सौर ऊर्जा से रोशन होगी दरगाह

Image caption अजमेर में जियारत के लिए दुनियाभर से जायरीन आते हैं

भारत के अजमेर स्थित महान सूफ़ी संत ख़्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह जल्द ही सौर ऊर्जा से रोशन होगी.

भारत के गैर पारंपरिक ऊर्जा के मंत्री फारूक़ अब्दुल्ला ने इसके लिए 50 लाख रूपए की एक परियोजना को मंजूरी दे दी है.

इस पवित्र दरगाह के नाजिम अहमद रज़ा कहते है,''आप देखेंगे कि जल्द दरगाह परिसर सौर ऊर्जा से प्रकाशमान होगा.''

नाजिम रज़ा ने बीबीसी को बताया कि मंत्रालय अगले पांच वर्ष तक सौर ऊर्जा के रखरखाव को भी राजी हो गया है.

दरगाह प्रबंधन को लगता है कि इससे न केवल ऊर्जा की बचत होगी, दरगाह का भारी भरकम बिजली का बिल भी कम होगा.

अभी दरगाह प्रबंधन हर साल कोई 30 लाख रूपए बिजली बिल के बतौर चुकाता है.

ऊर्जा की बचत

रज़ा मुताबिक इस परियोजना के लिए तकनीकी मंजूरी मिल चुकी है. इसके लिए सर्वे भी करा लिया गया है.

इस दरगाह में हर रोज कम से कम सात हज़ार श्रद्धालु अकीदत के लिए आते है.

मगर कुछ ख़ास दिनों में ये संख्या 25 हज़ार तक जा पहुँचती है.

अजमेर में जियारत के लिए न केवल भारत से बल्कि पूरी दुनिया से जायरीन आते है. इनमें सभी धर्मों के लोग होते है.

दरगाह प्रबंधन का कहना है कि उसे हर रोज कोई लगभग पांच लाख लीटर पानी की भी ज़रूरत पड़ती है.

दरगाह प्रबंधन पानी के लिए भी काम कर रहा है.दरगाह के समीप ही पुराने जल स्रोत को ठीक कराया गया है.

ये वो स्रोत है जो सदियों पहले वजू के काम आता था.मगर वक्त के साथ इसमें कूड़ा करकट भर दिया गया.

इसे साफ़ करने के बाद अब इसमें कोई 41 फीट पानी भरा है.

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