'हत्याकांड' की चश्मदीद शंभो 'हिरासत' में

छ्त्तीसगढ़ में पुलिस की गश्ती
Image caption छत्तीसगढ़ का दंतेवाड़ी ज़िला नक्सलियों का एक अहम गढ़ माना जाता है

छत्तीसगढ़ में एक आदिवासी युवती शंभो का इलाज के लिए दिल्ली लाते समय पुलिस 'हिरासत' में लिया जाना तूल पकड़ता जा रहा है.

शंभो के वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि शंभो को परेशान किया जा रहा है क्योंकि वो एक हत्याकांड की चश्मदीद है जबकि पुलिस का कहना है कि उसे पूछताछ के लिए दंतेवाड़ा पुलिस थाने ले जाया गया है.

शंभो को कांकेड़ ज़िले की पुलिस ने तब पकड़ा था जब वो इलाज के लिए दिल्ली आ रही थीं. जब शंभो को पुलिस ने पकड़ा तो उस समय वनवासी चेतना आश्रम चला रहे मानवाधिकार कार्यकर्ता हिमांशु कुमार भी उनके साथ थे.

कांकेड़ ज़िले की पुलिस का कहना है कि शंभो से पूछताछ के लिए दंतेवाडा भेजा गया है.

इस मामले पर कांकेड़ ज़िले के एसपी अजय यादव ने बीबीसी से कहा, "उन्हें गिरफ़्तार नहीं किया गया है और न ही हिरासत में लिया गया है. दंतेवाड़ा पुलिस को उनकी ज़रूरत थी, इसी कारण शंभो को दंतेवाड़ा भेजा गया है."

उलझा है मामला

लेकिन इस मामले की जानकारी रखने वाले पीपुल्स यूनियन फ़ॉर ड्रेमोक्रेटिक राइट्स (पीडीयूआर) के हरीश धवन पुलिस की इस दलील को ख़ारिज करते हैं.

उनका कहना है, "शंभो पिछले एक महीने से दंतेवाड़ा के वनवासी चेतना आश्रम में रह रहीं थीं. इससे पहले दिल्ली में उनका इलाज हुआ है, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में मुक़दमा दाख़िल कर रखा है कि कैसे उनके गाँव में उनकी आँखों के सामने पुलिस ने लोगों की हत्याएं की हैं."

हरीश धवन का कहना है कि ऐसे में पुलिस का कहना है कि उन्हें शंभो से किसी मामले में पूछताछ करनी है, बकवास है.

तो फिर सवाल ये उठता है कि क्या पुलिस शंभो को दिल्ली आना से रोकना चाहती है?

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार दरअसल मामला यह है कि दंतेवाड़ा ज़िले के गोमपाड़ा गाँव में पिछले एक अक्तूबर को तलाशी अभियान के दौरान पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने एक संयुक्त अभियान में कथित रुप से नौ लोगों की हत्या कर दी थी.

उस हत्याकांड में शंभो को भी गोली लगी थी और वो उस मामले की चश्मदीद है. शंभो बुरी घायल हो गई थीं और उन्हें मुर्दा समझकर पुलिस वाले छोड़कर चले गए.

शंभो के वकील कॉलिन गोंजालविस का कहना है, "असल मामला यह है कि शंभो ने हत्याकांड को दिल्ली तक पहुँचाया और उसकी जाँच की माँग कर रही है, जिससे पुलिस को परेशानी है."

हरीश धवन का कहना है कि शंभो के पैर की हालत बहुत ख़राब है और अगर वक़्त पर सही से इलाज नहीं किया गया तो उसकी हालत बिगड़ सकती है.

शंभो के वकील कहते हैं कि किसी अपराधी को भी इलाज कराने का हक़ है. ऐसे में अगर पुलिस को शंभो को हिरासत में ही रखना है तो वो उसे दिल्ली में भी रख सकती है.

संबंधित समाचार