झारखंड: गतिविधियों के केंद्र में सोरेन

जेएमएम कार्यकर्ता
Image caption कांग्रेस और भाजपा दोनों गठबंधनों की नज़र जेएमएम नेता शिबू सोरने पर लगी हुई हैं.

झारखंड विधानसभा के चुनाव नतीज़े आ जाने के बाद अब वहाँ राजनीतिक गतिविधियाँ तेज़ हो गई है.

केंद्र में सत्तारूढ़ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) दोनों ही राज्य में अगली सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं.

सरकार बनाने के लिए यूपीए और राजग दोनों की आस झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) पर है. दोनों ही गठबंधन जेएमएम का समर्थन हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं.

नई सरकार

वहीं दूसरी ओर जेएमएम प्रमुख शिबू सोरने का कहना है कि प्रदेश में अगली सरकार उनके नेतृत्व में सरकार बनेगी.

सरकार बनाने के लिए यूपीए की नज़र कुछ निर्दलीय विधायकों समते पांच सीटें जीकर आने वाली ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन (आजसू) पर भी है.

वहीं लालू प्रसाद यादव के राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने यूपीए सरकार को समर्थन देने की घोषणा की है. राजद को पाँच सीटें मिली हैं.

इस बात की भी ख़बरें मिल रही हैं कि एनडीए ने जेएमएम नेता शिबू सोरेन को मुख्यमंत्री बनाने का प्रस्ताव दिया है.

सरकार बनाने के लिए किसी भी गठबंधन या दल को 41 विधायकों के समर्थन की ज़रूरत पड़ेगी जो फ़िलहाल किसी भी गठबंधन या दल के पास नहीं है.

खरमास का असर

वहीं इस बात की भी संभावना है कि राज्य में नई सरकार का गठन 14 जनवरी के बाद हो क्योंकि अभी ‘खरमास’ का समय चल रहा है.

हिंदू पांचांग को मानने वाले लोग इस समय कोई भी नया या शुभ काम नहीं करते हैं. 'खरमास' 14 जनवरी को मकर संक्रांति के बाद ख़त्म होगा.

पाँच चरणों में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस गठबंधन को 25, भाजपा गठबंधन को 20, जेएमएम को 18 और राजद को पाँच सीटें मिली हैं. वहीं 13 निर्दलीय उम्मीदवार भी जीतकर आए हैं.

मतगणना ख़त्म होने के बाद अब राजधानी राँची स्थित सभी पार्टियों के दफ्तरों में सन्नाटा पसरा हुआ है. लेकिन शाम तक यहाँ राजनीतिक सरगर्मियाँ बढ़ने की संभावना है.

शाम तक यह तस्वीर भी कुछ हद तक साफ़ हो जाएगी कि राज्य में अगली सरकार किस गठबंधन या दल की बनेगी और मुख्यमंत्री कौन होगा.

नवनिर्वाचित विधायकों का अभी राजधानी पहुँचने का सिलसिला भी शुरू नहीं हुआ. इस कारण भी राजधानी में राजनीतिक गतिविधियाँ फिलहाल शांत दिख रही हैं.

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