गडकरी बने नए भाजपा अध्यक्ष

नितिन गडकरी  को अध्यक्ष की कुर्सी सौंपते राजनाथ सिंह
Image caption नितिन गडकरी ने माना है कि दिल्ली की राजनीति में उनका दखल नहीं रहा है

नई पीढ़ी को कमान सौंपने की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की इच्छा को पूरा करते हुए भारतीय जनता पार्टी ने आज अपना अध्यक्ष बदल दिया है और 58 वर्षीय राजनाथ सिंह की जगह 52 वर्षीय नितिन गडकरी को पार्टी की कमान सौप दी गई है.

उन्होंने शनिवार की दोपहर से ही कार्यभार संभाल लिया है.

भाजपा के राष्ट्रीय कार्यालय 11, अशोक रोड में लालकृष्ण आडवाणी और राजनाथ सिंह ने फूलमाला पहनाकर और लड्डू खिलाकर पार्टी के नए अध्यक्ष का स्वागत किया.

पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी इस अवसर पर मौजूद थे.

महाराष्ट्र की राजनीति में सक्रिय रहे नितिन गडकरी पहली बार राष्ट्रीय राजनीति में आ रहे हैं. अध्यक्ष का पद संभालने के बाद उन्होंने कहा है कि वे पार्टी में सभी लोगों का मार्गदर्शन लेते हुए सभी को साथ लेकर चलेंगे.

'विकास की राजनीति करुंगा'

भाजपा में नेतृत्व क्रम में शुक्रवार को पार्टी ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद अपने सबसे अनुभवी नेता लालकृष्ण आडवाणी से लेकर उसे सुषमा स्वराज को देने की घोषणा की थी.

शनिवार को घोषणा की गई है कि राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद पहले की तरह अरुण जेटली संभालते रहेंगे.

उल्लेखनीय है कि अगस्त महीने के अंत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने भाजपा के अंदरुनी कलह पर चिंता ज़ाहिर की थी और नई पीढ़ी को दायित्व सौंपने की संघ की पुरानी इच्छा को दोहराया था.

उस समय पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं ने मोहन भागवत से मुलाक़ात की थी और तभी से यह तय माना जा रहा था कि पार्टी में सभी स्तर पर नेतृत्व परिवर्तन होगा.

'सहज प्रक्रिया'

हालांकि शुक्रवार और शनिवार को पार्टी ने नेतृत्व परिवर्तन की जो घोषणाएँ की हैं उसमें से कोई भी घोषणा चौंकाने वाली नहीं हैं और इसकी अटकलें पिछले तीन महीनों से लगाई जा रही थीं.

इस परिवर्तन की घोषणा करते हुए निवर्तमान अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी में दायित्व परिवर्तन एक सहज-स्वाभाविक प्रक्रिया होती है.

उन्होंने कहा, "भाजपा एक ऐसी राजनीतिक पार्टी है जिसका अपना संविधान है और वह आंतरिक लोकतंत्र में विश्वास करती है इसलिए हर तीन वर्ष में नए अध्यक्ष का चुनाव किया जाता है."

राजनाथ सिंह ने कहा कि एक साथ तदर्थ अध्यक्ष का पद संभालने के बाद उन्होंने तीन वर्ष तक पार्टी के पूर्णकालिक अध्यक्ष के रुप में अपना कार्यकाल दिसंबर में पूरा कर लिया है.

उन्होंने संसदीय बोर्ड के फ़ैसले का ज़िक्र करते हुए कहा, "मैंने प्रस्ताव रखा था कि नितिन गडकरी योग्य, सक्षम और कुशल राजनीतिक कार्यकर्ता हैं और यदि पार्टी में अध्यक्ष की ज़िम्मेदारी उन्हें सौंपी जाए तो पार्टी को हम जितना सुदृढ़ और गतिशील बनाना चाहते हैं, उसमें सफलता मिलेगी. इस प्रस्ताव पर संसदीय बोर्ड में आम सहमति थी."

उन्होंने बताया कि कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों से भी इस विषय में उन्होंने चर्चा की थी और वे भी इस प्रस्ताव से सहमत थे.

राजनाथ सिंह ने अपने पद से त्यागपत्र देने की घोषणा करते हुए नितिन गडकरी के तत्काल कार्यभार संभालने की घोषणा की.

उन्होंने इस परिवर्तन पर टिप्पणी करते हुए कहा, "जो गतिशील और सक्षम नहीं होगा वहाँ ज़िम्मेदारी में परिवर्तन इतनी सहजता से नहीं हो सकता."

कांग्रेस और नेहरू-गांधी परिवार का नाम लिए बिना उन्होंने कहा, "एक ही परिवार को कोई व्यक्ति ही पार्टी के नेतृत्व का दायित्व निभाए, ऐसा हमारे यहाँ नहीं है."

उन्होंने नितिन गडकरी को अपनी कुर्सी सौंपते हुए शुभकामनाएँ दीं.

इसके बाद लालकृष्ण आडवाणी ने भी नितिन गडकरी के प्रशासन क्षमता की तारीफ़ करते हुए विश्वास जताया कि वे पार्टी को आगे बढ़ाने में सफल होंगे.

गडकरी के सामने चुनौती

Image caption राजनाथ सिंह पार्टी को एकजुट करने में सफल नहीं हो सके थे

नितिन गडकरी उसी नागपुर शहर के रहने वाले हैं जहाँ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्यालय है. शायद इसीलिए सहज रुप से माना जाता है कि वे संघ के नज़दीक हैं या उनके चहेते हैं.

राष्ट्रीय राजनीति में उनकी पहचान कम या नहीं के बराबर है लेकिन फिर भी उन्हें ऐसा दायित्व सौंपा गया है जिसे भाजपा की राजनीति को देखते हुए अहम कहा जा सकता है.

52 वर्षीय नितिन गडकरी ने आपात काल के समय अपनी राजनीति शुरु की थी और महाराष्ट्र में लोकनिर्माण विभाग के मंत्री के रुप में उन्होंने बहुत तारीफ़ बटोरी थी.

उनके सामने ज़िम्मेदारी होगी कि वे पार्टी के भीतर लंबे समय से चले आ रहे कलह को ख़त्म करें और गुटबाज़ी को रोकें.

दूसरी ओर पार्टी को हताशा से निकालकर सशक्त विपक्ष के रुप में स्थापित करें.

आदर्श स्थिति में उनके पास यह सब करने के लिए इस कार्यकाल के तीन साल होंगे.

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