पैकेज से ख़ुश नहीं यूपी सरकार

बुंदेलखंड के लोग
Image caption बुंदेलखंड का पूरा इलाक़ा ग़रीबी झेल रहा है

उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार पिछड़े हुए बुंदेलखंड क्षेत्र के विकास के लिए केंद्र सरकार की ओर से दिए गए विशेष पैकेज से ख़ुश नहीं है.

उसका कहना है कि यह बहुत देर से दी गई बहुत कम सहायता है.

उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि उसने केंद्र सरकार से बुंदेलखंड के लिए जितनी सहायता मांगी थी उसकी तुलना में यह बहुत कम है.

दूसरी ओर कांग्रेस ने इस पैकेज का स्वागत करते हुए कहा है कि यह क्षेत्र के लोगों के लिए बड़ी राहत है.

उल्लेखनीय है कि केंद्र की यूपीए सरकार ने पिछड़ेपन की समस्या से जूझ रहे बुंदेलखंड के लोगों को राहत देते हुए 7266 करोड़ रुपए के विशेष पैकेज को मंज़ूरी दी है.

यह पैकेज तीन साल के लिए उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के विकास के लिए स्वीकृत किया गया है.

इसमें से लगभग चार हज़ार करोड़ रुपए उत्तरप्रदेश के खाते में जाने हैं.

बीबीसी के उत्तर प्रदेश संवाददाता रामदत्त त्रिपाठी का कहना है कि इस पैकेज के तहत आने वाली राशि से योजनाएँ चलाने का काम राज्य सरकार के जिम्मे ही होगा और यह चुनौती राज्य सरकार के सामने ही होगी कि वह इसका लाभ जनता तक कितना पहुँचा पाती है.

उनका कहना है कि लोगों को मायावती सरकार से यह शिकायत तो है ही वह संसाधनों के उपयोग की प्राथमिकता ठीक तरह से तय नहीं कर रही है.

देर से और कम

राज्य सरकार की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि बुंदेलखंड में दी गई राशि इतनी देर से आई है और इतनी कम है कि इससे जनता का भला नहीं हो सकेगा.

कहा गया है कि मुख्यमंत्री मायावती ने वर्ष 2007 में बुंदेलखंड के लिए सात हज़ार करोड़ रुपए का पैकेज मांगा था और पूरे राज्य के समग्र विकास के लिए 80 हज़ार करोड़ का विशेष पैकेज मांगा था, यदि वह राशि दे दी जाती तो जनता का भला होता.

सरकारी विज्ञप्ति में इस फ़ैसले को दुर्भाग्यपूर्ण कहा गया है.

लेकिन दूसरी ओर उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने इस पैकेज का स्वागत किया है.

बुंदेलखंड में आने वाले बांदा विधानसभा क्षेत्र से चुनकर आए कांग्रेस विधायक विवेक कुमार सिंह का कहना है कि कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने अपने बुंदेलखंड दौरे में लोगों का जो दर्द महसूस किया था, यह पैकेज उसी का परिणाम है.

उनका कहना है कि राहुल गांधी ने ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से पहल करके यह पैकेज दिलवाया है और इससे जनता को फ़ायदा होगा.

सवाल

लेकिन बुंदेलखंड के विकास में कई समस्याएँ सामने आती रही हैं.

इसमें एक तो यह भी है कि यह क्षेत्र दो राज्यों में है. उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश.

पैकेज के तहत उत्तर प्रदेश के सात और मध्य प्रदेश के छह ज़िले शामिल होंगे.

जैसा कि केंद्र सरकार ने जानकारी दी है इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश के बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, जालौन, झांसी, ललितपुर और महोबा और मध्य प्रदेश के छतरपुर, दमोह, दतिया, पन्ना, सागर और टीकमगढ़ ज़िले आएँगे.

पहले इस क्षेत्र के विकास के लिए बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण नाम की एक स्वायत्त संस्था के गठन का सुझाव दिया गया था लेकिन राज्य सरकारों की राजनीतिक खींचतान की वजह से इसका गठन नहीं हो सका.

अब केंद्र सरकार ने विशेष पैकेज के तहत होने वाले कार्यों की प्रगति पर निगरानी रखने के लिए केंद्रीय स्तर पर एक निगरानी समूह के गठन का प्रस्ताव किया गया है. इस समूह में उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश दोनों का साझा नेतृत्व होगा.

लेकिन इसे राजनीतिक खींचतान से कैसे बचाया जाए, यह भी एक चुनौती होगी.

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