तिरानबे विधायकों ने इस्तीफ़ा दिया

अलग तेलंगाना राज्य के गठन की प्रक्रिया शुरु करने के लिए केंद्र सरकार की मंज़ूरी मिलने के बाद आँध्रप्रदेश की राजनीति में उथल-पुथल मच गई है.

इस फ़ैसले के विरोध में प्रदेश के 93 विधायकों ने अपने इस्तीफ़े विधानसभा के स्पीकर को सौंप दिए हैं. इसमें सबसे ज़्यादा सदस्य सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी के हैं. तेलगू देसम और प्रजा राज्यम के विधायकों ने भी इस्तीफ़ा दिया है.

इन लोगों ने नाराज़गी जताई है कि उनसे सलाह मशविरा किए बगैर ही नए राज्य के गठन का फ़ैसला ले लिया गया. विधायकों का कहना है कि वे इस बटवारे को स्वीकार नहीं करेंगे.

इसके अलावा कांग्रेस के दो सांसदों-एल राजगोपाल (विजयवाड़ा) और वेंकट रामरेड्डी ( अनंतपुर) ने भी अपने पद से इस्तीफ़ा दिया है. एक ने स्पीकर को तो एक ने सोनिया गांधी को इस्तीफ़ा सौंपा है.

हालात को देखते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गुरुवार शाम को दिल्ली में तटीय आँध्र प्रदेश और रायलसीमा के सांसदों की बैठक बुलाई है.

तनाव कि स्थिति

बुधवार देर रात को केंद्र सरकार ने अलग तेंलगाना राज्य बनाने को अपनी मंज़ूरी दे दी थी. तेंलगाना की माँग को लेकर टीआरएस अध्यक्ष चंद्रशेखर राव आमरण अंशन पर थे.बुधवार को उनकी हालत काफ़ी बिगड़ गई थी और डॉक्टरों ने कहा था कि अगर वे आहार नहीं लेते हैं तो उनकी जान को ख़तरा हो सकता है.

नई परिस्थितियों के बाद अब प्रदेश में तटीय इलाक़ों और रायलसीमा के विधायक एक गुट हो गए हैं तो तेलंगाना के नेता दूसरी ओर.

आँध्रप्रदेश विधानसभा में कुल 294 विधायक हैं जिसमें कांग्रेस के 155 सदस्य हैं.

इस बात का अंदेशा जताया जा रहा है कि अगर विधायकों के इस्तीफ़े मंज़ूर हो जाते हैं तो कांग्रेस सरकार अल्पमत में आ सकती है.

उधर कड्डपा और विजयवाड़ा में तेलंगाना के विरोध में शुक्रवार को बंध का आह्वान किया गया है.

वहीं तेलगू देसम पार्टी तेलंगाना के मु्द्दे को लेकर बंटी हुई नज़र आ रही है. अब तक पार्टी का पक्ष रहा था कि अगर कांग्रेस विधानसभान में तेलंगाना के गठन का प्रस्ताव लाती है तो इसका समर्थन करेगी.

इस पूरे प्रकरण की झलक आँध्रप्रदेश हाई कोर्ट में भी दिखाई दी. तेलंगाना से जुड़े वकीलों ने जहाँ जय तेलंगाना के नारे लगाए तो तटीय आँध्रप्रदेश और रायलसीमा के वकील जय आँध्रा के नारे लगा रहे थे.

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