कार्टून पर ऑस्ट्रेलिया को आपत्ति

मेल टूडे में छपा कार्टून
Image caption कू क्लाक्स क्लान का पहरावा ऐसा होता है

ऑस्ट्रेलिया ने एक भारतीय अख़बार मे छपे एक कार्टून पर आपत्ति जताते हुए इसे बेहद अपमानजनक कहा है.

इस कार्टून में ऑस्ट्रेलिया की पुलिस को नस्लभेदी गुट 'कू क्लक्स क्लान' के सदस्य के रुप में दिखलाया गया है.

भारतीय अखबार 'मेल टुडे' ने यह कार्टून छापा है जिसमे ऑस्ट्रेलिया की पुलिस का बैज और सफेद हुड पहने एक आकृति दिखाई गई है. यह पहरावा कू क्लक्स क्लान का होता है.

इस संगठन को नस्लभेदी संगठन माना जाता है.

ये कार्टून पिछले दिनों मेलबर्न मे एक हिंसक घटना में भारतीय नितिन गर्ग के मारे जाने और भारतीयों पर हुए हमलों की दूसरी कई घटनाओं के बाद छपा है.

ऑस्ट्रेलिया के अधिकारियों ने पहले ही कहा है कि भारतीयों पर हो रहे हमलों में से कुछ तो नस्लभेदी हो सकते हैं लेकिन इनमें से कई लूटपाट आदि के लिए भी किए गए हैं.

आत्ममंथन के लिए

अखबार में छपे इस कार्टून में एक व्यक्ति सफेद रंग के 'कू क्लक्स क्लान' हुड में है और विक्टोरिया राज्य की पुलिस का बैज पहने हुए है. इस पात्र को कहते हुए दिखाया गया है, ‘हम अब भी अपराध के स्वरूप की जाँच कर रहे हैं.’

विक्टोरिया राज्य पुलिस विभाग के प्रभारी मंत्री बॉब कैमरून ने इस कार्टून की निंदा की है.

उन्होंने कहा है, “विक्टोरिया की पुलिस बहुत ही सहनशील है और ऑस्ट्रेलिया बहुत ही सहनशील राज्य है. ये कहना कि इस राज्य की पुलिस नस्लभेदी है, एकदम ग़लत बात होगी.”

उप प्रधानमंत्री जूलिया गिलर्ड ने कहा कि उन्होंने कार्टून देखा तो नहीं लेकिन उन्होंने कहा है, "अगर ये कार्टून ऐसा कुछ दर्शाता है तो ये बेहद अपमानजनक है और मैं उसकी भर्त्सना करती हूँ."

उनका कहना था कि जिस इलाके मे नितिन गर्ग की हत्या हुई वहां पुलिस ने गश्त तेज़ कर दी है.

विक्टोरिया पुलिस संघ के सचिव ग्रेग डेविस ने पत्रकारो को संबोधित करते हुए कहा, “आस्ट्रेलिया में कार्टून वे लोग बनाते हैं जो कि बहुत तेज़ और मज़ाहिया होते हैं लेकिन इस कार्टून में ऐसा कुछ भी नज़र नहीं आ रहा है.”

उनका कहना था कि नितिन गर्ग की हत्या को नस्लभेदी कहना जल्दबाज़ी होगी और ये कहना बहुत ही ग़लत और अपमानजनक होगा कि पुलिस इसकी जांच नहीं कर रही है.

अख़बार का पक्ष

मेल टुडे अखबार के संपादक भारत भूषण का कहना है कि कार्टून का मक़सद ऑस्ट्रेलिया के लोगों को उनके समाज की रूपरेखा पर आत्म मंथन करने पर उकसाने की कोशिश है.

भारत भूषण ने बीबीसी से कहा, "भारत में लोग इन हमलों को नस्लभेदी मानते हैं क्योंकि उनके बच्चे इन हमलों में मारे जा रहे हैं. अगर इस कार्टून से ऑस्ट्रेलिया नाराज़ है तो अच्छा है. जितना वे नाराज़ होंगे उतनी जल्दी वे चीज़ों को बेहतर करने की कोशिश करेंगे."

पिछले साल भारतीय छात्रों पर मेलबर्न और सिडनी मे हुए हमलों ने दोनों देशों के बीच के राजनयिक रिश्तों मे खटास पैदा कर दी है.

भारतीय सरकार ने ऑस्ट्रेलिया जा रहे छात्रों के लिए यात्रा संबंधी निर्देश भी जारी किए. इन घटनाओ के बाद ऑस्ट्रेलिया के अंतरराष्ट्रीय शिक्षा उद्योग को काफी धक्का पहुंचा है.

ऑस्ट्रेलिया की सरकार के अनुसार वहाँ पढ़ने की इच्छा रखने वाले भारतीय छात्रों के आवेदन में 46 प्रतिशत की कमी आ गई है.

ऑस्ट्रेलिया पर्यटन समीति ने दिसंबर में कहा था कि पिछले साल तक सत्तर हज़ार से ज़्यादा भारतीय वहां पढ़ रहे थे जो कि पूरे अंतरराष्ट्रीय भर्तियों का 19 प्रतिशत है.

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