'वाजपेयी का नाम कैसे आ सकता है?'

वाजपेयी
Image caption बाबरी मस्जिद विध्वंस पर लिब्रहान आयोग की रिपोर्ट लीक हो गई है

लिबरहान आयोग में आठ वर्षों तक काम करने वाले सहायक वकील अनुपम गुप्ता का कहना है कि जिस व्यक्ति को बुलाया ही नहीं गया, जिससे सवाल-जवाब ही नहीं हुआ उसपर कैसे अभियोग चलाया जा सकता है.

अनुपम गुप्ता ने बीबीसी से बात करते हुए कहा, "उनका नाम पहली बार लिबरहान आयोग में आया है. अटल बिहारी वाजपेयी का नाम आना बहुत हैरानी की बात है क्योंकि इससे पहले आडवाणी जी, मुरली मनोहर जी, उमा जी को, नरसिंह राव जी को और अन्य लोगों को हमने नोटिस भेजकर बुलाया था."

उन्होंने कहा, "आयोग की ओर से हमने उन्हें जांचा और उनकी क्रॉस चेकिंग की लेकिन वाजपेयी जी को हमने जान कर नहीं बुलाया और न ही जांच की क्योंकि अयोध्या मामले में उनका बज़ाहिर लिंक नहीं दिखता था और विध्वंस के साथ उनका कोई सीधा संबंध नहीं मिला था."

उन्होंने कहा, "जब वाजपेयी जी को बुलाया ही नहीं गया तो उन पर इल्ज़ाम कैसे लगाया जा सकता है."

आयोग की रिपोर्ट लीक होने पर उन्होंने कहा कि इसका जवाब या तो जस्टिस लिबरहान दे सकते हैं या गृह मंत्रालय दे सकती है क्योंकि यह रिपोर्ट उनके ही पास थी.

उन्होने यह भी कहा, "अभी तक इंडियन एक्स्प्रेस की ही रिपोर्ट में उनका नाम आया है. अगर यह रिपोर्ट सही है तो भी उन पर कार्रवाई नहीं की जा सकती है क्योंकि जब किसी व्यक्ति को बुलाया ही नहीं गया और उनकी जांच की ही नहीं गई तो फिर उनपर किस प्रकार अभियोग चलाया जा सकता है."

नरसिंह राव

क्या रिपोर्ट में नरसिंह राव को बचाने की कोशिश की गई है इसका जवाब देते हुए अनुपम गुप्ता ने कहा इस मामले में इंडियन एक्स्प्रेस और एनडीटीवी दोनों की रिपोर्टें मेल खाती हैं क्योंकि उनके अनुसार नरसिंह राव के बारे में इसमें कुछ नहीं कहा गया है.

उन्होंने कहा, "उस समय प्रधानमंत्री होने के कारण इस मामले में उनका किरदार बड़ा पेचीदा था इसलिए हमने न सिर्फ़ उनसे आमने-सामने सवाल जवाब किए बल्कि वे 100 लोगों में से अकेले ऐसे थे जिनसे लिखित प्रश्न भी किए गए थे."

नरसिंह राव के जवाब की सराहना करते हुए अनुपम गुप्ता ने रिपोर्ट में उन्हें बरी किए जाने पर संदेह भी जताया: "उनसे सवाल जवाब में कई पेचीदगियां शामिल थीं लेकिन उनके लिखित जवाब के आधार पर उनसे जब दोबारा बातचीत की गई तो उन्होंने बड़ी क़ाबिलियत से उनका जवाब दिया. लेकिन जैसा कि कहा जा रहा है कि उन्हें लिबरहान आयोग रिपोर्ट में छोड़ दिया गया है तो यह संदेह पैदा करता है."

अपने बारे में और रिपोर्ट में होने वाली देरी के बारे में उन्होंने कहा, "मैं आयोग में 1999 में शामिल हुआ और 2007 में मैंने आयोग को छोड़ दिया. देरी के कई कारण हो सकते हैं. मेरे आने से पहले इसमें देरी क्यों हुई मैं नहीं कह सकता."

क्या यह रिपोर्ट राजनीति से प्रेरित है इसके जवाब में उन्होंने कहा, पूरी रिपोर्ट पढ़ने के बाद ही पता चलेगा कि यह रिपोर्ट राजनीतिक से प्रेरित है या नहीं लेकिन इसे पेश करने का समय राजनीति से प्रेरित हो सकता है.

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