मुंबई के अपराधियों पर कार्रवाई पर ज़ोर

बराक ओबामा और मनमोहन सिंह
Image caption दोनों नेताओं ने कई मुद्दों पर साथ काम करने का फ़ैसला किया है

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि मुंबई में पिछले साल हुए 'आतंकवादी हमलों के अपराधियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करना बहुत आवश्यक' है.

ओबामा और मनमोहन के बीच वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में किसी देश का नाम लिए बिना कहा गया है कि दोनों नेताओं ने भारत के पड़ोस में आतंकवाद और हिंसक चरमपंथियों के ख़तरे पर गहरी चिंता जताई है और कहा है कि इसका असर क्षेत्र के बाहर भी दिखाई दे रहा है.

संयुक्त बयान के अनुसार दोनों देशों के बीच आतंकवाद से लड़ने के लिए साझा उपक्रम 'काउंटरटेरेरिज़्म कोऑपरेशन इनिशिएटिव' की स्थापना पर सहमति बनी है. इससे दोनों देशों के बीच 'आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई, सूचनाओं के आदान प्रदान और दोनों देशों की क्षमताओं में वृद्धि के लिए' काम करने की बात शामिल है.

बयान में कहा गया है कि अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान में चरमपंथियों के लिए सुरक्षित ठिकानों को ख़त्म करना और अफ़ग़ानिस्तान में स्थिरता क़ायम करना, उसका विकास और आज़ादी दोनों देशों के साझा हित में है.

इससे पहले बराक ओबामा और मनमोहन सिंह ने साझा संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि अमरीका और भारत, क्षेत्रीय सुरक्षा और गुप्तचर सूचनाओं जैसे मुद्दों पर और अधिक साझेदारी पर सहमत हो गए हैं.

इसमें राष्ट्रपति ओबामा ने कहा था कि अमरीका असैनिक परमाणु समझौते के प्रति वचनबद्ध है.

पर्यावरण की चिंता

साझा बयान के अनुसार दोनों नेताओं ने कहा है कि वे जलवायु परिवर्तन पर भारत और अमरीका बाली कार्ययोजना के अनुरुप संयुक्त राष्ट्र के फ़्रेमवर्क के प्रभावशाली और सतत अमल की दिशा में कार्य करते रहेंगे.

अगले महीने कोपेनहेगन में होने वाले पर्यावरण सम्मेलन में ठोस परिणाम के लिए आपस में एक साथ और अलग-अलग देशों के साथ कार्य करने के लिए दोनों नेताओं ने प्रतिबद्धता जताई है.

ओबामा और मनमोहन सिंह के बीच इस बात पर सहमति बनी है कि कोपेनहेगन सम्मेलन में जो भी सहमति बने वह सभी देशों की क्षमताओं के अनुरुप ज़िम्मेदारियाँ तय करने वाला हो.

साझा बयान के अनुसार दोनों नेताओं ने माना है कि इस सहमति पत्र से विकासशील और विकसित दोनों ही देशों के लिए कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिए लक्ष्यों और इसे लागू करने के लिए कार्ययोजना का ज़िक्र होना चाहिए.

सुरक्षा परिषद

साझा बयान के अनुसार दोनों नेताओं में इस बात पर भी सहमति बनी कि संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद दोनों में इस तरह से सुधार की ज़रुरत है जिससे इक्कीसवीं सदी की सच्चाई प्रतिबिंबित हो सके.

उन्होंने कहा है, "यह सुधार इस तरह से हों कि संयुक्त राष्ट्र नई सदी की चुनौतियों का सामना करने के लिए दुनिया के देशों का प्रतिनिधि, विश्वसनीय और प्रभावशाली फ़ोरम बना रह सके."

दोनों नेताओं ने महसूस किया है कि वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए वैश्विक संस्थाओं को प्रभावशाली बनाए रखना आवश्यक है और यह संभावना बने रहने देना है कि इसमें सभी लोग शामिल हों.

उन्होंनें माना कि दुनिया की आर्थिक चुनौतियों के मुद्दों पर विचार करने के लिए जी-20 एक प्रभावशाली फ़ोरम है.

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