एलओसी पर व्यापार रोका

नियंत्रण रेखा पर व्यापारी (फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption नियंत्रण रेखा पर व्यापार सामानों की अदलाबदली के आधार पर होता है

भारत प्रशासित राज्य जम्मू कश्मीर में मंगलवार को व्यापारियों ने नियंत्रण रेखा के पार से भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार नहीं होने दिया.

व्यापारियों का कहना है कि दोनों ओर की सरकारों के संवेदनहीन रवैए की वजह से उन्होंने ऐसा किया.

व्यापारियों ने पुंछ-रावलकोट मार्ग को चकन-दा बाग़ पर रास्ता रोक लिया और पाकिस्तान की ओर से वाहनों को प्रवेश नहीं करने दिया.

पुंछ में व्यापारी संघ के अध्यक्ष पवन आनंद ने बीबीसी को टेलीफ़ोन पर बताया, "दोनों ओर की सरकारों की संवेदनहीनता की वजह से नियंत्रण रेखा के दोनों ओर से व्यापारियों को बड़ा नुक़सान हो रहा है."

व्यापारियों की मांग है कि कुछ वस्तुओं पर से प्रतिबंध हटा लिया जाए, दोनों ओर से व्यापार के लिए सूची को बढ़ाया जाए, पाकिस्तान की ओर से आने वाली गाड़ियों की संख्या बढ़ाने की अनुमति दी जाए और दोनों ओर से व्यापार को बढ़ाया जाए.

पवन आनंद कहते हैं, "अक्तूबर, 2008 में दोनों पक्षों के बीच 21 वस्तुओं के व्यापार के लिए सहमति बनी थी लेकिन अब पाकिस्तान की ओर से सिर्फ़ बादाम और चावल आ रहा है."

याद रहे कि नियंत्रण रेखा के पार से व्यापार शुरु करने को भारत और पाकिस्तान के बीच विश्वासबहाली की दूसरी बड़ी कोशिश बताया गया था, इससे पहले वर्ष 2005 में नियंत्रण रेखा के दोनों ओर के परिवारों के आवागमन को अनुमति दी गई थी और इसे विश्वासबहाली की सबसे बड़ी कोशिश बताया था.

सीमा पार से यह व्यापार सामानों की अदला बदली के रुप में होता है, यानी इसमें नक़द का उपयोग नहीं होता. जब व्यापार शुरु हुआ तो वह धीरे-धीरे बढ़ने लगा क्योंकि इस ओर का सामान उस ओर और उस ओर का सामान इस ओर लोकप्रिय साबित हो रहे थे.

एक और व्यापारी मोहम्मद इक़बाल ने कहा, "उस ओर से आने वाले पेशावरी चप्पल, महिलाओं के सूट, चावल, सूखे मेवे, लहसन, दालें और दूसरे मसाले की मांग बहुत थी. लेकिन धीरे-धीरे इस व्यापार को लेकर दोनों सरकारों की गंभीरता ख़त्म हो गई."

व्यापारियों का कहना है कि भारत ने लहसन और अदरक के आयात पर रोक लगा दी और अब पाकिस्तान सरकार ने मूंग दाल के निर्यात पर रोक लगा दी.

पवन आनंद कहते हैं, "चूंकि वस्तुओं की संख्या घटती जा रही है और इससे व्यापारियों को बड़ा नुक़सान हो रहा है."

उनका कहना है, "अगर इसी तरह से घाटा होता रहा तो बेहतर है कि व्यापार ही न हो. यह व्यापार वस्तुओं की अदला बदली पर है और पाकिस्तान इस समय सिर्फ़ चावल और बादाम भेज रहा है, जिसका यहाँ कोई बड़ा बाज़ार नहीं है."

पुंछ के अतिरिक्त उपायुक्त मोहम्मद मतलूफ़ ख़ान व्यापारियों की इन शिकायतों से सहमत हैं. वे कहते हैं कि इस मामले को कई स्तर पर ठीक करना होगा.

उन्होंने पाकिस्तान की ओर के अधिकारियों से भी मुलाक़ात की है और व्यापारियों की मांगों पर चर्चा की है और मांग पूरी न होने तक व्यापार न करने के व्यापारियों के फ़ैसले पर चर्चा भी की है.

इस समय व्यापार हफ़्ते में दो दिन होता है. मंगलवार और बुधवार को. लेकिन अब व्यापारी चाहते हैं कि हफ़्ते में पाँच दिन व्यापार होना चाहिए.

पवन आनंद कहते हैं, "जब तक ये मांगें पूरी नहीं होंगीं हम व्यापार नहीं होने देंगे."