तेलंगाना पर रुख़ नहीं बदला: चिदंबरम

Image caption तेलंगाना मुद्दे को लेकर आंध्र प्रदेश में कई जगह हिंसा भी हुई है

गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि तेलंगाना के मुद्दे पर केंद्र सरकार अपने रुख़ से नहीं पलटी है.

उन्होंने एक पत्रकार वार्ता में कहा कि पाँच जनवरी को जो सर्वदलीय बैठक बुलाई गई है उसका मकसद तेलंगाना मसले के हल के लिए रोडमैप तैयार करना है.

पी चिदंबरम का कहना था, "बातचीत और विचार विमर्श की प्रक्रिया में पांच जनवरी की बैठक पहला क़दम है. इस पहले कदम के तहत हमने आंध्रप्रदेश की आठ मान्यता प्राप्त पार्टियों को बुलाया है ताकि कोई तरीका निकाला जा सके और रोडमैप तैयार किया जा सके."

नौ दिसंबर को केंद्र सरकार ने घोषणा की थी कि अलग तेलंगाना राज्य के गठन की प्रक्रिया शुरु की जाएगी.

लेकिन इसके बाद आंध्रप्रदेश में इस मुद्दे को लेकर ज़बरदस्त हंगामा शुरु हो गया.

असहमति

अलग राज्य का विरोध करने वाले प्रदेश के 90 से ज़्यादा विधायकों ने इस्तीफ़ा दे दिया था. इसमें कई पार्टियों के विधायक शामिल थे. कुछ सांसदों ने भी तेलंगाना मुद्दे पर इस्तीफ़ा दिया था.

अलग राज्य के गठन के विरोध में तटीय आंध्रप्रदेश और रायलसीमा में कई बार बंद का आयोजन किया जा चुका है. वहीं तेलंगाना समर्थक भी अपनी माँगों के समर्थन में बंद रख चुके हैं. ज़्यादातर पार्टियाँ तेलंगाना के मुद्दे पर बटी हुई नज़र आ रही हैं.

इस पूरे घटनाक्रम के बाद केंद्र ने 23 दिसंबर को घोषणा की थी कि अलग तेलंगाना राज्य के गठन पर फ़ैसला सभी पक्षों से विचार-विमर्श के बाद लिया जाएगा.

इससे नाराज़ चंद्रशेखर राव ने लोकसभा सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया था और कहा था कि केंद्र ने वादा-खिलाफ़ी की है.

गृह मंत्री ने कहा है कि इस मसेल पर केंद्र ने अपना रुख़ नहीं बदला है बल्कि राजनीतिक पार्टियों में ही आपसी सहमति नहीं है.

केंद्र ने अब सर्वदलीय बैठक बुलाई है जिसके बाद आंध्र प्रदेश के तेलंगाना समर्थक 13 मंत्रियों ने इस्तीफ़े वापस ले लिए हैं.

आंध्र प्रदेश के कई राजनीतिक दलों ने भी बैठक का स्वागत किया है.अलग तेलंगाना राज्य के लिए आंदोलन कर रहे तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के प्रमुख के चंद्रशेखर राव ने भी बातचीत का स्वागत किया है. लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वे नहीं चाहते कि फिर किसी समिति का गठन कर दिया जाए.

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