लिबरहान रिपोर्ट पर लोकसभा में चर्चा

बाबरी मस्जिद
Image caption लिबरहान आयोग ने 17 साल अपनी रिपोर्ट सौंपी है

भारत की संसद के निचले सदन लोक सभा में सोमवार को लिबरहान आयोग की रिपोर्ट पर चर्चा होगी.

बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद गठित इस आयोग ने अपनी रिपोर्ट 17 साल बाद सौंपी है.

संसद में पेश होने के ठीक पहले इस रिपोर्ट के कुछ अंश अख़बारों में लीक हो गए थे जिसकी वजह से राजनीतिक हलकों में काफ़ी विवाद पैदा हो गया था.

इस रिपोर्ट पर लोकसभा में 7 और 8 दिसंबर और राज्यसभा में 9 और 10 दिसंबर को चर्चा होगी.

बाबरी मस्जिद गिराए जाने के 17 साल पूरे होने के ठीक एक दिन बाद संसद में इस पर चर्चा हो रही है.

लोक सभा में चर्चा से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी ने ख़ास तैयारी की है.

रिपोर्ट में तत्कालीन प्रधानमंत्री और कांग्रेस के नेता पीवी नरसिंहाराव को कथित तौर पर क्लीन चिट दिए जाने से पार्टी नाराज़ है और उसे वो जोरशोर से उठाएगी.

पार्टी ने लोक सभा में चर्चा के लिए अपने शीर्ष के नेताओं को उतारा है.

भाजपा का निशाना

लोक सभा की चर्चा में पार्टी के अध्यक्ष राजनाथ सिंह और सुषमा स्वराज हिस्सा लेंगे जबकि राज्यसभा में होनेवाली चर्चा में पार्टी का पक्ष अरुण जेटली, वेंकैया नायडू और रविशंकर प्रसाद रखेंगे.

पार्टी के नेता मुख़्तार अब्बास नक़वी ने बीबीसी से बातचीत में कहा," ये रिपोर्ट झूठ का पुलिंदा है और किसी स्वतंत्र आयोग की रिपोर्ट की बजाए ये कांग्रेस पार्टी का घोषणापत्र लगता है."

उम्मीद की जा रही है कि उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह चर्चा में हिस्सा ले सकते हैं. कल्याण सिंह अभी लोक सभा में निर्दलीय सांसद हैं.

कल्याण सिंह को भी लिबरहान आयोग ने दोषी ठहराया है.

भाजपा ने तय किया है कि उसके जिन नेताओं को लिबरहान आयोग ने दोषी ठहराया है, वो सांसद कि बहस में हिस्सा नहीं लेंगे.

इसी कारण सोमवार से इस विषय पर हो रही चर्चा में लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, विनय कटियार और कलराज मिश्र हिस्सा नहीं लेंगे.

कांग्रेस ने अपनी ओर से अभी ये नहीं बताया है कि इस चर्चा में उसकी ओर से कौन नेता हिस्सा लेंगे.

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