रुचिका मामले में सरकार कड़ी सज़ा का समर्थन करेगी

रुचिका
Image caption रुचिका मामले की दोबारा जाँच के लिए एक समिति गठित कर दी गई है

केंद्रीय क़ानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने कहा है कि रुचिका गिरहोत्रा मामले में सरकार जनहित याचिका का समर्थन करेगी.

जनहित याचिका में कहा गया है कि पूर्व पुलिस महानिदेशक एसपीएस राठौर के ख़िलाफ़ नाबालिग को आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला बनता है. आरोप साबित होने पर इस अपराध में मृत्यु दंड तक का प्रावधान है.

एक ग़ैर सरकारी संगठन ने राठौर की सज़ा बढ़ाने और मामले को खुलवाने के लिए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की है.

दूसरी ओर राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी कहा है कि उसने केंद्र और राज्य सरकार से अनुरोध किया है कि इस मामले की नए सिरे से जाँच करवाई जाए.

इधर हरियाणा सरकार ने रुचिका मामले की जांच के लिए एक सात सदस्यीय समिति गठित कर दी है.

पुलिस महानिरीक्षक शत्रुजीत कपूर की अध्यक्षता में गठित समिति इस मामले की जांच करेगी और सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी.

रुचिका के पिता बुधवार को दिल्ली में गृह मंत्री पी चिदंबरम से भी मुलाक़ात की और मामले में हस्तक्षेप की अपील की.

ज़मानत की अपील

रुचिका कांड के दोषी पूर्व डीजीपी एसपीएस राठौर को अदालत की ओर से अग्रिम ज़मानत नहीं मिली.

इस मामले की सुनवाई अब एक जनवरी को होगी.

उल्लेखनीय है कि रुचिका मामले में दो नई एफ़आईआर दर्ज होने के बाद राठौर ने बुधवार को अदालत में अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल की थी.

मंगलवार को एक टीवी चैनल से बातचीत में मोइली ने कहा था, "यह एक आदर्श मुक़दमा हो सकता है, जिसके जरिए हम देश के समक्ष एक उदाहरण पेश कर सकते हैं कि क़ानून सभी पर लागू होता है और इससे ऊपर कोई नहीं है." मोइली ने कहा, "पहला मामला छात्रा से छेड़छाड़ के प्रयास का बनता है. मामला इसी आधार पर बनना चाहिए लेकिन उसकी मौत हो जाती है. उसके साथ हर तरह का उत्पीड़न किया गया, उसके भाई के साथ भी, और फिर उसका स्कूल से निकाला जाना जिसकी वजह से उसकी मौत हुई. ऐसे में भारतीय दंड संहिता की धारा 305 (नाबालिग को आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत मामला होना चाहिए." धारा 305 के तहत मृत्यु दंड तक की सज़ा का प्रावधान है.

ग़ौरतलब है कि रुचिका गिरहोत्रा के साथ छेड़छाड़ के आरोपी हरियाणा के पूर्व पुलिस महानिदेशक एसपीएस राठौर को सीबीआई की विशेष अदालत ने 21 दिसंबर को दोषी क़रार दिया था और छह महीने सज़ा सुनाई थी.

रुचिका गिरहोत्रा एक उभरती हुई टेनिस खिलाड़ी थी. उन्होंने 1990 में शिकायत की थी कि पुलिस अधिकारी राठौर ने उसके साथ छेड़छाड़ की है.

तीन साल बाद 1993 में अपने परिवार को परेशनी में पड़ता देख उन्होंने आत्महत्या कर ली थी.

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