अमरीका-चीन के बयान पर भारत ने सवाल उठाए

मनमोहन सिंह और बराक ओबामा
Image caption मनमोहन सिंह 24 नवंबर को राष्ट्रपति ओबामा से मुलाक़ात करेंगे

भारत के विदेश मंत्रालय ने अमरीका-चीन के साझा बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.

अमरीका-चीन के साझा बयान में भारत और पाकिस्तान के संबंध सुधारने में दोनों देशों के सहयोग देने की बात कही गई थी.

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा,'' भारत सरकार शिमला समझौते के अनुसार पाकिस्तान के साथ सभी मुद्दे शांतिपूर्ण तरीके से द्विपक्षीय वार्ता के ज़रिए हल करने के प्रति वचनबद्ध है. तीसरे देश की भूमिका की कोई आवश्कता नहीं है.''

प्रवक्ता का कहना था कि पाकिस्तान के साथ सार्थक बातचीत तभी संभव है जब वह आतंक और आतंक के ख़तरे से मुक्त वातावरण में हो.

इधर भारत स्थित अमरीकी राजदूत टिमोथी रोमर ने बुधवार को दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि अमरीका चाहता है कि पाकिस्तान मुंबई हमलों के लिए ज़िम्मेदार लोगो को सज़ा दिलाए.

राजदूत टिमोथी भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अगले सप्ताह होने वाली अमरीकी यात्रा के बारे में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे.

उन्होंने कहा कि मुंबई हमले को एक साल पूरा होने को है और प्रधानमंत्री मनमेहन सिंह और राष्ट्रपति ओबामा की मुलाक़ात के दौरान निश्चित तौर पर इस बारे में चर्चा होगी.

उनका कहना था कि जहां तक अमरीकी सरकार के सवाल है, उसका हमेशा से यही रुख़ रहा है कि पाकिस्तान सरकार की तरफ़ से सख़्त कार्रवाई हो और उसका नतीजा दिखना चाहिए.

'पाक कार्रवाई करे'

अमरीका ने पाकिस्तान से ख़ासतौर पर कहा है कि मुंबई हमलों के सात अभियुक्तों पर क़ानूनी शिकंजा कसा जाए.

उन्होंने कहा कि अमरीका ने 11 सिंतबर के हमलों को झेला है जबकि भारत ने 26/11 के हमलों को झेला है. उसमें भी कई भारतीयों के साथ छह अमरीकी नागरिक भी मारे गए थे.

टिमोथी रोमर ने कहा कि अमरीका और भारत एक दूसरे के साथ कंधे से कंधा मिला कर आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई जारी रखेंगे.

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के मुद्दे पर भी दोनों नेताओं के बीच बातचीत होगी.

इस मौके़ पर अमरीकी राजदूत ने कहा कि भारत अमरीका असैन्य परमाणु समझौते ने दोनों देशों के बीच एक नए विश्वास और भरोसे का वातावरण पैदा किया है.

हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि परमाणु समझौते को लेकर कुछ मामलों में अभी सहमति नहीं बन पाई है.

लेकिन उन्होंने यक़ीन दिलाया कि जल्द ही इसका समाधान खोज लिया जाएगा.

टिमोथी रोमर के मुताबिक़ राष्ट्रपति ओबामा और अमरीकी जनता भारत के साथ रिश्ते को दुनिया भर में सबसे ज़्यादा अहमियत देते हैं.

उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, जलवायु परिवर्तन, शिक्षा और शांति जैसे इक्कीसवीं सदी के कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों पर दोनों नेताओं के बीच चर्चा होगी.

मनमोहन सिंह शनिवार को उच्चस्तरीय राजकीय यात्रा पर अमरीका के लिए रवाना होंगे और 24 नवंबर को राष्ट्रपति ओबामा से मुलाक़ात करेंगे.

मनमोहन सिंह पहले ऐसे प्रधानमंत्री होंगे जिनकी मेज़बानी ओबामा के राष्ट्रपति बनने के बाद व्हाइट हाउस में की जाएगी.

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