झारखंड: छूत-अछूत की राजनीति तेज़

जश्न
Image caption नतीजों के बाद राज्य में जश्न का माहौल देखा जा रहा है

झारखंड विधानसभा के चुनावों के नतीजों में किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के बाद दिल्ली और रांची में राजनीतिक सरर्गमियाँ तेज़ हो गई हैं.

सभी राजनीतिक दलों के नेताओं ने राज्य में गठबंधन सरकार के गठन की बात स्वीकार की है, लेकिन सरकार किसकी बनेगी और इसकी कमान किसके हाथों में होगी, इसे लेकर तोड़जोड़ की राजनीति और बयानबाज़ी शुरू हो गई है.

सबसे बड़े गठबंधन के रुप में उभरी कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनीष तिवारी ने दिल्ली में कहा है कि उनके दल की पहली प्राथमिकता राज्य में एक स्थिर सरकार का गठन करना है.

उनका कहना था, "राज्य की जनता ने मेरी पार्टी को सबसे बड़े गठबंधन के रुप में वोट दिया है, पिछले नौ सालों से राज्य राजनीतिक अस्थिरता का शिकार रहा है, ऐसे में एक स्थिर सरकार का गठन पार्टी की पहली प्राथमिकता है."

उधर भारतीय जनता पार्टी के झारखंड प्रवक्ता संजय सेठ का कहना है कि पार्टी का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरुप नहीं रहा है, लेकिन पार्टी के लिए सरकार बनाने का विकल्प खुला है.

छूत-अछूत से परे की राजनीति

उन्होंने कहा, "सभी विकल्प खुले हुए हैं, और सरकार बनाने की कोशिश जारी है."

उधर झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के नेता शिबू सोरेन ने ऐलान कर दिया है उनके लिए कोई भी दल अछूता नहीं है और वे मुख्यमंत्री के पद से कम पर किसी भी पार्टी से समझौता करने को तैयार नहीं हैं.

जेएमएम के प्रवक्ता अशोक सिंह का कहना है, "गुरूजी (शिबू सोरेन) ने राज्य के लिए बहुत क़ुर्बानी दी है इसलिए उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए."

चुनाव में कांग्रेस के साथी रहे झारखंड विकास मोर्चा के नेता बाबू लाल मरांडी का कहना है कि अगर उनका गठबंधन कांग्रेस के साथ और पहले हुआ होता तो वो बहुमत हासिल कर लेते.

शिबू सोरेन के मुख्यमंत्री पद की माँग और उनके साथ गठबंधन के सवाल पर मरांडी का कहना था, "शिबू सोरेन से परहेज नहीं है, पर विधायक दल ही तय करेगा कि मुख्यमंत्री कौन होगा. कोई भी पार्टी अपना फ़ैसला किसी दूसरी पार्टी पर थोप नहीं सकता."

राष्ट्रीय जनता दल के नेता लालू प्रसाद का कहना है कि राज्य में एक सेकुलर सरकार का गठन होना चाहिए.

इससे पहले कांग्रेस नेता और केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय ने कहा कि जनता ने कांग्रेस को वोट दिया है और भाजपा को नकार दिया है.

उन्होंने बताया कि दिल्ली में पार्टी आलाकमान पूरे मामले पर नज़र बनाए हुए है और सरकार बनाने का फ़ैसला भी दिल्ली में आलाकमान ही करेगा.

सहाय ने ख़ुद को झारखंड के मुख्यमंत्री पद की दौड़ से बाहर बताया.

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