादी नेता इन दिनों पहाड़ी ज़िले डोडा और किश्तवाड़ में जनसभाएं कर रहे हैं.

शुक्रवार को जम्मू से लगभग दो सौ किलोमीटर दूर किश्तवाड़ में कड़ी सुरक्षा के बीच एक जनसभा में उन्होंने कहा, "हम भारत के साथ मुद्दों पर आधारित बातचीत को राज़ी हैं, हम अपनी भूमिका अदा करने को भी तैयार हैं. भारत-कश्मीर, भारत-पाकिस्तान और कश्मीर-पाकिस्तान के बीच त्रिकोणीय बातचीत के ज़रिए मसले का हल ढूँढना चाहिए."

पिछले दिनों राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने कहा था कि कश्मीर मसले पर बातचीत "चुपचाप कूटनीति" के तहत होनी चाहिए. इसी हवाले से मीरवाइज़ ने कहा कि "हम इसके लिए तैयार हैं. चाहे वो चुपचाप डिप्लोमेसी हो या खुली."

उनका कहना है, "हुर्रियत कांफ्रेंस भारत के ख़िलाफ नहीं हैं, लेकिन उनकी नीतियों के ख़िलाफ़ है."

हु्र्रियत कांफ्रेंस की नीतियों के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा "हम सबको साथ लेकर चलना चाहते हैं. हमारा आंदोलन किसी धर्म, जाति या प्रांत में भेदभाव नहीं करता. हम चाहते हैं कि सब लोग जम्मू-कश्मीर के मसले के हल मैं शामिल हों."

माहौल की ज़रूरत

हुर्रियत प्रमुख ने कहा कि भारत को बातचीत के लिए माहौल बनाना चाहिए ताकि सद्भाव का रास्ता खुले.

उनका कहना था, " साज़गार माहौल बनाने के लिए भारत को राज्य से सेना और सशस्त्र बल विशेषाधिकार क़ानून को वापिस लेना चाहिए.

सशस्त्र बल विशेषाधिकार क़ानून के तहत सुरक्षा बालों को चरमपंथ के विरूद्व अभियान चलाने के लिए विशेष अधिकार हैं.

मीरवाइज़ का कहना है कि अगर भारत सरकार कहती है कि जम्मू-कश्मीर कि स्थिति में सुधार आया है तो यह क़दम उठाने में उसे कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए.

उनका मानना है कि राज्य में केवल सत्ता पर लोगों को बदलने से या प्रशासन में बदलाव से कोई समस्या का हल नहीं निकल सकता.

मीरवाइज़ हुर्रियत कांफ्रेंस के उस धड़े के अध्यक्ष हैं जो भारत से बातचीत का समर्थक माना जाता है. उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और गृहमंत्री पी चिदंबरम के बातचीत के प्रस्ताव का भी स्वागत किया था.

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