गुरु नहीं गुरुघंटाल निकले ललित मोदी

ललित मोदी
Image caption ललित मोदी राजस्थान क्रिकेट बोर्ड का चुनाव केंद्रीय मंत्री सीपी जोशी से हार गए थे.

वाह गुरु ललित मोदी वाह! टी-20 नीलामी में ऐसा छक्का मारा कि गेंद ऐटम बम की तरह सरहद पार पाकिस्तान में जा गिरी और दोनों देशों में मिनटों में तनातनी हो गई.

इधर, भारत में मनमोहन सिंह और पी चिदंबरम 'क्लीन बोल्ड' हो गए. भाई बड़े गुरु निकले ललित मोदी. खेल-खेल में जो व्यक्ति पूरी कांग्रेस पार्टी से अपनी एक हार का बदला सूद सहित चुका दे, उसको गुरु तो क्या गुरु घंटाल भी कहिए तो कोई ग़लत न होगा.

अब आप पूछिएगा, 'अच्छा ललित मोदी ने अपनी कौन सी हार का बदला कांग्रेस पार्टी से ले लिया', चलिए हम आपको याद दिला देते हैं कि कांग्रेस के हाथों ललित मोदी की हार कैसे हुई थी.

यह कोई आज से दो-चार महीने पहले का वाक़या है. राजस्थान क्रिकेट बोर्ड के चुनाव चल रहे थे. अंतरराष्ट्रीय जगत में टी-20 क्रिकेट मैचों की ईजाद कर पूरे क्रिकेट जगत में अपना डंका बजवाने वाले ललित मोदी उस समय राजस्थान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष थे.

पर अब क्रिकेट बोर्ड खिलाड़ियों के नहीं नेताओं के अड्डे बनते जा रहे हैं.

राजनीति का अखाड़ा

तब ही तो राजस्थान क्रिकेट बोर्ड का चुनाव कांग्रेस और भाजपा राजनीति का अड्डा बन गया.

वह राजस्थान कांग्रेस जो गुटबाज़ी के लिए प्रसिद्ध है वही कांग्रेस पार्टी भाजपा से सहानुभूति रखने वाले ललित मोदी को राजस्थान क्रिकेट बोर्ड से बाहर करने के लिए एकजुट हो गई.

ललित मोदी भी ऐसे कोई दूध के धुले नहीं हैं. उनको भी यह समझ में खूब आता है कि क्रिकेट जगत मे टी-20 जैसा हज़ारों करोड़ का धंधा चलाना है तो किसी न किसी राजनीतिक दल का सहारा तो चाहिए ही. शायद यही कारण है कि ललित मोदी राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता वसुंधरा राजे की नाक के बाल हैं.

ललित मोदी भाजपा नेता अरुण जेटली ( जो ख़ुद दिल्ली क्रिकेट बोर्ड के सर्वेसर्वा हैं ) के भी परम मित्र हैं. तो ललित मोदी ठहरे क्रिकेट जगत में भाजपा कैंप के एक पात्र.

Image caption आईपीएल-3 में किसी भी टीम ने पाकिस्तान के खिलाड़ियों के लिए बोली नहीं लगाई थी.

जब राजस्थान क्रिकेट बोर्ड का चुनाव हुआ तो राजस्थान के कांग्रेसी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और राजस्थान के नेता और केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री सीपी जोशी ताल ठोक कर खुल कर ललित मोदी के खिलाफ़ खड़े हो गए. माननीय मंत्री महोदय जोशी जी ने राजस्थान क्रिकेट बोर्ड की अध्यक्षता के लिए पर्चा भर दिया.

प्रदेश की राजनिति में उनके विरोधी अशोक गहलोत ने ललित मोदी के विरूद्ध पीसी जोशी की भरपूर मदद कर दी. जब नतीजा आया तो ललित मोदी चुनाव में धराशायी हो गए और जोशी जी राजस्थान क्रिकेट बोर्ड के अधयक्ष बन गए.

अब आप समझे ना कि माननीय ललित मोदी कांग्रेस पार्टी से क्यों खार खाए बैठे थे. बस जब टी-20 क्रिकेट मैच में खिलाड़ियों की नीलामी का समय आया तो मोदी के लिए हिसाब बराबर करने का समय भी अच्छा था.

पाकिस्तान प्रेम

कारण यह था कि मनमोहन सिंह और पी चिदंबरम ने एक बार फिर पाकिस्तान से पेंग बढ़ानी शुरू कर दी थी.

प्रधानमंत्री अपने सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन को हटाकर पी शिवशंकर मेनन को प्रधानमंत्री कार्यालय इसीलिए लाए थे कि एक बार फिर पाकिस्तान के साथ बातचीत के दरवाजे खुलें. सब जानते हैं कि नारायणन ठहरे कट्टर पाकिस्तान विरोधी फिर उनकी पी चिदंबरम से भी नहीं पट रही थी.

सारांश यह कि मनमोहन सिंह और पी चिदंबरम दोनों पाकिस्तान के साथ एक नई पारी खेलने को पैड बाँध रहे थे लेकिन ललित मोदी ठहरे पुराने क्रिकेट गुरु. उन्होंने टी-20 नीलामी के समय ही पूरे पाकिस्तान की ही विकेट गिरा दी.

यह तो फिर स्वाभाविक था कि टी-20 नीलामी में पाकिस्तानी खिलाड़ियों की बेइज़्ज़ती पर पाकिस्तान में हंगामा खड़ा हो और पाकिस्तान में ऐसा ही हुआ. ऐसे हंगामी माहौल में भला पाकिस्तान के साथ किसी प्रकार का वार्तालाप कहाँ संभव हो सकता है.

पाकिस्तानी खिलाड़ियों की बोली न लगवा कर मोदी अपने खेल में सफल हो गए. इस प्रकार ललित मोदी ने टी-20 नीलामी के समय कांग्रेस पार्टी को राजस्थान क्रिकेट बोर्ड चुनाव में अपनी हार का बदला चुका दिया. तभी ख़ुद पी चिदंबरम ने यह कह कर कि टी-20 नीलामी में पाकिस्तानी खिलाड़ियों के साथ जो कुछ हुआ वह 'दुर्भाग्यपूर्ण था', ललित मोदी की राजनीति से पर्दा उठा दिया.

लेकिन कुछ भी कहिए ललित मोदी ने एक स्ट्रोक में ही कांग्रेस से अपनी हार का बदला चुकता कर लिया, तब ही तो कहा है, ललित मोदी गुरु नहीं गुरु घंटाल निकले.

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