भारत-बांग्लादेश के बीच समझौते

शेख हसीना और मनमोहन सिंह
Image caption दोनों नेताओं के बीच सौहार्द्रपूर्ण माहौल में बातचीत हुई है.

भारत और बांग्लादेश के बीच मंगलवार को कई महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं.

भारत की तीन दिवसीय यात्रा पर आईं बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना और भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बीच वार्ताएं हुई जिसके बाद इन समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए.

इन समझौतों में आपराधिक मामलों में एक दूसरे को क़ानूनी सहायता देने, सजायाफ्ता लोगों को अपने अपने देशों तक पहुंचाने, अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद, संगठित अपराध, अवैध मादक पदार्थों की तस्करी, ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग संधि और सान्स्किर्तिक आदान प्रदान कार्यक्रम पर सहमति शामिल है.

साथ ही भारत ने बांग्लादेश के विकास के लिए साढ़े चार हज़ार करोड़ सहायता देने का वादा किया है.

इस धन का इस्तेमाल रेलवे के ढाँचे में सुधार आदि में ख़र्च होगा.

भारत और बांग्लादेश के बीच सड़क मार्ग से नए रास्ते पर सहमति बनी है.

इसके अलावा भारत प्रस्तावित अखूरा अगरतला रेल संपर्क बनाने के लिए भारत धन ख़र्च करेगा. इससे कोलकाता से त्रिपुरा की राजधानी अगरतला को जोड़ने में सहूलियत होगी.

बांग्लादेश की तिपाइमुख बाँध परियोजना पर चिन्ता को भारतीय प्रधानमंत्री ने दूर करने की कोशिश की तो तीस्ता नदी के जल बंटवारे पर भी गहन विचार विमर्श हुआ.

दोनों देशों की मंत्रिस्तरीय बातचीत मामले सुलझाने के लिए होगी. साथ ही दोनों देश परस्पर आर्थिक सहयोग बढाने के लिए काम करेंगे.

आतंकवाद की दोनों देशों ने भर्त्सना की और शायद भारत के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि थी कि बांग्लादेश से उसके सुरक्षा मामलों में सहयोग बढाने पर सहमति हुई.

दोनों नेताओं ने कहा कि वह अपनी ज़मीन का इस्तेमाल एक दूसरे के देश के हित के खिलाफ़ नहीं होने देंगे. अपने देश की भूमि का इस्तेमाल चरमपंथियों को प्रशिक्षण या उन्हें शरण देने आदि के लिए नहीं करने दी जाएगी.

दोनों देश जल सीमा निर्धारण का काम जल्द से जल्द पूरा कर लेंगे. और भूमि विवाद के जो बकाया मुद्दे हैं उन्हें भी शीघ्र सुलझाने की दिशा में काम करेंगे.

कुल मिलाकर भारत बांग्लादेश के रिश्तों में शेख हसीना की यात्रा को वित्त मंत्री ने ऐतिहासिक बताया था जिसे अतिशयोक्ति नहीं माना जाना चाहिए. क्योंकि अब दोनों के रिश्ते आपसी समझ बूझ और सहयोग की नींव पर खड़े किए जा रहे हैं.

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