कंधमाल दंगों में नौ को सज़ा

दंगों के ख़िलाफ़ अपील
Image caption हज़ारों लोग अभी भी राहत शिविरों में रह रहे हैं.

उड़ीसा के कंधमाल में ईसाइयों के ख़िलाफ़ पिछले साल हुए हमलों में नौ लोगों को सज़ा सुनाई गई है.

ये सज़ा दंगों के दौरान दर्ज किए गए कई मुक़दमों में से एक में सुनाई गई है.

स्थानीय अदालत ने दंगों के दौरान ईसाइयों की बस्ती में आग लगाने के मामले में नौ लोगों को दोषी पाया और उन्हें सश्रम कारावास की सज़ा सुनाई.

जज चित्तरंजन दास ने हर दोषी को साढ़े तीन हज़ार रूपए का जुर्माना भरने का भी आदेश दिया. जुर्माने नहीं देने पर उनकी सज़ा साढ़े तीन महीने और बढ़ा दी जाएगी.

सरकारी वकील प्रताप कुमार पात्रा ने बताया कि सबूत के अभाव में कंधमाल फास्ट ट्रैक कोर्ट ने इस मामले में पाँच लोगों को बरी कर दिया. इनमें से एक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक मनोज प्रधान हैं.

Image caption दंगों में चालीस लोग मारे गए थे.

मनोज प्रधान अब तक पाँच मामलों में बरी किए जा चुके हैं लेकिन नौ अन्य मामलों में भी वह अभियुक्त हैं. इनमें से पाँच मामले हत्या के हैं.

पिछले साल 23 अगस्त को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या कर दी गई थी जिसके बाद ईसाइयों के ख़िलाफ़ हमले हुए थे जिनमें 40 लोग मारे गए थे और 25 हज़ार से ज़्यादा बेघर हो गए.

अभी भी बेघर हुए हज़ारों लोग सरकार संचालित पुनर्वास कैंपों में रह रहे हैं.

हाल ही में पाँच यूरोपीय देशों के प्रतिनिधियों ने कंधमाल जाने की इच्छा व्यक्त की थी लेकिन राजनीतिक संवेदनशीलता को समझते हुए सरकार ने उन्हें अनुमति नहीं दी.

इन प्रतिनिधियों ने सोमवार को भुवनेश्वर में ही दंगा पीड़ितों से बातचीत की और बाद में राज्य के पुलिस प्रमुख से ताज़ा हालात की जानकारी ली.

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