तेलंगाना को लेकर गतिविधियाँ तेज़

पी चिदंबरम
Image caption पी चिदंबरम की पहल पर बैठक बुलाई गई है

तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) अध्यक्ष के चंद्रशेखर राव के रविवार दिल्ली आगमन के बाद अलग तेलंगाना राज्य के मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियाँ तेज़ हो गई हैं.

आंध्र प्रदेश के मुख्य मंत्री के रोसैया ने सोमवार को दिल्ली पहुँच कर गृह मंत्री पी चिदंबरम, वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी, रक्षा मंत्री एके एंटनी और क़ानून मंत्री वीरप्पा मोइली से मुलाक़ात की.

वीरप्पा मोइली कांग्रेस पार्टी के आंध्र प्रदेश मामलों के प्रभारी भी हैं.

बाद में ये सभी लोगों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात की और उन्हें राज्य में उत्पन्न हुई स्थिति से अवगत कराया.

केंद्र सरकार ने नौ दिसंबर को आंध्र प्रदेश से अलग तेलंगाना राज्य के गठन की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की थी.

आंदोलन

इसके बाद से ही तेलंगाना समर्थक गुटों और विरोधी खेमों के ज़रिये बंद और आंदोलन का सिलसिला जारी है जिससे न सिर्फ़ आम जीवन प्रभावित हुआ है बल्कि कई बार इन आंदोलनों ने हिंसक रुख़ भी अख़्तियार कर लिया है.

Image caption तेलंगाना के पक्ष-विपक्ष में आंदोलन हो रहे हैं

केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने अलग राज्य बनाने की घोषणा टीआरएस प्रमुख के चंद्रशेखर राव के 11 दिनों की भूख हड़ताल के बाद की थी.

के चंद्रशेखर राव ने दिल्ली में तेलंगाना क्षेत्र से आए सांसदों के अलावा विपक्षी दलों जैसे भारतीय जनता पार्टी और वामपंथी दलों के नेताओं से संपर्क साधा.

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी नेता एबी बर्धन से मिलने के बाद उन्होंने कहा कि अब जो बात भी होगी वह पूर्ण तेलंगाना की होगी न उससे कुछ ज़्यादा और न कम.

उनका कहना था कि राज्य के गठन की क़ानूनी प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए. यह बात अलग है कि तेलंगाना के बनने में भी उतना ही समय लगेगा जितना दूसरे राज्यों के गठन में लगा था.

एबी बर्धन ने कहा कि इस मामले पर जल्द से जल्द कारवाई होनी चाहिए और तेलंगाना के गठन को दूसरे राज्य पुनर्गठन आयोग जैसी समिति के नाम पर नहीं टाला जाना चाहिए.

बैठक

केंद्रीय गृह मंत्री के नार्थ ब्लॉक स्थित कार्यालय में आंध्र प्रदेश के आठ प्रमुख राजनीतिक दलों की बैठक सुबह 10.30 बजे से शुरू होगी लेकिन राजनीतिक समीक्षक कल्याणी शंकर जैसे जानकारों को शक है कि इस बैठक से कोई ठोस नतीजा निकलेगा.

Image caption टीआरएस के प्रमुख चंद्रशेखर राव दिल्ली पहुँच चुके हैं

एक समय गृह मंत्री ने यह कहकर कि इस अलग राज्य पर केंद्र की घोषणा आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री की रिपोर्ट का नतीजा थी, तेलंगाना मामले पर मचे हंगामे का ठीकरा के रोसैया के सर फोड़ने की कोशिश की.

यह भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस के पास इस तरह के संकेत आए थे कि अगर वह अलग राज्य बना देगी तो कुछ दिनों के बाद टीआरएस का कांग्रेस में विलय हो जाएग और इस तरह नए राज्य में भी पार्टी की जय हो जाएगी.

तेलंगाना के गठन को लेकर क़रीब-क़रीब सभी क्षेत्रीय पार्टियों यहाँ तक की ख़ुद कांग्रेस में क्षत्रों के आधार पर भारी मतभेद हैं.

भारतीय जनता पार्टी और वामपंथी पार्टियों में मतभेद नहीं. लेकिन इन पार्टियों का राज्य में कोई ख़ास वजूद नहीं.

तेलुगू देशम पार्टी कभी अलग राज्य की पक्षधर थी अब इसका विरोध कर रही है, नव गठित प्रजा राज्यम ने अपना मन बदल लिया है, तो कांग्रेस में तेलंगाना से चुनकर आए विधायक और सांसद अलग राज्य के हिमायती हैं.

दबाव

दूसरी ओर रायलसीमा और आंध्र क्षेत्र से आने वाले जनता के प्रतिनिधियों ने इसके विरोध में विपक्षी दलों के साथ मिलकर एक सर्वदलीय कार्य समिति बना ली है जिसने अलग राज्य के विरोध में सोमवार को रायलसीमा और तटीय आंध्र के इलाक़ों में बंद आयोजित करवाया.

Image caption कांग्रेस नेताओं ने मुख्यमंत्री की भी आलोचना की

इस मुद्दे पर दबाव बनाने के लिए तेलंगाना समर्थकों ने अपने इलाक़े में रास्ता रोको और रेल सेवा रोको का मंगलवार को आयोजन किया है.

पिछले दिनों मुख्यमंत्री के रोसैया ने बयान दिया था कि गृह मंत्री ने अलग अलग राजनीतिक दलों से कहा है कि वह इस बैठक में शामिल हों ताकि इस मुद्दे पर संबंधित पक्षों की राय जानने के तौर-तरीक़ों पर बातचीत की जा सके.

इससे तो यही लगता है कि सरकार ख़ुद इस बैठक को वक़्त तलाशने का एक ज़रिया मान रही है.

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