तेलंगाना पर फ़ैसले का दबाव बढ़ा

तेलंगाना के लिए आंदोलन
Image caption तेलंगाना के समर्थन में दिसंबर से हिंसक आंदोलन चल रहे हैं

सर्वदलीय ज़्वाइंट एक्शन कमेटी (जेएसी) ने फ़ैसला किया है कि अगर केंद्र सरकार 28 जनवरी तक तेलंगाना के गठन को लेकर कोई ठोस सकारात्मक फ़ैसला नहीं करती तो वे जनप्रतिनिधियों के सामूहिक इस्तीफ़े स्वीकार करने की अपनी योजना पर क़ायम रहेंगे.

बुधवार को हुई जेएसी की बैठक के बाद तेलंगाना राष्ट्र समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर राव ने बताया है कि अगर गुरुवार को कोई निर्णय नहीं लिया गया तो विधायक 29 जनवरी, शुक्रवार को विधानसभा अध्यक्ष से मुलाक़ात करेंगे.

दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है कि जिन विधायकों ने इस्तीफ़े दे दिए हैं उन्हें स्वीकार कर लिया जाना चाहिए.

उल्लेखनीय है कि तेलंगाना राज्य के गठन को लेकर आंध्र प्रदेश के तेलंगाना समर्थक विधायकों ने अपने इस्तीफ़े विधानसभा अध्यक्ष को भेज दिए हैं.

इसका उद्देश्य सरकार पर राज्य के गठन की प्रक्रिया शुरु करने के लिए दबाव बनाना है.

इस बीच राज्य में तेलंगाना के समर्थन में आंदोलन लगातार चल रहा है.

दबाव

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार जेएसी की बैठक के बाद पत्रकारों से चर्चा करते हुए चंद्रशेखर राव ने कहा कि कांग्रेस के विधायक दिल्ली में हैं ताकि वे तेलंगाना राज्य के गठन के लिए सकारात्मक बयान जारी करने के लिए आलाकमान पर दबाव बनाया जा सके.

उन्होंने कहा, "अगर 28 जनवरी को बयान आ जाता है तो ठीक है वरना हम अपने इस्तीफ़े स्वीकार करने की योजना पर क़ायम रहेंगे."

चंद्रशेखर राव का कहना था कि कुछ कांग्रेस विधायकों ने भी संकेत दिए हैं कि वे गुरुवार की शाम होने वाली जेएसी की बैठक में शामिल होंगे.

टीडीपी के वरिष्ठ विधायक जनार्दन रेड्डी ने कहा है कांग्रेस नेताओं से कहा है कि या तो वे तेलंगाना राज्य के गठन के लिए एक समयबद्ध कार्यक्रम तैयार करवाएँ या फिर राज्य गठन के आंदोलन में शामिल हो जाएँ.

भाजपा के नेता विद्यासागर राव ने उम्मीद जताई है कि यदि कोई सकारात्मक बयान नहीं आता है तो कांग्रेस के नेता भी जेएसी के निर्णय का पालन करेंगे.

उल्लेखनीय है कि जेएसी ने गत 12 जनवरी को सरकार के लिए 28 जनवरी की समय सीमा तय की थी कि तब तक वह तेलंगाना राज्य के गठन के विषय में कोई फ़ैसला कर ले अन्यथा विधायक दबाव डालेंगे कि विधानसभा अध्यक्ष उनके इस्तीफ़े स्वीकार कर लें.

जनहित याचिका

Image caption चंद्रशेखर राव के 11 दिनों के आमरण अनशन के बाद केंद्र सरकार ने तेलंगना के गठन की प्रक्रिया शुरु करने का ऐलान किया था लेकिन बाद में वह इससे पलट गई थी

उधर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहितयाचिका दायर करके पूर्व सांसद एन नारायण रेड्डी ने कहा है कि आंध्र विधानसभा के सदस्यों ने जो इस्तीफ़े दिए हैं उन्हें स्वीकार कर लिया जाना चाहिए.

मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन की अध्यक्षता वाले पीठ ने इस याचिका को स्वीकार करते हुए सुनवाई के लिए पहली फ़रवरी की तारीख़ तय की है.

पीटीआई का कहना है कि हालांकि याचिकाकर्ता ने अनुरोध किया था कि इस मामले की सुनवाई पहले की जाए लेकिन पीठ ने इसे स्वीकार नहीं किया.

एन नारायण रेड्डी ने दावा किया है कि वे सभी विधायकों की ओर से यह याचिका दायर कर रहे हैं लेकिन याचिकाकर्ता के रुप में अकेले उनका ही नाम है.

याचिकाकर्ता के वकील सुबोध मार्कंडेय ने कहा है कि सभी दलों के 139 विधायकों ने व्यक्तिगत तौर पर विधानसभा को अपना इस्तीफ़ा सौंपा था.

रेड्डी का दावा है कि 294 सदस्यों वाली विधानसभा में 200 विधायकों ने अपने इस्तीफ़े दे दिए हैं लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया जा रहा है.

सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया गया है कि इस्तीफ़े पिछले साल 10 से 23 दिसंबर के बीच दिए गए थे.

संबंधित समाचार