अब भी निशाने पर है मुंबई

केपी रघुवंशी
Image caption केपी रघुवंशी का कहना है कि पहले से बेहतर इंतजाम हुए हैं

महाराष्ट्र में आतंकवाद-निरोधक दस्ते के प्रमुख केपी रघुवंशी का कहना है कि मुंबई हमेशा ही आतंकवादियों का निशाना रहेगा.

इन दिनों उनके लिए सबसे बड़ा खौफ़ यह है कि मुंबई हमलों के एक साल होने पर कहीं एक बार फिर शहर में आतंकी हमले ना हो जाएँ.

यह खौफ़ किसी ख़ास जानकारी के आधार पर नहीं बल्कि उस नामालूम ख़ुफ़िया ख़बर पर होता है, जो कभी-कभी उनके दस्ते तक नहीं पहुँच पाती.

बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने स्वीकार किया कि आतंकवादी हमलों से मुंबई को रोकना मुश्किल है.

तैयारी

वे कहते हैं, "मुंबई आतंकवादियों की नज़रों में हमेशा खटकता रहता है. 26/11 आख़िरी हमला है ऐसा मैं नहीं कह सकता. क्योंकि मुंबई आतंकवादियों का टार्गेट था, टार्गेट है और टार्गेट रहेगा."

रघुवंशी मुंबई में रहनेवालों को और मुंबई आने वालों को यह यक़ीन दिलाते हैं कि उनकी किसी भी हमलों से निपटने की पूरी तैयारी है.

पिछले साल 26 नवंबर को हुए हमलों में उनके साथी हेमंत करकरे की हत्या के बाद वे एक बार फिर से आतंकवाद निरोधक दस्ते के मुखिया बने हैं.

उनका अनुभव काफ़ी है. वर्ष 2006 में ट्रेनों में हुए बम धमाकों के दौरान वे इस दस्ते के प्रमुख थे.

तो क्या उन्होंने या मुंबई पुलिस ने इन हमलों से कोई सबक सीखा है, रघुवंशी कहते हैं- महाराष्ट्र सरकार ने और पुलिस विभाग ने बहुत क़दम उठाए हैं, वो आपको चारों तरफ नज़र आते होंगे और कुछ चीज़ें ऐसी होंगी जो नहीं दिखाई देती हैं लेकिन बहुत सारी चीज़ें की गई हैं और की जा रही हैं.

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