पुराने तेवर में नज़र आए मुलायम

मुलायम सिंह यादव
Image caption पर्यवेक्षक मानते हैं कि मुलायम सिंह यादव ने मायावती सरकार को खुली चुनौती दे दी है

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, 71-वर्षीय मुलायम सिंह यादव अपने नाम से चिपके पांच सितारा ठप्पे को उतार फेंकने के प्रयास में फिर से धरती पुत्र के अपने जुझारू तेवर में नज़र आए हैं. उन्होंने पूरे प्रदेश में पार्टी कार्यकर्ताओं को समाजवादी पार्टी की अंदरुनी कलह से बाहर निकाल कर जनता के साथ जोड़ने की कोशिश भी की है.

मायावती सरकार ने मंगलवार को मंहगाई के खिलाफ़ समाजवादी पार्टी के धरना प्रदर्शन को रोकने के लिए एक दिन पहले से ही पार्टी कार्यकर्ताओं की धरपकड़ शुरू कर दी थी.

समाजवादी पार्टी के बैनर पोस्टर फाड़ दिए गए थे. राजधानी लखनऊ आने वाले वाहनों की जांच पड़ताल भी की गई. सरकार ने विक्रमादित्य मार्ग चौराहे पर नाके लगाकर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किए थे. जानकारों के मुताबिक ऐसा मुलायम और उनके समर्थकों को समाजवादी पार्टी कार्यालय के अंदर ही घेरे रखने के मक़सद से किया गया.

पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार मुलायम को समाजवादी पार्टी में भाषण देना था. मीडिया भी बड़ी संख्या में इस उम्मीद के साथ खडा था कि वे अमर सिंह प्रकरण पर कुछ बोलेंगे. लेकिन मुलायम अपने घर से निकले और पुलिस वालों को चकमा देते हुए, बिना दफ़्तर में रुके हजरतगंज चौराहे पर पहुँच गए.

सर पर लाल टोपी पहने वे चादर बिछाकर अकेले ही धरने पर बैठ गए. चौराहे पर तैनात पुलिस वाले जब तक कुछ समझ पाते, चारों ओर से समाजवादी पार्टी कार्यकर्ता वहाँ पहुँचने लगे.

वहाँ पहुँचे अफ़सरों ने मुलायम को एक कार में बिठाकर ले जाना चाहा, पर उन्होंने मना कर दिया और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ एक टूटी-फूटी बस में सवार हो गए.

धीरे धीरे वहाँ लोग जमा होने लगे और देखते ही देखते एक जुलूस सा बन गया. पुलिस घेरे में जुलूस हज़रतगंज बाज़ार से पुलिस लाइन की तरफ़ चल पडा. जब रास्ते में लोग जुड़ने लगे तो पुलिस ने कई बार लाठी चार्ज किया. कचहरी के पास कई वकील भी प्रदर्शन में शामिल हो गए.

पुलिस अफ़सर से भिड़े मुलायम

एक बार तो मुलायम सिंह ख़ुद बस से कूद कर एक पुलिस अफ़सर से भीड़ गए और लाठी चार्ज पर कड़ा एतराज किया. मुलायम की यह फुर्ती और तेवर देख कर उनके कार्यकर्ता और जोश में आ गए. प्रदर्शन देख कई आम लोगों का कहना था कि 'चलो कोई बोल तो रहा है मंहगाई, फ़िज़ूलखर्ची और भ्रष्टाचार के खिलाफ.'

करीब दो घंटे बाद मुलायम का काफ़िला पुलिस लाइन पहुंचा और उस समय तक लगभग चार-पाँच हज़ार लोग जमा हो गए थे. पुलिस लाइन का मैदान लाल टोपी वालों से भर गया.

वहाँ पत्रकारों से बातचीत में मुलायम ने कहा, "मायावती का सारा घमंड चूर हो गया है. सरकार ने जो टेरर कायम कर रखा था, वह ख़त्म हो गया है....अब सरकार के आख़िरी दिन आ गए हैं." ज़िला मजिस्ट्रेट ने उस इलाक़े को अस्थायी जेल घोषित कर दिया और कुछ देर बाद मुलायम समेत सबको रिहा कर दिया गया.

पार्टी कार्यकर्ता ये कहते सुने गए कि ‘पिछले कुछ सालों से नेता जी पर जो फिल्मी और बम्बइया कलाकारों और पूंजीपतियों का ठप्पा लगा था, अब वह दूर हो जाएगा. पार्टी फिर से गाँव, गरीब किसान और नौजवान के साथ जुड़ेगी.'

समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं को उम्मीद है कि लोकसभा चुनाव में पार्टी के जनाधार गँवाने के बाद जिस तरह कांग्रेस अपनी जड़ें जमा रही है, अब जनसंघर्ष से उसका मुकाबला होगा. पर्यवेक्षकों का मानना है कि मुलायम सिंह ने मायावती सरकार को खुली चुनौती दे दी है.

बसपा ने ख़ारिज किया

उधर ज़िला अधिकारियों का कहना था कि शासन से सख़्त निर्देश थे कि मुलायम को उनके पार्टी दफ़्तर से निकलने ही न दिया जाए. प्रमुख सचिव (सूचना) विजय शंकर पांडे ने पत्रकारों को बताया कि ‘मुख्यमंत्री मायावती ने पहले ही कहा कि मंहगाई के लिए केंद्र जिम्मेदार है.’

दूसरी ओर बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने समाजावादी पार्टी के धरना प्रदर्शन को पूरी तरह से ‘फ़्लॉप’ बताया है.

उन्होंने कहा, "समाजवादी पार्टी के इस तथाकथित राज्य स्तरीय आंदोलन के दौरान कुछ ही जगह पर कार्यकर्ताओं के नाम पर भाड़े के कुछ लोग एकत्र हुए जो रस्म-अदायगी करके चलते बने. केवल गिनती के 12-13 जनपदों में ही थोड़े से लोग गिरफ़्तारी के लिए सामने आए और किसी भी जनपद में इनका आंकड़ा 200-300 से अधिक नहीं था."

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