नए सिरे से जाँच के पक्ष में महिला आयोग

रुचिका
Image caption रुचिका के मामले मे फ़ैसला आने मे 19 साल लगे.

राष्ट्रीय महिला आयोग का कहना है कि वह रुचिका गिरहोत्रा के मामले में अदालत में फिर से सुनवाई के अलावा इस मामले में नए सिरे से जाँच भी चाहता है.

आयोग की अध्यक्ष गिरिजा व्यास ने कहा है कि इस मामले पर तेज़ी से कार्रवाई के लिए एक समिति बना दी गई है और आयोग की ओर से केंद्र और राज्य सरकार से अपील की गई है कि रुचिका के मामले की फिर से सुनवाई हो.

वैसे एक वकील ने हरियाणा हाईकोर्ट में इस, मामले की नए सिरे से जाँच के लिए याचिका दायर की है.

उल्लेखनीय है कि हरियाणा के पूर्व पुलिस महानिदेशक एसपीएस राठौर ने टेनिस खिलाड़ी रुचिका गिरहोत्रा से छेड़छाड़ की थी. रुचिका ने बाद में आत्महत्या कर ली थी.

इसके ख़िलाफ़ मामला दर्ज करने की कोशिश करने पर रुचिका के भाई और पिता दोनों को प्रताड़ित किया गया था. हाईकोर्ट के निर्देश पर नौ साल बाद मामला दर्ज किया गया था और कुल 19 साल बाद फ़ैसला सुनाया गया है.

अदालत ने एसपीएस राठौर को छह महीने की सज़ा सुनाई है. रुचिका के परिजनों और मित्रों ने कहा है कि यह सज़ा बेहद कम है और इस मामले की फिर से सुनवाई होनी चाहिए.

नई धाराएँ

उनका कहना है कि आयोग चाहता है कि इस मामले में जाँच करके नई धाराओं के साथ मामला दर्ज किया जाए.

उन्होंने भारतीय दंड विधान की धारा 306, 307, 120 बी, 166, 167, 196, 202, 221 और 503 आदि धाराओं के तहत मामला चलाने की बात कही है.

उन्होंने कहा कि इन धाराओं के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने के अलावा, सरकारी नौकरी में रहते हुए अवमानना, ग़लत सबूत पेश करना, साक्ष्य ख़त्म करना आदि शामिल है.

दिल्ली में एक पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार ने पहले ही कहा है कि वह इस मामले की फिर से सुनवाई की अपील करेगी लेकिन आयोग चाहता है कि पूर्व डीजीपी के अलावा इस मामले में शामिल और लोगों के ख़िलाफ़ भी कार्रवाई हो.

गिरिजा व्यास का तर्क था कि नए सिरे से जाँच करके ही सभी लोगों के ख़िलाफ़ मामला चलाया जा सकता है.

उन्होंने इस संबंध में केंद्रीय क़ानून मंत्री वीरप्पा मोइली से मुलाक़ात की है और हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा से फ़ोन पर चर्चा की है.

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