गोरखा कार्यकर्ताओं का आमरण अनशन

दार्जिलिंग
Image caption गोरखा जनमुक्ति मोर्चा लंबे समय से गोरखा राज्य की माँग कर रहे हैं

अलग गोरखालैंड राज्य के गठन की माँग को लेकर शुक्रवार को गोरखा कार्यकर्ताओं ने दार्जिलिंग और सिलिगुड़ी में आमरण अनशन शुरु किया है.

गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) ने दार्जिलिंग के इलाक़ों में 14 दिसंबर से चार दिनों की हड़ताल की घोषणा कर रखी है. जीजेएम की लंबे समय से मांग रही है कि पश्चिम बंगाल से दार्जिलिंग के पहाड़ी क्षेत्र को निकालकर अलग गोरखा राज्य बनाया जाए.

जीजेएम के प्रमुख बिमल गुरुंग का कहना है कि हड़ताल के दौरान गोरखना कार्यकर्ता दिल्ली और कोलकाता में भी अनशन पर बैठेंगे, ताकि 'राष्ट्रीय ध्यान' बटोरा जा सके.

दूसरी ओर तेलंगाना राज्य के गठन की घोषणा के साथ ही भारत के विभिन्न हिस्सों में पृथ्क राज्य की माँग को लेकर नए आंदोलन शुरू हो गए हैं. इससे पूर्वोत्तर भारत भी अछूता नहीं है.

कई राज्यों की माँग

कोच-राजभोंगशी मातृभूमि की माँग कर रहे कामतापुर पीपुल्स पार्टी (केपीपी) का कहना है कि वो अपनी माँग के लिए उत्तरी बंगाल से गुज़रने वाले अहम मार्ग को जाम करेंगे, जो मार्ग पूर्वोत्तर भारत के सात राज्यों को जोड़ता है.

केपीपी के प्रमुख अतुल राय का कहना है, "हम गोरखा आंदोलन में अलग राज्य की माँग को लेकर शामिल होंगे. हमारा कहना है अभी नहीं तो कभी नहीं."

तेलंगाना के गठन की घोषणा ने असम में बोडो आदिवासियों के अलग बोडोलैंड की माँग को लेकर होने वाले हिंसक आंदोलन की याद ताज़ा कर दी है.

कोकराझार से निर्दलीय सांसद संगसुमा खुंगर ब्विस्मुतियारी का कहना है,"हम लेतंलागना के गठन का स्वागत करते हैं और आशा करते हैं कि भारत सरकार अलग बोडोलैंड की स्थापना के लिए बिना किसी देरी के ज़रूरी क़दम उठाएगी."

उन्होंने इस मुद्दे को संसद में भी उठाया है और राज्य पुनर्गठन आयोग बनाने की माँग की है.

बोडोलैंड की माँग पश्चिम बंगाल और असम सरकार के लिए सरदर्द खड़ी कर सकता है. पश्चिम बंगाल के आदिवासी बहुल जुंगेलमहल में राज्य सरकार माओवादियों से लड़ रही है और पिछले 24 घटों में चार वामपंथी कार्यकर्ता मारे गए हैं. वहीं असम में सियासी हलचल तेज़ हो सकती है, क्योंकि राज्य की सत्ताधारी कांग्रेस सरकार बोडो पार्टी के समर्थन से चल रही है.

अमस की राजनीति पर पकड़ रखने वाले जानकार ननी गोपाल महात्मा का कहना है, "अगर इस बार भी बोडो सड़कों पर उतरते हैं तो पहले ही से हिंसा प्रभावित राज्य की स्थिति और बिगड़ सकती है.

ग़ौरलतब है कि ऐसी ही माँगे देश के दूसरे हिस्सों में भी हो रही है.

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