नहीं हुआ अंतिम संस्कार

Image caption पिछले साल मुंबई हमले में 200 से ज़्यादा लोग मारे गए थे

पिछले साल मुंबई हमले के दौरान पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारे गए नौ बंदूकधारियों के शव अब भी मुंबई एक सरकारी अस्पताल में रखे हुए हैं.एक साल बीत जाने के बाद भी उनका अंतिम संस्कार नहीं हो सका है.

पिछले साल मोहम्मद आमिर अजमल कसाब के इन नौ साथियों के शवों को पहले पाकिस्तान को सौंपने की पेशकश की गई थी.

जब पाकिस्तान ने इन्हें लेने से मना कर दिया तब अधिकारियों ने शवों को मुंबई में ही दफनाने की सोची. लेकिन तब मुंबई के मुसलमानों ने इसका विरोध किया था.

अस्पताल के अधिकारियों ने पिछले एक साल में राज्य सरकार को लिखा है कि इन शवों का क्या करना है पर जवाब का उन्हें अभी अब तक इंतजार है.

राज्य सरकार में स्वास्थ्य विभाग के सचिव भूषणगंगरानी कहते हैं, “आतंकवादियों के शव जेजे अस्पताल के शवगृह में रखे हुए हैं, उनका अंतिम संस्कार अभी नहीं किया गया है. इस विषय में केंद्र और राज्य सरकार के आदेश का इंतज़ार है.”

इधर शहर के मुसलमान अब भी अपने पुराने फैसले पर अड़े हुए हैं. उनका कहना है, पुलिस इन शवों का अंतिम संस्कार कहीं भी कर दे लेकिन हमारी उनकी कब्रगाहों में नहीं.

जमीयते उलेमा ए हिंद के वरिष्ठ सदस्य मौलाना मुश्ताक कहते हैं, “ हमारे कब्रिस्तानों में इन शवों को दफन न करें. इतना बड़ा देश है कहीं भी गढ्ढा खोदकर डाल दीजिए.जब सरकार ने हमसे पूछा था तब हमने ये जवाब दिया था..ये हमारा नज़रिया है कि हर आदमी अपने कब्रिस्तान में अपने धर्म के मुर्दों को दफन करता है लेकिन इन लोगों ने जो काम किया है वो कोई मुसलमान हरगिज़ कर ही नहीं सकता तो हम मानते ही नहीं कि वो मुसलमान हैं.”

ऐसे में सरकार भी लाचार दिखाई देती है.कुछ जानकार मानते हैं कि सरकार को चाहिए कि वो पाकिस्तान से दोबारा बातचीत करके इन शवों को वापिस भेज दे वहीं कुछ का कहना है कि इन्हें मेडिकल कॉलेजों में दे देना चाहिए.

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