महंगाई पर भाजपा नेता पीएम से मिले

भाजपा नेता
Image caption बढ़ती महँगाई के लिए भाजपा ने केंद्र सरकार की नीतियों को ज़िम्मेदार ठहराया है.

खाद्य पदार्थों की बढ़ती क़ीमतों के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों को ज़िम्मेदार ठहराया है.

बुधवार को भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी के साथ पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के एक दल ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात कर एक ज्ञापन सौंपा.

प्रतिनिधिमंडल में लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, राजनाथ सिंह और गोपीनाथ मुंडे आदि नेता शामिल थे.

भाजपा के इस प्रतिनिधिमंडल ने बढ़ती क़ीमतों पर काबू पाने के लिए तत्काल क़दम उठाने की माँग की.

बेकाबू क़ीमतें

चीनी, आटा और दाल जैसी ज़रूरी चीजों की बढ़ती क़ीमतों का हवाला देते हुए भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने कहा, ''ख़ुद को जनता की आवाज़ बताने वाली यूपीए सरकार का हाथ आम आदमी के साथ नहीं है.''

उन्होंने कहा कि ख़ासतौर पर चीनी पर सरकार की नीति सही नहीं है. बढ़ती क़ीमतों पर काबू पाने के लिए आयात-निर्यात संबंधी जो क़दम उठाए गए हैं उससे न तो क़ीमतें कम हुई हैं और न ही किसानों को कोई फ़ायदा हुआ है.

उन्होंने कहा कि सरकार की इन नीतियों का बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ और व्यापारी फायदा उठा रहे हैं लेकिन सरकार इन मुनाफ़ाखोर कंपनियों पर नियंत्रण नहीं कर पा रही है.

गडकरी ने दावा किया कि सरकार पिछले दो साल में 48 लाख टन चीनी कम दामों पर निर्यात कर चुकी है और अब चीनी की माँग पूरा करने के लिए ज़्यादा क़ीमत पर आयात कर रही है.

भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने महँगाई पर चिंता जताते हुए कहा कि इसका असर सिर्फ़ ग़रीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों पर ही नहीं बल्कि मध्य वर्ग पर भी पड़ा है.

प्रधानमंत्री का आश्वासन

आडवाणी ने बताया कि प्रधानमंत्री ने उनके ज्ञापन को स्वीकार करते हुए महँगाई कम करने के लिए क़दम उठाने का आश्वासन दिया है.

उन्होंने कहा, ''केन्द्र सरकार महँगाई के लिए राज्य सरकारों को दोष नहीं दे सकती है. यह सही नहीं है. सरकार को अपनी नीतियों की समीक्षा करनी चाहिए.''

ग़ौरतलब है कि पिछले दिनों केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने ख़ास तौर पर उत्तर प्रदेश सरकार से राज्य के बाहर से कच्ची चीनी लाने पर लगी पाबंदी हटाने की अपील की थी.

उनकी इस अपील पर उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने किसानों के हित का हवाला देते हुए कहा था कि उनका फ़ैसला सही है क्योंकि रोक हटाने से सिर्फ़ चीनी मिल मालिकों का ही फ़ायदा होगा.

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