रुचिका मामले में नई लड़ाई की तैयारी

रुचिका
Image caption रुचिका ने वर्ष 1993 में आत्महत्या कर ली थी

हरियाणा की टेनिस खिलाड़ी रुचिका गिरहोत्रा के साथ छेड़छाड़ के मामले में राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक एसपीएस राठौर को भले ही छह महीने की सज़ा सुनाई गई है, लेकिन रुचिका का परिवार इससे ख़ुश नहीं.

क़रीब 19 साल बाद पिछले दिनों अदालत ने एसपीएस राठौर को छह महीने क़ैद की सज़ा सुनाई थी.

लेकिन रुचिका के पिता एसपी गिरहोत्रा इससे संतुष्ट नहीं. पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि इस मामले में अभियुक्त एसपीएस राठौर को कड़ी से कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए और क़ानून में भी बदलाव करना चाहिए.

उन्होंने कहा, "राठौर के लिए छह महीने की सज़ा पर्याप्त नहीं है क्योंकि उन्होंने रुचिका को आत्महत्या के लिए उकसाया. राठौर ने 19 साल तक हम पर दबाव दिया. हम राठौड़ के लिए कड़ी सज़ा चाहते हैं."

उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला ने पूर्व पुलिस महानिदेशक एसपीएस राठौर को बचाने की कोशिश की थी.

मीडिया से बातचीत में रुचिका के पिता फूट-फूट कर रो पड़े और कहा कि उनकी बेटी के साथ जो कुछ हुआ, वैसा किसी के साथ न हो.

प्रताड़ना

एसपी गिरहोत्रा ने बताया कि कैसे ये मामला सामने आने पर पुलिस ने उन्हें और उनके परिवारजनों को प्रताड़ित किया.

उन्होंने कहा कि उनका परिवार इतना डरा हुआ था कि उन्हें लंबे समय तक छिप कर रहना पड़ा.

ओम प्रकाश चौटाला पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, "राठौर तत्कालीन मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला के दायाँ हाथ थे. उन्होंने अपने स्वार्थ के लिए उनका इस्तेमाल किया. इसलिए छेड़छाड़ के बावजूद भी उन्हें बचा लिया गया."

रुचिका के पिता ने अपने और अपने परिवारवालों के लिए सुरक्षा की मांग की. उन्होंने कहा कि उनके परिवार को अब भी राठौड़ से ख़तरा है.

उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि एसपीएस राठौर ने उनके बेटे को ग़लत मामलो में फँसाने की कोशिश की.

इस मामले में शिकायतकर्ता और रुचिका की दोस्त अराधना के पिता आनंद प्रकाश ने बीबीसी के साथ बातचीत में कहा कि वे इस सज़ा से संतुष्ट नहीं हैं.

उन्होंने कहा कि वे अभी इस मामले में वकीलों से बात कर रहे हैं और राष्ट्रीय महिला आयोग से भी संपर्क में हैं. जल्द ही वे इस मामले में अगला क़दम तय करेंगे.

आनंद प्रकाश ने कहा, "सज़ा बहुत कम है. हम चाहते हैं कि उन पर आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज हो. हम चाहते हैं कि राठौर को कड़ी सज़ा मिले."

परेशानी

उस समय हरियाणा पुलिस के महानिदेशक रहे आरआर सिंह ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि एसपीएस राठौर ने उन्हें जाँच के दौरान काफ़ी परेशान किया था.

उन्होंने कहा, "मेरे घर के बाहर सैकड़ों लोगों को इकट्ठा करके मेरे और रुचिका के ख़िलाफ़ नारे लगवाए गए."

आरआर सिंह ने कहा कि एसपीएस राठौर ने उन्हें सीधे धमकी नहीं दी थी क्योंकि अगर वे ऐसा करते तो वे उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करते.

आरआर सिंह ने ही रुचिका छेड़छाड़ मामले की जाँच की थी और सरकार को रिपोर्ट सौंपी थी. उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि एसपीसी राठौर छेड़छाड़ मामले में दोषी हैं और भारतीय दंड संहिता के तहत उन पर कार्रवाई की जाए.

आरआर सिंह अदालत के फ़ैसले से संतुष्ट नहीं हैं. उनका कहना है कि ये सज़ा बहुत कम है.

राजनीतिक दखल

दूसरी ओर हरियाणा के पूर्व गृह सचिव जेके दुग्गल ने कहा है कि राठौर ने इस मामले में राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल किया.

एक निजी टीवी चैनल के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि पूर्व पुलिस महानिदेशक एसपीएस राठौर के ख़िलाफ़ रुचिका का बयान तथ्यों पर आधारित था.

उन्होंने कहा कि राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण इस मामले में देरी हुई. जेके दुग्गल ने कहा, "यह राजनीतिक हस्तक्षेप था. क्योंकि नौकरशाही के स्तर पर हमने कड़ी सज़ा की सिफ़ारिश की थी. हमने और आरआर सिंह ने ये सिफ़ारिश भेजी थी. लेकिन ये फ़ाइल मंत्री के पास पड़ी रही."

जेके दुग्गल भी रुचिका के परिजनों की तरह छह महीने की सज़ा को कम मानते हैं. उनका कहना है कि पूरे परिवारवालों को प्रताड़ित किया गया है, इसलिए राठौर को कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए.

आराधना का प्रण

इस बीच रुचिका की अभिन्न मित्र और इस मामले में एक गवाह आराधना ने कहा है कि वे इस मामले को छोड़ेंगी नहीं और राठौर को कड़ी से कड़ी सज़ा दिलाकर ही मानेंगी.

बीबीसी के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, "एसपीएस राठौर को जो सज़ा सुनाई गई है, वो काफ़ी कम है. जब तक उन्हें कड़ी सज़ा नहीं मिलेगी, इस केस का उद्देश्य सफल नहीं होगा."

उन्होंने कहा कि रुचिका भी यही चाहती थी कि किसी और लड़की के साथ ऐसा न हो.

एसपीएस राठौर को छह महीने की सज़ा दिए जाने के मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग और अन्य कई संगठनों ने आवाज़ उठाई है.

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष गिरिजा व्यास ने कहा है कि हरियाणा सरकार को इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ उच्च अदालत में अपील करनी चाहिए.

इस मामले में सीबीआई जाँच का आदेश देने वाले जस्टिस आरएल आनंद ने एक टीवी चैनल के साथ बातचीत में कहा है कि वे इस फ़ैसले से ख़ुश नहीं हैं.

उन्होंने कहा है कि इस मामले में दोबारा सुनवाई होनी चाहिए. ये भी मांग उठ रही है कि एसपीएस राठौर के ख़िलाफ़ हत्या के लिए उकसाने का मामला भी चलाया जाना चाहिए.

अगस्त 1990 में 14 वर्षीय रुचिका गिरहोत्रा के साथ छेड़छाड़ का मामला प्रकाश में आया था. उस समय एसपीएस राठौर हरियाणा पुलिस में महानिरीक्षक थे और साथ ही पंचकुला में हरियाणा लॉन टेनिस एसोसिएशन के अध्यक्ष भी थे.

राज्य सरकारों का रुख़

जिस वर्ष छेड़छाड़ की ये घटना हुई, उस समय हुकुम सिंह हरियाणा के मुख्यमंत्री थे. मार्च और जून 1991 के बीच ओम प्रकाश चौटाला राज्य के मुख्यमंत्री बने. लेकिन इस दौरान भी इस मामले में कुछ ख़ास प्रगति नहीं हुई.

Image caption चौटाला ने राठौर को फिर पुलिस महानिदेशक बना दिया था

इस घटना के तीन साल बाद अगस्त 1993 में रुचिका ने आत्महत्या कर ली थी. और तो और रुचिका की आत्महत्या के कुछ समय बाद वर्ष 1994 में एसपीएस राठौर को अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक बना दिया गया. उस समय भजनलाल हरियाणा के मुख्यमंत्री थे.

भजनलाल 1991 से 1996 तक मुख्यमंत्री रहे और उस दौरान राठौर को पुलिस महानिदेशक बना दिया गया. वर्ष 1998 में बंसीलाल के मुख्यमंत्री रहते पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने राठौर के ख़िलाफ़ सीबीआई जाँच का आदेश दिया.

अक्तूबर 1999 में ओम प्रकाश चौटाला एक बार फिर मुख्यमंत्री बने और उन्होंने राठौर को पुलिस महानिदेशक बना दिया. जनवरी 2000 में सीबीआई ने उनके ख़िलाफ़ आरोपपत्र तक दाख़िल किया लेकिन इसके बावजूद वे दिसंबर 2000 तक हरियाणा के पुलिस महानिदेशक बने रहे.

रुचिका छेड़छाड़ मामले को अदालत तक ले गए आनंद और मधु प्रकाश. इनकी बेटी आराधना रुचिका छेड़छाड़ मामले में प्रमुख गवाह हैं.

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