मंत्रियों ने इस्तीफ़े वापस लिए

के चंद्रशेखर राव
Image caption चंद्रशेखर राव ने भी बातचीत का समर्थन किया

तेलंगाना मामले पर बातचीत के लिए केंद्र की पहल के बाद आंध्र प्रदेश के तेलंगाना समर्थक 13 मंत्रियों ने इस्तीफ़े वापस ले लिए हैं.

इन मंत्रियों में से एक जे गीता रेड्डी ने कहा कि वे इस उम्मीद में इस्तीफ़ा वापस ले रहे हैं कि बातचीत का निमंत्रण तेलंगाना के अनुकूल होगा. उन्होंने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डी श्रीनिवास और वीरप्पा मोइली ने उनसे इस्तीफ़ा वापस लेने का अनुरोध किया था.

इस बीच आंध्र प्रदेश के कई राजनीतिक दलों ने स्वागत किया है. तेलंगाना ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने केंद्र की पहल का स्वागत किया है. केंद्र ने पाँच जनवरी को तेलंगाना मामले पर एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है.

इस कमेटी के संयोजक प्रोफ़ेसर कुडंडा राम ने कहा,"बातचीत में हमें क्या रुख़ लेना है, हम आपस में मिलकर फ़ैसला करेंगे. हम केंद्र की पहल का स्वागत करते हैं."

अलग तेलंगाना राज्य के लिए आंदोलन कर रहे तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के प्रमुख के चंद्रशेखर राव ने भी बातचीत का स्वागत किया है. लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वे नहीं चाहते कि फिर किसी समिति का गठन कर दिया जाए.

स्वागत

चंद्रशेखर राव ने कहा, "हम बातचीत के लिए तैयार हैं. हम यही चाहते हैं. लेकिन हम इस मामले पर समिति के गठन के ख़िलाफ़ हैं. हम नहीं चाहते हैं कोई समिति बैठे. बातचीत को सिर्फ़ इस पर होनी चाहिए कि तेलंगाना का गठन कब होगा."

तेलुगूदेशम के चंद्रबाबू नायडू ने भी अपने साथियों से सलाह-मशविरा किया है. लेकिन अंदर की ख़बर ये है कि वे परेशान हैं. दरअसल तेलुगूदेशम में तेलंगाना और संयुक्त आंध्र प्रदेश दोनों का समर्थन करने वाले नेता हैं.

चंद्रबाबू नायडू की परेशानी ये है कि सर्वदलीय बातचीत में किसको भेजा जाए. तेलंगाना समर्थकों को या आंध्र समर्थकों को या फिर दोनों को भेजा जाए.

चंद्रबाबू नायडू के लिए असमंजस की स्थिति ये भी है कि अगर दोनों तो साथ भेजा जाए, तो वे बैठक में ही लड़ लेंगे. कांग्रेस में भी कमोबेश यही स्थिति है. इसलिए लगता यही है कि सर्वदलीय बैठक में मुख्यमंत्री के रोसैया ख़ुद जाएँगे.

रुख़

दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने तो तेलंगाना का समर्थन करने का अपना रुख़ पहले ही स्पष्ट कर दिया है. जबकि चिरंजीवी की पार्टी प्रजाराज्यम संयुक्त आंध्र प्रदेश का समर्थन करेंगे.

Image caption तेलंगाना को लेकर कई दिनों से प्रदर्शन चल रहा है

मजलिस-ए-इत्तिहादुल मुसलमीन ने इसका स्वागत किया है. हालाँकि उन्होंने अभी स्पष्ट नहीं किया है कि उनका रुख़ क्या होगा.

लेकिन उनकी मांग है कि बातचीत में मुसलमानों को भी शामिल किया जाए क्योंकि तेलंगाना में मुसलमानों की संख्या 20 फ़ीसदी है.

इस बीच सूत्रों के मुताबिक़ राज्य के नए राज्यपाल सीएसएल नरसिम्हन ने केंद्र सरकार को एक रिपोर्ट भिजवाई है. इस रिपोर्ट में उन्होंने कहा है कि स्थिति उतनी नाज़ुक नहीं, जितनी बताई जा रही है और केंद्र को किसी के दबाव में नहीं आना चाहिए.

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