नए साल में 'दारू नहीं दूध'

दूध वितरण
Image caption राह गुज़रते लोगों को पुकारकर दूध पीने का निमंत्रण दिया गया

नव वर्ष पर क्लब, रेसॉर्ट और होटलों में देर रात तक नाच गाने हुए और कई जगह जाम भी छलके. लेकिन जयपुर में कुछ संगठनों ने गरमा-गरम दूध बाँटकर नए साल का ख़ास अंदाज़ में स्वागत किया.

जयपुर में विश्वविद्यालय के सामने नए साल की रात दूध के मर्तबान सजे और कई हज़ार लोगों ने दूध का रसपान किया.

इस कार्यक्रम के आयोजकों का कहना था कि वे पिछले छह सालों से इसका आयोजन कर रह रहे हैं और इसकी चाहत बढ़ती रही है.

'दारु नहीं दूध'

आयोजक राह चलते लोगों को मनुहार कर-करके बुला रहे थे.

ये ऊँची आवाज़ दूर-दूर और देर तक सुनाई दी, ''दारू नहीं दूध से नए साल का स्वागत करें".

देखते देखते भीड़ उमड़ी और लोग इस मक़सद और अभियान की तारीफ़ करते दूध पीते रहे.

दूध का रसास्वादन करने के बाद एम प्रसाद बोले, "ये अद्भूत है, मुझे लगता है इससे शराबखोरी और नशे की लत पर लगाम लगेगी. आज कल नई पीढ़ी शराब की गिरफ़्त में है."

दूध का मज़ा ले रहे लोगों में मोहम्मद उमर भी थे. उनका कहना था, "कह नहीं सकता कि इसका कितना असर होगा. मगर कोई पहल करेगा तो इसका देर-सबेर असर तो ज़रूर होगा,ये नेक काम है."

जयपुर की अस्थमा केयर सोसायटी और एक विद्यार्थी संगठन पिछले कई सालों से नए साल पर ऐसे ही दूध पिला रहे हैं.

इसके आयोजक धर्मवीर कटेवा कहते हैं, ''गत वर्ष कोई 20-25 हज़ार लोगों ने दूध पीकर नए साल का स्वागत किया था, इस बार ये संख्या 30 हज़ार से ऊपर गई होगी. जयपुर की सरस डेयरी ने इसके लिए दूध से भरा एक पूरा टैंकर वहाँ खड़ा कर दिया था.''

वे कहते हैं, "ये अब एक आंदोलन है. जयपुर में कई स्थानों पर ऐसे आयोजन होने लगे हैं और राज्य के कई ज़िलों में इसका अनुसरण किया जा रहा है. हमारा मक़सद नई पीढ़ी को नशे की जकड़ से मुक्ति दिलाना है. दूध पौष्टिक होता है जबकि शराब जिस्म और दिलो-दिमाग को नुक़सान पहुँचाती है."

जश्न

कुछ लोगों को लगता है कि नए साल की महफ़िलें महज सितारा होटलों में सजती हैं. पर इस खुले मक़ाम पर जश्न था.

दूध का सेवन करने वाले हर व्यक्ति ने इस क़दम की सराहना की क्योंकि इसमें कोई बहकता नहीं.

Image caption आयोजकों का कहना है कि अब कई ज़िलों में ऐसा आयोजन होने लगा है

राह गुज़रते लोगों को दूध की दावत देने वालों में जयपुर के विधायक प्रताप सिंह खाचरियावास भी थे.

वे कहते हैं, ''लोग लाखों रूपये खर्च करते हैं और होटलों में जाते हैं. मगर देश में एक बड़ा वर्ग है जो दूध पीकर भी आनंद की अनुभूति करता है. ऐसा नहीं है कि हम शराब को चुनौती दे रहे हैं, एक पहलू यह भी है कि ऐसे अनेक लोग हैं जिनके पास कुछ भी नहीं है और वे दूध पीने के लिए आ रहे हैं."

वे कहते हैं, "समाज में वंचित और सम्पन्न लोगों के बीच बड़ा फ़ासला है. कोई पाँच हज़ार रूपए की शराब की बोतल पी रहा है और किसी के पास पेट भरने को रोटी नहीं है. ये चुनौती उनको है, उन्हें इस फ़ासले को पाटना होगा, वरना दिक़्कत हो सकती है.''

सामाजिक कार्यकर्ता निधि मेहता कहती हैं, "नशे का बढ़ता चलन नारी के लिए बड़ी समस्या है क्योंकि नशा पारिवारिक हिंसा का बड़ा कारण है. दूध पिलाने जैसे आयोजन से नशा होत्साहित होगा और एक बेहतर समाज बनाने में मदद मिलेगी."

यूँ नए साल की आमद के जश्न रात भर चले. मगर इस जश्न ने आधी रात को दूध के साथ कहा - हैप्पी न्यू ईयर.

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