विवाद में फँसे तिवारी ने इस्तीफ़ा दिया

एनडी तिवारी
Image caption अगस्त 2007 में तिवारी आंध्र प्रदेश के राज्यपाल बने थे

एक नए विवाद में फँसे आंध्र प्रदेश के राज्यपाल 86 वर्षीय नारायण दत्त तिवारी ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. उन्होंने राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को फ़ैक्स किए अपने त्यागपत्र में स्वास्थ्य कारणों से पद से इस्तीफ़ा देने की बात कही है.

वे अगस्त 2007 में आंध्र प्रदेश के राज्यपाल बने थे.

ग़ौरतलब है कि शुक्रवार को एक मी़डिया ग्रुप ने एक आपत्तिजनक वीडियो प्रसारित किया था और ये आरोप लगाया था कि उसमें जो व्यक्ति नज़र आ रहे हैं वे राज्यपाल हैं.

लेकिन राज्यपाल के दफ़्तर ने इन आरोपों का सिरे से खंडन किया था. इसके प्रसारण पर आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रतिबंध भी लगा दिया था.

लेकिन विपक्षी दलों - आंध्र प्रदेश में तेलुगु देशम पार्टी और केंद्र में भारतीय जनता पार्टी ने मांग की थी कि या तो वे पद से हट जाएँ या फिर उन्हें बर्ख़ास्त कर दिया जाए. हैदराबाद में भी शनिवार को राजभवन के बाहर अनेक राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किए थे.

ग़ौरतलब है कि इससे पहले नारायण दत्त तिवारी एक अन्य विवाद में तब घिर गए थे जब दिल्ली में एक युवक ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर ये दावा किया था कि वे नारायण दत्त तिवारी का बेटा है. हाईकोर्ट ने यह याचिका ख़ारिज कर दी थी.

'प्रसारण के बाद प्रदर्शन'

इससे पहले राजभवन से जारी एक वक्तव्य में कहा गया कि मीडिया ग्रुप का टेलीविज़न चैनल जिस वीडियो की बात कर रहा है 'वह मनगढ़ंत, झूठा और दुर्भावनापूर्ण' है. राजभवन के वकील ने कहा कि वीडियो को प्रसारित करने वाले टेलीविज़न चैनल और इस पर चर्चा करने वाले दूसरे चैनलों पर मानहानि का मुक़दमा दर्ज किया जाएगा.

आंध्र ज्योति नाम से अख़बार निकालने वाले समूह के नए टीवी चैनल एबीएन ने शुक्रवार की सुबह एक वीडियो का प्रसारण किया था जिसमें एक वृद्ध व्यक्ति को तीन निर्वस्त्र महिलाओं के साथ दिखाया गया था.

आंध्र ज्योति ने शुक्रवार के अंक में बड़े विज्ञापन प्रकाशित किए थे और लोगों से कहा गया था कि वे राजभवन से जुड़ी सनसनीख़ेज़ ख़बर देखें.

इस विज्ञापन के आधार पर राजभवन ने हैदराबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी कि इसका प्रसारण रोक दिया जाए. इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने इस वीडियो के प्रसारण पर रोक लगाने के आदेश दिए थे और कहा था कि एबीएन और कोई दूसरा चैनल भी इसे प्रसारित न करे.

जब तक ये आदेश टेलीविज़न चैनल तक पहुँचाए जाते तब तक चैनल ने वीडियो का प्रसारण कर दिया था. हालांकि आदेश के बाद चैनल ने वीडियो को दोबारा प्रसारित नहीं किया लेकिन इस वीडियो के आधार पर चर्चाओं और बहसों का सिलसिला जारी रखा.

इसके प्रसारण के बाद राजभवन के सामने और शहर में कई जगह महिला संगठनों और दूसरे संगठनों की ओर से विरोध प्रदर्शन शुरु हो गए और राज्यपाल के इस्तीफ़े की मांग शुरु हो गई.

प्रमुख विपक्षी दल तेलुगु देशम पार्टी के नेता चंद्रबाबू नायडु ने इसके बाद जारी एक वक्तव्य में कहा था, "या तो राज्यपाल ख़ुद यह पद छोड़ दें या फिर केंद्र सरकार उन्हें तत्काल बर्खास्त करे." उनका कहना है कि इस घटना ने एक संवैधानिक पद की प्रतिष्ठा को नुक़सान पहुँचाया है.

कुछ और राजनीतिक दलों ने भी राज्यपाल के इस्तीफ़े की मांग की थी.

'झूठे और दुर्भावनापूर्ण आरोप'

दूसरी और राजभवन से इस प्रकरण को झूठा और दुर्भावनापूर्ण बताया है. राजभवन से जारी वक्तव्य में कहा गया है, "नारायण दत्त तिवारी 86 वर्ष के हो चुके हैं और वे अपनी ज़िंदगी के ढलान पर हैं."

वक्तव्य में कहा गया है कि राजभवन हमेशा लोगों के लिए खुला होता है और वह किसी भी तरह के शक-शुबह से ऊपर होता है.

इसके अनुसार, "राज्यपाल बिना भय या पक्षपात के अपनी संवैधानिक ज़िम्मेदारियाँ निभाते रहेंगे."

इस बयान में कहा गया है कि संवैधानिक पद पर काम करने वाले लोगों को इस तरह के विवादों में घसीटा जाना दुर्भाग्यपूर्ण है.

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