'लिबरहान रिपोर्ट सच से दूर'

आडवाणी के साथ राजनाथ सिंह
Image caption राजनाथ सिंह ने कहा कि लोगों का आक्रोश था जिस वजह से विवादित ढाँचा गिरी

लोकसभा में लिबरहान आयोग की रिपोर्ट पर बहस करते हुए भारतीय जनता पार्टी ने इस रिपोर्ट को राजनीति से प्रेरित बताया है.

दो दिनों तक चलने वाली इस बहस के दौरान भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा कि लिबरहान आयोग की रिपोर्ट का सच से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है.

विवादिता ढाँचा के लिए बाबरी मस्जिद शब्द के इस्तेमाल पर टिप्पणी करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा, "विवादित ढाँचा को बाबरी मस्जिद कहना ग़लत है. वह मंदिर था, मंदिर है और मंदिर रहेगा."

उन्होंने रिपोर्ट में व्याप्त ग़लतियों की तरफ़ ध्यान दिलाते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि रिपोर्ट का निर्णय जाँच से पहले ही तैयार कर लिया गया था.

राजनाथ सिंह ने आयोग पर व्यंग्य करते हुए कहा कि 17 वर्षों के अपने कार्यकाल के दौरान आयोग एक बार भी अयोध्या जाना उचित नहीं समझा.

बाबरी मस्जिद गिराए जाने के तुरंत बाद गठित इस आयोग ने अपनी रिपोर्ट 17 साल बाद सौंपी है.

इस रिपोर्ट में लिबरहान आयोग ने बाबरी मस्जिद के विध्वंस के लिए भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी को ज़िम्मेदार ठहराया है.

'भाजपा हिम्मत दिखाए'

उन्होंने कहा, "छह दिसंबर की घटना के कारणों की पड़ताल के लिए बनाई गई रिपोर्ट इतिहास में कहाँ तक झाँकेगी इसे भी तय करना चाहिए."

राजनाथ सिंह ने कहा कि विवादित ढाँचा किसी पूर्व नियोजित साज़िश के तहत नहीं गिराई गई थी बल्कि वह लोगों का स्वत:स्फूर्त आक्रोश था.

दूसरी ओर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के नेता गुरुदास दासगुप्ता ने बहस के दौरान कहा कि यह देश जानना चाहता है कि बाबरी मस्जिद टूटने से क्यों नहीं बचाई गई, क्यों राजनीतिक पार्टी विफल रही.

उन्होंने भाजपा पर प्रहार करते हुए कहा, "भाजपा या तो विध्वंस की ज़िम्मेदारी ले और सभ्यता के सभी मापदंडों की अवहेलना को मानें. हिम्मत दिखाए या फिर जो 1992 में हुआ उससे हाथ धो ले और देश की जनता से माफ़ी मांगे."

वहीं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में ऐसी किसी घटना को नहीं होने दिया.

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