लिबरहान पर हंगामे के बाद कैबिनेट की बैठक

फ़ाइल फ़ोटो
Image caption लिब्राहन आयोग ने बाबरी मस्जिद ढहाए जाने पर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी है.

केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंगलवार की सुबह बैठक बुलाई गई है जिससे इन ख़बरों को बल मिला है कि सरकार लिबरहान आयोग और कार्रवाई रिपोर्ट मंगलवार को संसद में पेश कर सकती है.

मंत्रिमंडल की इस बैठक की अध्यक्षता वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी करेंगे क्योंकि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह फिलहाल अमरीका की यात्रा पर हैं.

इसके पहले गृहमंत्री पी चिदंबरम ने लोकसभा और राज्यसभा को आश्वासन दिया था कि यह रिपोर्ट संसद के इसी सत्र में ही पेश की जाएगी.

वैसे यह क़ानूनी बाध्यता भी है कि सरकार किसी आयोग की रिपोर्ट को छह महीने के भीतर अपनी कार्रवाई रिपोर्ट के साथ संसद में रखे. लिबरहान आयोग ने ये रिपोर्ट प्रधानमंत्री को इस साल जून में सौंपी थी.

इसके पहले लोक सभा में भारतीय जनता पार्टी की उपनेता सुषमा स्वराज ने कहा था कि सरकार के इस रिपोर्ट के अंग्रेजी संस्करण को सदन में पेश करने और उसके हिंदी संस्करण को प्रस्तुत करने के लिए समयसीमा तय करने पर विपक्ष को कोई आपत्ति नहीं होगी.

सोमवार को सुबह लिबरहान आयोग की लीक हुई रिपोर्ट के बाद संसद की कार्यवाही स्थगित हो गई थी और जमकर हंगामा हुआ था.

भाजपा ने रिपोर्ट के इस तरह लीक होने पर कड़ी आपत्ति जताई थी.

विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी का कहना था, " लिबरहान आयोग ने अपनी रिपोर्ट जून में ही सरकार को सौंप दी थी फिर इसे संसद में पेश करने में इतनी देरी क्यों हुई है? मैं सरकार से संसद में इस रिपोर्ट को ज्यों का त्यों आज ही रखने की मांग करता हूँ."

लीक पर सवाल

सवाल ये उठ रहा है कि रिपोर्ट किसने लीक की.

गृहमंत्री पी चिदंबरम ने संसद में ऐलान किया कि रिपोर्ट की एक ही प्रति है और वो उनके पास सुरक्षित है.

जब एम एस लिबरहान से पत्रकारों ने पूछा कि कहीं उन्होंने तो लीक नहीं की है रिपोर्ट इंडियन एक्सप्रेस अख़बार को तो वो भड़क उठे.

ये पूरा हंगामा तब शुरू हुआ जब दिल्ली के अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस ने दावा किया कि उनके पास रिपोर्ट के कुछ अंश हैं.

अख़बार के अनुसार इस रिपोर्ट में लिब्रहान आयोग ने बाबरी मस्जिद के विध्वंस के लिए भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी सबको दोषी ठहराया है.

बीबीसी इन आरोपों की पुष्टि नहीं कर रही और ये ख़बर मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है.

ग़ौरतलब है कि छह दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद जगह-जगह दंगे हुए थे और फिर इस मामले की जाँच के लिए न्यायमूर्ति लिबरहान की अध्यक्षता में इस आयोग का गठन किया गया था.

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