जेठमलानी का 'वहाबी पंथ' पर निशाना

राम जेठमलानी
Image caption राम जेठमलानी का विवादों से रिश्ता काफ़ी पुराना है.

भारत के वरिष्ठ वकील और पूर्व केंद्रीय मंत्री राम जेठमलानी ने दिल्ली में शनिवार को आतंकवाद पर क़ानूनविदों के एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कहा कि आतंकवाद के लिए 'वहाबी समुदाय' ज़िम्मेदार है.

उनकी इस टिप्पणी से सऊदी अरब के भारत में राजदूत फ़ैसल अल-तराद विरोध प्रकट करते हुए बाहर चले गए लेकिन इस सम्मलेन के आयोजक आदेश अग्रवाल के अनुसार भारत के क़ानून मंत्री वीरप्पा मोइलि के कहने पर वे सम्मेलन में वापस आ गए.

जेठमलानी ने आतंकवाद के लिए 'वहाबी समुदाय' पर सीधे अंगुली उठाते हुए कहा कि आतंकवाद के लिए इस्लाम को बदनाम किया जाता है, जबकि हिंदू और बौद्ध आतंकी भी मौजूद हैं.

इस दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए भारत की राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद की रोकथाम के लिए ठोस क़ानून की ज़रूरत पर ज़ोर दिया और इसके लिए उन्होंने पूरे विश्व को एकजुट होने के लिए कहा.

सभी वक्ता इस बात से सहमत थे कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ वैश्विक स्तर पर एकजुट होना चाहिए. लेकिन जेठमलानी की एक टिप्पणी पर सहमति की यह दीवार ढह गई.

क़ुरान पढ़ा है

जेठमलानी ने कहा कि युवाओं के दिमाग़ में आतंकवाद ज़हर घोल रहा है और वे आतंकवाद से प्रेरित हो रहे है. उन्होंने कहा कि आतंकवाद से लड़ने के लिए जो कुछ करना होगा हमें ही करना होगा, इस संदर्भ में 'भगवान हमारी मदद नहीं कर सकते क्योंकि वह अलज़ाइमर (यादाश्त खोने की बीमारी) से पीड़ित हैं.'

उन्होंने ये भी कहा कि भारत उन देशों के साथ दोस्ती निभा रहा है जो देश 'वहाबी आतंकवाद' को बढ़ावा दे रहे हैं.

उन्होंने कहा, 'दुर्भाग्य है कि आतंकवाद के लिए इस्लाम को बदनाम किया जा रहा है, जबकि यहां हिंदू और बौद्ध आतंकवाद भी है.'

बाद में जेठमलानी ने अपनी बातों को संभालते हुए कहा कि वह इस्लाम समेत सारे धर्म के छात्र हैं. उन्होंने कहा, मैंने कई बार क़ुरान पढ़ा है. मैंने पैग़म्बर मोहम्मद को शांतिप्रिय व्यक्ति पाया. क़ुरान में कहीं भी नफ़रत और हिंसा की सीख नहीं दी गई है.

उनका कहना था कि इस्लाम का पतन सत्रहवीं सदी में शुरू हुआ जब वहाब नामक एक इंसान ने क़ुरान की एक आयत का ग़लत आकलन करके ग़ैर-मुसलमानों के ख़िलाफ़ नफ़रत और हिंसा फैलाना शुरू किया.

उनका कहना था कि उस आयत को उन्होंने हज़ारों बार पढ़ा लेकिन उन्हें उसमें कोई बुराई नहीं नज़र आई.

क़ानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने जेठमलानी की टिप्पणी से उठे मतभेद को दूर करने के लिए सफ़ाई देते हुए यह कहा कि भारत आतंकवाद को किसी धर्म से जोड़ कर नहीं देखता है और यह कि यह टिप्पणी जेठमलानी के निजी विचार हैं.