क्या है नए राज्यों के पीछे की राजनीति

Image caption अलग तेलंगाना राज्य के गठन की प्रक्रिया को मंज़ूरी मिलने के बाद वहाँ जश्न का माहौल था.

अलग तेलंगाना राज्य के गठन की प्रक्रिया शुरू करने को केंद्र सरकार की स्वीकृति के बाद से न सिर्फ़ आंध्रप्रदेश के अंदर बल्कि उसके बाहर दूसरे राज्यों में भी अलग राज्य के गठन की मांग उठने लगी है.

उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने शुक्रवार को लखनऊ में संवाददाता सम्मेलन किया और छोटे राज्यों की वकालत करते हुए उत्तर प्रदेश के विभाजन का समर्थन किया.

उन्होंने हरित प्रदेश, बुंदेलखंड और पूर्वांचल के गठन पर अपनी सहमति जताई. लंबे समय से हरित प्रदेश की मांग कर रहे राष्ट्रीय लोक दल के नेता अजित सिंह ने इसके लिए मांग तेज़ करने की बात कही है.

उधर पश्चिम बंगाल में गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के 21 कार्यकत्ताओं ने चंद्रशेखर राव के कदमों पर चलते हुए अंशन पर बैठने का फ़ैसला किया है. साथ ही चौदह दिसंबर से 96 घंटे बंद का भी आहवान किया है.

नए राज्य

सवाल ये है कि भारत में नए राज्य के गठन का आखिर आधार क्या है.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाषा, सामाजिक व आर्थिक स्थिति, सरकार की बेरूखी का आरोप.. ये सारे मुद्दे आंदोलन शुरू करने के लिए होते हैं.

लेकिन राज्य या केंद्र सरकार की नज़र में उस मांग को स्वीकार करने का सबसे बड़ा कारण होता है मांग करने वाले की राजनीतिक शक्ति.

दिल्ली स्थित जामिया हमदर्द विश्वविधालय के सेंटर फ़ॉर फ़ेडरल स्टडीज़ के निदेशक प्रोफ़ेसर अख़्तर मजीद के अनुसार सरकार सिर्फ़ ये देखती है कि किसी मांग को कितना सहयोग हासिल है.

तेलंगाना की घोषणा के बाद उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के अलावा महाराष्ट्र में अलग विदर्भ की मांग भी उठने लगी है.

केंद्र में सत्ता पर क़ाबिज़ कांग्रेस पार्टी भी सैद्धांतिक रूप में छोटे राज्य का समर्थन करती है.

पार्टी प्रवक्ता डॉक्टर शकील अहमद ने बीबीसी से बातचीत के दौरान कहा, "हम छोटे राज्यों के ख़िलाफ नही हैं लेकिन हमारा मानना है कि उससे उन राज्यों को फ़ायदा हो, वहां की अवाम को फ़ायदा हो. सिर्फ़ सियासी लोग मुख्यमंत्री बन जाए, कोई मंत्री बन जाए उसके लिए कांग्रेस नहीं है."

कांग्रेस चाहती है कि अगर छोटे राज्य बनें तो इससे प्रशासन में फ़ायदा हो और वहां के आम लोगों का इससे फ़ायदा हो.

जब भी नए राज्य की मांग उठती है इससे जुड़ा सवाल भी उठता है कि छोटे राज्य होने चाहिए या नहीं. प्रोफ़ेसर मजीद के अनुसार इसमें कोई बुराई नही है.

वे कहते हैं, “अगर छोटे राज्य आ रहे हैं तो इसमें हर्ज़ क्या है, जितनी बार भी नए राज्य बनने की बात आई ये कहा गया कि इससे देश का विघटन हो जाएगा लेकिन 14 राज्यों से 21 हुए, फिर 25 और उसके बाद 28, अब 29 होंने जा रहे हैं. मगर इससे देश की अखण्डता पर आंच आ रही हो ऐसा तो नहीं है.”

तेलंगाना राज्य के गठन पर अभी सिर्फ़ प्रक्रिया शुरू करने पर सहमति बनी है. इस फ़ैसले के बाद अलग तेलंगाना राज्य की माँग करने वाले तो शांत हो गए हैं पर इससे भारत के दूसरे राज्यों में ये आग भड़कने की आशंका बढ़ गई है.

संबंधित समाचार