उड़ीसा में किसानों की आत्महत्या पर चिंता

फ़ाइल फ़ोटो
Image caption उड़ीसा में किसानों की आत्महत्या की घटनाएं बढ़ी हैं.

पिछले एक महीने के दौरान उड़ीसा में बड़ी संख्या में किसानों के आत्महत्या की ख़बरों ने लोगों को बेचैन कर दिया है. इस दौरान क़रीब 32 किसान आत्महत्या कर चुके हैं.

देश के सबसे ग़रीब राज्यों में शुमार किए जाने के बावजूद इस राज्य में महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के किसानों की तरह आत्महत्या की घटनाएं अक्सर देखने को नहीं मिलतीं. इसलिए इस घटना से लोगों का उत्तेजित होना स्वाभाविक था.

लेकिन किसानों की आत्महत्या संबंधी ख़बरों को स्वीकार करने के बावजूद नवीन पटनायक सरकार यह मानने को तैयार नहीं है कि इसकी वजह वर्षा की कमी और टिड्डियों के हमले के कारण फ़सलों की कम पैदावार रही है.

बीबीसी के साथ बातचीत में उड़ीसा के कृषि मंत्री डा. दामोदर राउत ने कहा, '' यह कहना ठीक नहीं है कि आत्महत्या की वजह फ़सल की कमी या कर्ज़ समय पर न चुका पाना है. इस मामले में विपक्ष बेहद घटिया राजनीति कर रहा है. आंकड़ों का ब्योरा देते हुए कृषि मंत्री ने कहा 1998 में 3500 किसानों ने आत्महत्याएं की थीं. इसलिए इस साल के आंकड़ों में कोई असाधारण बात नहीं हुई है.''

इस मामले पर विधानसभा में लाए गए स्थगन प्रस्ताव पर हुई बहस का जवाब देते हुए डॉक्टर राउत ने कहा कि धान का उत्पान पिछले साल की तुलना में कम रहने की आशा नहीं है.

लेकिन ख़ुद सरकार का ही एक सर्वेक्षण इस दावे से उलट बैठता है. सर्वेक्षण में कहा गया है कि राज्य के 30 में से 15 ज़िले ऐसे हैं जहां फसल उत्पादन में लगातार कमी आ रही है.

कम बारिश

अगस्त महीने की शुरआत में ये बात साफ़ हो गई थी कि इस साल बारिश कम होगी. साथ ही कटाई के समय भी ऐसा लग गया था कि बहुत से क्षेत्रों में ख़ासकर पश्चिमी क्षेत्रों में टिड्डियों ने फ़सल को काफ़ी नुकसान पहुंचाया है.

लेकिन फ़सल की कमी से पैदा हुई स्थिति से निपटने की बजाय राज्य सरकार लगातार यही आश्वासन दे रही है कि राज्य में फ़सल की पैदावार सही हो रही है.

राज्य के कांग्रेसी सांसदों ने इसी मुद्दे पर प्रधानमंत्री से भी मुलाक़ात की थी और मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की थी.

कालाहांडी के सांसद भक्त चरण दास ने इस मामले में केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार से भी मुलाक़ात की और बताया कि इस मामले में केंद्र ने राज्य सरकार से पहले ही रिपोर्ट मांग रखी है.

सांसदों का कहना था कि प्रधानमंत्री और कृषि मंत्री दोनों ने ही आश्वासन दिया है कि रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में आवश्यक क़दम उठाए जाएंगे.

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