'संप्रभुता पर बात बिना वार्ता स्वीकार्य नहीं'

उल्फ़ा
Image caption असम के मुख्यमंत्री गोगोई ने कहा कि 'उल्फ़ा के विद्रोह का अंत निकट ही है'

भारत में प्रतिबंधित अलगाववादी संगठन उल्फ़ा की सशस्त्र शाखा के प्रमुख परेश बरुआ ने भारत सरकार की बातचीत की पेशकश को ठुकरा दिया है.

परेश बरुआ ने बीबीसी को किसी अज्ञात स्थान से फ़ोन पर बताया कि वे 'उस बातचीत का हिस्सा नहीं बनेगें जिसमें असम की संप्रभुता का मुद्दा शामिल नहीं है.'

परेश बरुआ ने बीबीसी को बताया, "हमारे हज़ारों लड़के और लड़कियाँ असम की संप्रभुता के लिए अपनी जान गँवा चुके हैं. मैं उल्फ़ा की स्थापना से ही संगठन की मुख्य माँग को छोड़कर उनका अपमान कैसे कर सकता हूँ."

उधर, सीमा सुरक्षा बल के सूत्रों का कहना है कि उल्फ़ा नेता अरविंद राजखोवा, उनकी बेटे, बेटी, उल्फ़ा के उप कमांडर राजू बरुआ, उनकी पत्नी, बेटी और सुरक्षा गार्ड राजा बोरा ने बीएसएफ़ की मेघालय स्थित डौकी चौकी में आत्मसमर्पण कर दिया जिसके बाद उन्हें असम पुलिस को सौंप दिया गया है.

'संप्रभुता है मुद्दा'

महत्वपूर्ण है कि उल्फ़ा की स्थापना अप्रैल 1979 में असम की भारत से आज़ादी की माँग के साथ हुई थी.

बरुआ उन मीडिया रिपोर्टों की प्रतिक्रिया में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे जिनमें कहा गया था कि उल्फ़ा के चेयरमैन अरबिंदा राखोवा भारत सरकार के साथ बातचीत की तैयारी कर रहे हैं.

राजखोवा को बांग्लादेश में हिरासत में लिया गया था और मीडिया रिपोर्टें आ रही हैं कि संभवत: उन्हें भारतीय अधिकारियों के सुपुर्द कर दिया गया है.

असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई और भारत के गृह मंत्री पी चिदंबरम संकेत दे चुके हैं कि भारत सरकार उल्फ़ा से बातचीत की ओर बढ़ रही है.

उधर परेश बरुआ ने कहा, "मुझे ये स्वीकार्य नहीं है. यदि कोई भी अन्य नेता भारत सरकार के साथ बातचीत करना चाहता है तो वह ऐसा कर सकता है लेकिन मैं इस वार्ता का हिस्सा तब तक नहीं बनूँगा जब तक भारत सरकार संप्रभुता के मुद्दे पर बातचीत करने के लिए तैयार नहीं होती."

ग़ौरतलब है कि बरुआ को जेल में बैठे उल्फ़ा नेताओं की ओर से समर्थन मिला है.

उल्फ़ा के पूर्व पब्लिसिटी सेक्रेटरी मिथिंगा डेमारी ने अदालत में एक पेशी के दौरान बीबीसी को बताया, "परेश बरुआ के बिना कोई बातचीत नहीं हो सकती है. उल्फ़ा के संविधान के मुताबिक चेयरमन को बातचीत शुरु करने का कोई अधिकार नहीं है."

ऐसे ही विचार उल्फ़ा के पूर्व वाइस चेयरमैन प्रदीप गोगोई और सांस्कृतिक मामलों के पूर्व सचिव परानीता डेका ने व्यक्त किए हैं.

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