'मताधिकार के लिए क़ानून में संशोधन'

आप्रवासी मामलों के मंत्री वयलार रवि
Image caption वयलार रवि के अनुसार सरकार वोटिंग अधिकार को अगले आम चुनाव से पहले लागू करने के लिए काम कर रही है.

भारत सरकार विदेश में रहने वाले भारतीय पासपोर्ट धारकों को मतदान का अधिकार देने के लिए जनप्रतिनिधत्व क़ानून में संशोधन करने जा रही है.

आप्रवासी मामलों के मंत्री वयलार रवि ने बीबीसी से एक विशेष बातचीत में कहा कि सरकार इस नई व्यवस्था को अगले आम चुनाव से पहले लागू करने के लिए गंभीरता से काम कर रही है.

वयलार रवि ने कहा, "प्रधानमंत्री इस मामले में गहरी रुचि ले रहे हैं, कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को पारित कर दिया है, अब विधि मंत्री वीरप्पा मोइली इस मामले पर विचार करेंगे और इसके कानूनी पहलुओं पर ग़ौर करेंगे."

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने प्रवासी भारतीय दिवस का उदघाटन करते हुए शुक्रवार को घोषणा की थी कि अगले आम चुनाव से पहले विदेश में बसे भारतीय लोगों को मताधिकार देने की व्यवस्था करने की दिशा में काम चल रहा है.

उन्होंने स्पष्ट किया कि इसके लिए संसद में कोई नया विधेयक नहीं लाया जाएगा क्योंकि वह बहुत लंबी और पेचीदा प्रक्रिया होगी, सिर्फ़ क़ानून में संशोधन कर दिया जाएगा.

योजना पर काम जारी है

सरकार की इस योजना से विदेश में रहने लाखों भारतीयों को मताधिकार मिल सकेगा लेकिन इतनी बड़ी योजना को किस तरह लागू किया जाएगा इसके बारे में पूछे जाने पर आप्रवासी मामलों के मंत्री ने इतना ही कहा कि "इस पर अभी काम चल रहा है."

उन्होंने स्पष्ट किया कि मताधिकार सिर्फ़ उन्हीं लोगों को मिलेगा जिन्होंने भारत की नागरिकता को छोड़कर किसी और देश की नागरिकता नहीं ली है, दूसरे देश की नागरिकता लेने वाले भारतीय मूल के लोगों को कई देशों में ओसीआई (ओवरसीज़ सिटिजंस ऑफ़ इंडिया) का दर्जा दिया गया है लेकिन उन्हें मताधिकार नहीं दिया जा रहा है.

जब वयलार रवि से पूछा गया कि क्या ओसीआई श्रेणी में आने वाले लोगों को आगे चलकर मताधिकार देने पर विचार किया जा रहा है, इसके जवाब में उन्होंने कहा कि "अभी इसका सवाल नहीं उठता".

दुनिया भर के 150 देशों में बिखरे लाखों लाख लोग किस तरह 543 लोकसभा सीटों के लिए वोट डालेंगे इसके जवाब में उन्होंने कहा, "अभी इस पर काम चल रहा है और चुनाव प्रक्रिया के मामले में निर्णय लेने का काम और अधिकार चुनाव आयोग को है."

उन्होंने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा, "विदेश में रहने वाले भारतीय अपने पासपोर्ट के आधार पर दूतावास या उच्चायोग में अपना नाम वोटर के तौर पर दर्ज करा सकेंगे. उनका नाम उस बूथ के लिए दर्ज होगा जहाँ उनका परिवार रहता है, या जहाँ उनका जन्म हुआ है, यह एक बहुत आसान और अच्छा क़ानूनी संशोधन है."

किस तरह से वोटों की गिनती होगी, किस तरह अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों के मतपत्र दुनिया के विभिन्न देशों में पहुँचेंगे और वोट डाले जाने के बाद वापस जाएँगे, इसके जवाब में उन्होंने कहा, "भारत में राष्ट्रपतीय चुनाव व्यवस्था नहीं बल्कि संसदीय प्रणाली है, लेकिन 543 बैलेट बॉक्स लगाए जाएँगे या नहीं, यह इस पर चर्चा का समय नहीं है."

वयलार रवि ने कहा कि इस मामले में अभी बहुत काम करने की ज़रूरत है, अलग-अलग देशों में स्थितियाँ अलग हैं इसलिए उसका भी ध्यान रखना होगा.

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