भोपाल गैस पीड़ितों का प्रदर्शन

भोपाल गैस पीड़ित
Image caption भोपाल गैस पीड़ितों ने दिल्ली में धरना प्रदर्शन किया.

भोपाल गैस पीडितों ने गुरूवार को दिल्ली से सटे नोएडा स्थित डाउ केमिकल्स के दफ़्तर पर धरना दिया और कंपनी के ख़िलाफ़ नारे लगाए.

भोपाल से आए लगभग दो सौ लोगों ने कंपनी परिसर में घुसकर नारेबाज़ी की और एक पुतला भी फूंका.

विरोध करने वालों में कई महिलाएँ और बच्चे भी शामिल थे.

भोपाल गैस पीड़ितों के लिए काम कर रही चार संगठनों ने मिलकर इस विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया था.

आंदोलन कर रहे पीड़ितों के एक नेता सतीनाथ षडंगी ने बीबीसी को बताया कि जब तक डाउ केमिकल्स अपनी ज़िम्मेदारी को स्वीकार नहीं करती और ज़हरीले रासायनिक कचरे की सफ़ाई नहीं करती तब तक उसे भारत में कारोबार नही करने दिया जाएगा.

सतीनाथ ने कहा कि ज़हरीले कचरे का असर मां के दूध पर भी पड़ रहा है और दूध पीने वाले बच्चे इससे प्रभावित हो रहे हैं.

उनके मुताबिक़ राज्य और केंद्र सरकारें शुरू से ही इस मामले में गैस पीड़ितों के बजाए अमरीकी कंपनियों का साथ दे रही हैं.

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की बेरुख़ी का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने हाल ही में बयान दिया कि रासायनिक कचरा ज़हरीला नहीं है जबकि 11 वैज्ञानिक अध्ययनों ने ये साबित कर दिया है कि उसमें अत्यंत ज़हरीली चीज़ें मिली हुई हैं.

विरोध प्रदर्शन में शामिल दस साल के रेहान ने कहा कि प्रदूषित पानी पीने से उसका पेट दुखता है.

असर

कई अध्ययनों के अनुसार संयंत्र में मौजूद रसायनिक कचरा भूतल में वर्षों से रिस रहा है जिससे आसपास के इलाके का भूजल ज़हरीला हो गया है लेकिन समीप की बस्तियों में रहने वाले लोग उसे ही पीने को मजबूर हैं.

भोपाल गैस कांड की 25वी बरसी भी क़रीब है. सतीनाथ ने बताया कि इस मौक़े पर सारी दुनिया में डाउ केमिकल्स के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया जाएगा.

1984 में भोपाल में गैस रिसने से भीषण त्रासदी हुई थी जिसमें न सिर्फ़ सैकड़ों लोगों की जान गई बल्कि जो जीवित बचे थे उनकी ज़िंदगी के अनेक पहलुओं को बहुत गहराई से प्रभावित किया था.

यह गैस अमरीकी कंपनी यूनियन कार्बाइड की इकाई से रिसी थी.

विश्व की इस सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदी के लिए ज़िम्मेदार मानी जाने वाली यूनियन कार्बाइड को 2001 मे अमरीकी कंम्पनी डाउ कैमिकल्स ने ख़रीद लिया था.

अपनी मागों को सीधे प्रधानमंत्री के सामने रखने के उद्देशय से भोपाल गैस पीड़ितों ने सैकड़ों की संख्या में फ़रवरी, 2008 में भोपाल से दिल्ली तक की सड़क यात्रा की थी.

तपती धूप में 38 दिनों तक जंतर मंतर पर धरना दिया था लेकिन फिर भी वो प्रधानमंत्री से नहीं मिल पाए.

आख़िरकार प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री पृथ्वीराज चौहान से उनकी मुलाक़ात हुई थी और सरकार ने उनकी मांगों पर एक विशेष आयोग के गठन का आश्वासन दिया था.

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