नौकाओं पर नहीं लगे जीपीएस

फ़ाइल फ़ोटो

चरमपंथियों ने मुंबई तक पहुंचने के लिए नौका का इस्तेमाल किया था

मुंबई में एक साल पहले हुए चरमपंथी हमलों के कुछ सबक अब भी अमल से दूर हैं. मछली पकड़ने में इस्तेमाल की जाने वाली नौकाओं पर उनकी मौजूदगी की स्थिति बताने वाले ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम (जीपीएस) उपकरण अभी तक नहीं लगाए गए हैं.

पिछले साल चरमपंथियों ने मुंबई में प्रवेश के लिए मछली पकड़ने की एक ऐसी ही नौका एमवी कुबेर का इस्तेमाल किया था. चरमपंथियों ने इस नौका का अपहरण किया और इसमें सवार होकर मुंबई तक पहुंचे थे. अगर उस नाव में जीपीएस सिस्टम लगा होता तो सुरक्षा एजेंसियों को काफ़ी मदद मिल सकती थी.

पुलिस आयुक्त डी शिवनंदन ने माना है कि मौजूदा हालात में मछुआरों को जीपीएस लगाने के लिये मजबूर नहीं किया जा सकता.

सुरक्षा ज़रूरी

उन्होंने कहा कि मछुआरों का समुदाय बहुत बड़ा है और नौकाओं की तादाद लगभग 43 हज़ार है. जब तक हम खुद जीपीएस खरीदकर ना दें तब तक नाविकों को इसे लगाने के लिए मजबूर नहीं कर सकते.

मुंबई में पिछले साल 26 नवंबर को हुए चरमपंथी हमलों में 183 लोग मारे गए थे.

भारतीय तटरक्षक बल ने पिछले साल तटवर्ती राज्यों को मछुआरों को अपनी नाव में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो द्वारा विकसित लगभग 10 हज़ार रुपये से कम कीमत वाला उपकरण मुहैया कराने का सुझाव दिया था.

शिवनंदन ने कहा कि तटवर्ती इलाकों की सुरक्षा को और बेहतर बनाने के लिए अन्य क़दम उठाए गए हैं.

पुलिस आयुक्त ने कहा कि तटीय पुलिस थाने पहले ही काम शुरू कर चुके हैं. नौसेना और तटरक्षक बल समुद्र की निगरानी करेंगे. उनका कहना है कि चरमपंथी हमलों के बाद मुंबई में सुरक्षा व्यवस्था निश्चित रूप से बदली है और इसका अंदाज़ा खुद ही लगाया जा सकता है.

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